इंदौर में 72 करोड़ का आबकारी घोटाला: ED में 50 प्रापर्टी चिन्हित, संजीव दुबे सहित बाकी अधिकारी बचे
इंदौर में हुए मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित आबकारी घोटाले (करीब 71 करोड़ रुपए) में ईडी की जांच अब अटैचमेंट पर आ गई है। ईडी ने आरोपी ठेकेदार और शराब दुकान के कर्मचारियों की 50 से अधिक प्रॉपर्टी चिन्हित कर ली है। इस मामले में ईडी ने सभी के बयान भी लिए थे, जिनमें आबकारी सहायक आयुक्त संजीव दुबे भी थे।
बयानों में दुबे, पाठक और दांगी के आए थे नाम
ठेकेदारों ने बयानों में दुबे के साथ ही जिला आबकारी अधिकारी बी.एल. दांगी और तत्कालीन एडीईओ महू सुखनंदन पाठक के कामों का खुलासा किया था। वहीं, इस मामले में ईडी की ओर से अब तक अधिकारियों को आरोपी बनाने की बात सामने नहीं आई है।
पूरे मामले को ठेकेदार और शराब दुकान के कर्मचारियों तक ही सीमित रखा गया है। मामले में दुबे पर एक आदिवासी जिले के खनन कारोबारी का भी हाथ होने की बात सामने आ रही है। इसके चलते उनका हर स्तर पर बचाव हो रहा है। इसी कारण दुबे दागी होने के बाद भी जबलपुर में सहायक आयुक्तबने हुए हैं।
ईडी की जांच में यहां तक आया कि हिस्सा कैसे जाता था
ईडी की पूछताछ में तो ठेकेदारों ने यह भी बताया है कि इस घोटाले से कमाई की राशि का हिस्सा कैसे अधिकारियों के पास जाता था। जांच से यह सामने आया है कि यह घोटाला करने वाले मुख्य आरोपी अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत तत्कालीन सहायक आयुक्त दुबे के ही मोहरे थे। दोनों को एक-एक कर कई शराब दुकानें ऑपरेट करने के लिए ठेकेदारों के जरिए मौखिक निर्देशों पर दी गईं।
दुकानें आबकारी नियमों के परे रखकर बिना लिखित करार के दी गईं। वहीं, ईडी ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के विविध फैसलों (पवन डिबूर वर्सेस ईडी) में भी आया है कि भले ही आरोपी पर एफआईआर में नहीं हो, लेकिन यदि इसमें लाभ पा रहा है तो वह भी आरोपी है। बयानों में साफ आया कि इस घोटाले की राशि आबकारी अधिकारियों के पास जा रही थी।
ऐसे अधिकारियों को जा रही थी राशि
मुख्य आरोपी अंश त्रिवेदी ने जांच में ईडी को बताया कि कम राशि का चालान बनाकर जो पैसा बचता था, उसे कैश में आबकारी अधिकारियों को दे दिया जाता था। उसके अकाउंटेंट मनोज शर्मा ने दिसंबर 2015 से मार्च 2016 तक दो से ढाई करोड़ रुपए नकद कन्हैयालाल दांगी को एक्साइज ड्यूटी भरने के लिए दिए। जो बची हुई नकदी थी, वो सीधे आबकारी अधिकारियों के हवाले कर दी जाती थी।
संजीव दुबे का नाम इस तरह सीधे तौर पर आया
संजीव दुबे उस समय इंदौर में सहायक आयुक्त थे और घोटाले में उनका नाम सीधे सामने आया था। आरोपी ठेकेदार अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत समेत अन्य ने भी इसका जिक्र किया। ठेकेदार अविनाश मंडलोई ने बताया कि दुबे के कहने पर ही राजू दशवंत को कुछ दुकानों का कंट्रोल दिया गया। राकेश जायसवाल ने कहा कि दुबे के दबाव में मई 2017 में उन्होंने अपनी जीपीओ (इंदौर) की दुकान राजू दशवंत को ऑपरेशन के लिए दे दी।
वहीं, राजू दशवंत ने माना कि कई दुकानें सिर्फ मौखिक सहमति से, बिना लिखित करार के, दुबे के कहने पर चल रही थीं। जिन दुकानों में चालानों के जरिए घोटाला हुआ, उन्हें चलाने का जिम्मा भी दुबे ने ही तय करवाया था।
बी.एल. दांगी और पाठक के नाम ऐसे आए
ठेकेदारों ने ईडी को बताया कि इस घोटाले में फर्जी चालान बनाने का काम मुख्य तौर पर कन्हैया लाल दांगी ने किया। यह बी.एल. दांगी (जिला आबकारी अधिकारी) के साले हैं। बी.एल. दांगी के निर्देश पर ही अंश त्रिवेदी ने कन्हैयालाल दांगी को अपने साथ शराब दुकानों पर रखा।
वहीं ठेकेदार राकेश जायसवाल के बयान में है कि मई 2017 में संजीव दुबे (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी) व सुखनंदन पाठक (तत्कालीन महू एडीईओ) के दबाव में आकर उन्होंने जीपीओ चौराहा की दुकान राजू दशवंत को ऑपरेट करने के लिए दी थी।
इन आरोपियों की संपत्तियां ईडी में चिन्हित
ईडी ने जांच के बाद आरोपियों और उनके करीबियों की संपत्तियों की पहचान कर ली है और अब इन पर अटैचमेंट किया जा रहा है। ये संपत्तियां अविनाश मंडलोई, प्रतीक्षा मंडलोई, राकेश जायसवाल, राजू दशवंत के पिता रमेश दशवंत और दीपक जायसवाल की पत्नी प्रीति जायसवाल के नाम पर हैं।
इसके अलावा प्रदीप जायसवाल, राहुल चौकसे, विजय श्रीवास्तव की पत्नी ज्योति श्रीवास्तव, योगेंद्र जायसवाल और उनकी पत्नी साधना जायसवाल, गोपाल शिवहरे, उनकी पत्नी पूनम शिवहरे, बेटा संयम शिवहरे, मुकेश शिवहरे की पत्नी भारती शिवहरे और ओमप्रकाश जायसवाल के नाम भी इसमें शामिल हैं।
आरोपी और परिजनों के नाम पर हैं संपत्तियां
इन संपत्तियों में सिर्फ आरोपियों के नाम ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी, बच्चे और अन्य परिजनों के नाम पर भी हैं। कई संपत्तियां संयुक्त रूप से ली गई हैं। खासकर शिवहरे और जायसवाल परिवार की प्रॉपर्टी इसमें शामिल है। इनमें पति-पत्नी, भाई-बहन, पति-पत्नी और बेटे जैसे संयुक्त नाम पर भी प्रॉपर्टी है।
इन आरोपियों के नाम यह हैं मुख्य प्रॉपर्टी
- अविनाश और प्रतीक्षा मंडलोई के नाम पर भी कई संपत्तियां हैं। इसमें विद्या नगर का मकान, बिचौली हप्सी में प्लॉट, माणिकबाग रोड पर फ्लैट, सर्वानंद नगर में आवासीय मल्टी और अक्षरधाम कॉलोनी में प्लॉट शामिल हैं।
- राजू दशवंत परिवार के नाम पर सुखलिया में मकान है।
- जायसवाल परिवार के नाम पर कई प्रॉपर्टी हैं। इसमें सॉलिटेयर पार्क फूटी कोठी में फ्लैट, स्कीम 114 में फ्लैट और यहीं उनका एक मकान शामिल है। सुदामा नगर में भी उनका मकान है। बसंत विहार कॉलोनी में बी ब्लॉक में दो मकान और सी ब्लॉक में एक मकान है। झलारिया के मेट्रो कॉलोनी में उनका प्लॉट है। स्काय पवेलियन में छह से ज्यादा प्रॉपर्टी और देपालपुर के रणमल बिल्लोद में दो प्लॉट भी उनके नाम हैं।
- शिवहरे परिवार के पास भी कई संपत्तियां हैं। बसंत विहार के सी ब्लॉक में उनके तीन मकान हैं। छोटी खजरानी और स्कीम 94 में उनके मकान हैं। पिपल्याकुमार में उनके पास जमीन है। श्रीनाथ पैलेस, पुष्प विहार, स्कीम 78, स्कीम 136 और स्कीम 134 में उनके प्लॉट हैं। शेखर प्लेनेट में उनका डुप्लेक्स है। सांवेर में खेती की जमीन है और पिनैकल ड्रीम्स में उनका फ्लैट है।
यह घोटाला क्या है?
वित्तीय साल 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के दौरान यह घोटाला हुआ था। शुरुआती आकलन में इसमें 41 करोड़ 73 लाख रुपए का गबन बताया गया था, जो बाद में बढ़कर 71 करोड़ 58 लाख रुपए हो गया।
इसमें से आबकारी विभाग ने ठेकेदारों से 22 करोड़ 16 लाख रुपए रिकवर कर लिए, लेकिन 49 करोड़ 42 लाख रुपए अभी भी बाकी हैं। इस मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त दुबे ने 11 अगस्त 2017 को रावजी बाजार थाना में ठेकेदारों और उनसे जुड़े 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। दुबे नवंबर 2015 से सितंबर 2017 तक इंदौर में पदस्थ थे और घोटाला सामने आने के बाद उन्हें हटा दिया गया।
घोटाला कैसे किया?
इस घोटाले में चालान की राशि में हेरफेर करके काम किया गया। ठेकेदार बैंक में चालान में कम राशि दिखाते थे। शब्दों में राशि नहीं लिखी जाती थी और अंकों में जीरो कम लगाते थे।
उदाहरण के तौर पर, वे पांच हजार रुपए का चालान भरते, लेकिन आबकारी भंडार में इसे 50 हजार रुपए बता देते थे। इस तरह फर्जी राशि दिखाकर आबकारी विभाग से शराब की अधिक कीमत वसूल की जाती और असल में कम राशि जमा कराई जाती थी। दुबे के पूरे तीन साल के कार्यकाल में इस तरह कुल 71 करोड़ 58 लाख रुपए का घोटाला हुआ।
ईडी के पीएमएलए केस में ये 14 आरोपी
इसमें ईडी द्वारा जो 14 आरोपी बनाए गए हैं। इनमें अंश त्रिवेदी, राजू दशवंत (अंश और राजू दोनों गिरफ्तार होकर जेल में हैं), विजय श्रीवास्तव, अविनाश मंडलोई, राकेश जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, राहुल चौकसे, दीपक जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, मेसर्स मिलियन ट्रेडर्स भोपाल प्रा. लि., सूर्य प्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, मुकेश शिवहरे व भारती शिवहरे बनाए गए हैं। अभी आबकारी अधिकारियों को चालान में आरोपी नहीं बनाया गया है।
ये खबरें भी पढ़िए...
MP News: सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे पर मारपीट, धमकी देने और अवैध वसूली के आरोप
इंदौर आबकारी घोटाला में सहायक आयुक्त आबकारी संजीव दुबे और उलझे, सरकार ने नया आरोप पत्र थमाया
इंदौर ED ने 71 करोड़ के आबकारी घोटाले में सहायक आयुक्त संजीव दुबे सहित आरोपी अधिकारियों को बुलाया