आबकारी चालान घोटाले में सहायक आयुक्त संजीव दुबे और उलझे, सरकार ने नया आरोप पत्र थमाया

इंदौर आबकारी घोटाले में घिरे सहायक आयुक्त संजीव दुबे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरकार ने घोटाले की राशि 41.71 करोड़ से बढ़ाकर 68.80 करोड़ रुपए करते हुए नया आरोप पत्र जारी किया है।

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Sanjay Gupta
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INDORE. इंदौर में हुए प्रदेश के सबसे चर्चित आबकारी घोटाले में उलझे तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

मध्यप्रदेश शासन वाणिज्यिक कर विभाग ने दुबे को अब नया (पूरक) आरोप पत्र थमा दिया है। इसमें घोटाले की राशि में बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि संजीव दुबे वर्तमान में जबलपुर में पदस्थ हैं।

दुबे को यह मिला नया आरोप पत्र

आबकारी घोटाले को लेकर सहायक आयुक्त आबकारी संजीव दुबे की विभागीय जांच चल रही है। इसके लिए उन्हें पूर्व में भी आरोप पत्र जारी हुआ था।

इसमें घोटाले की राशि 41.71 करोड़ रुपए आंकलित की गई थी। वहीं, अब वाणिज्यिक कर विभाग के अपर सचिव राजेश ओगरे ने दुबे को नया पूरक आरोप पत्र जारी किया है।

इसमें उन्हें 41.71 करोड़ रुपए की जगह 68.80 करोड़ रुपए घोटाले के लिए आरोपी बताया गया है।

आरोप पत्र में बताया घोर लापरवाह, उदासीन

आरोप पत्र में कहा गया कि यह घोटाला 2015-16 से 2017-18 में उनके इंदौर सहायक आयुक्त आबकारी रहते हुए हुआ था। कूटरचित चालानों के जरिए यह किया गया था। वित्त विभाग के जरिए चालानों की जांच के बाद इस राशि का आंकलन किया गया तो यह राशि 68.80 करोड़ रुपए पाई गई थी।

आरोप पत्र में आगे कहा गया कि यह आपके (दुबे) शासकीय काम में बहुत बड़ी लापरवाही, उदासीनता और अकर्तव्यपरायणता का मामला है।

यह मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के बिंदु 3 का उल्लंघन है। इसके चलते मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण व अपील) नियम 1966 के बिंदु 10 के तहत आपको सजा मिल सकती है।

अब दुबे को इस नए आरोप पत्र पर भी जवाब देना होगा।

आरोप पत्र

ईडी की जांच में ठेकेदार ले चुके उनका नाम

द सूत्र ने इसके पहले 25 और 26 दिसंबर को इस घोटाले की ईडी इंदौर के जरिए की गई जांच का पूरा खुलासा किया था।

ईडी ने इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस रजिस्टर किया है। हालांकि इसमें केवल ठेकेदार और शराब दुकानों में काम करने वालों को ही आरोपी बनाया है।

वहीं, द सूत्र के पास मौजूद जांच रिपोर्ट में साफ है कि इन आरोपियों ने ईडी को अपने बयान में कहा है कि इस हेराफेरी से आने वाली राशि आबकारी विभाग में बांटी जाती थी।

साथ ही, फर्जी चालान बनाने वालों को संजीव दुबे के कहने पर ही दुकानों में रखा गया था। हालांकि ईडी ने अभी अधिकारियों को इसमें आरोपी नहीं बनाया है।

मुख्य आरोपी अंश त्रिवेदी का ईडी को बयान

मुख्य आरोपी अंश त्रिवेदी ने जांच के दौरान ईडी को बताया कि कम राशि का चालान भरकर घोटाले से आई रकम कैश के रूप में आबकारी अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दी जाती थी। यानी चालान घोटाले से बची हुई अतिरिक्त नकदी आबकारी अधिकारियों को दे दी गई थी।

अधिकारियों ने इस तरह इन्हें रखवाया

ठेकेदार अविनाश मंडलोई ने बताया कि संजीव दुबे के कहने पर ही राजू दशवंत को दुकानों का कंट्रोल सौंपा गया था। ठेकेदार राकेश जायसवाल ने कहा कि संजीव दुबे के दबाव में मई 2017 में अपनी जीपीओ दुकान राजू दशवंत को ऑपरेशन के लिए दे दी।

इसी तरह राजू दशवंत ने माना कि कई दुकानें मौखिक तौर पर ठेकेदारों की सहमति से बिना किसी लिखित करार के संजीव दुबे के निर्देशन में ऑपरेट की जा रही थी। यानी जिन दुकानों में चालानों के जरिए यह घोटाला हुआ इन्हें ऑपरेट करने के लिए जिम्मा दुबे के जरिए दिलवाया गया था। वह भी आबकारी दुकान ट्रांसफर नियमों के परे जाकर मौखिक तौर पर।

बीएल दांगी का भी आया नाम

आबकारी आयुक्त संजीव दुबे के बाद दूसरा अधिकारी जिनका नाम सामने आया है, वह मंदसौर में पदस्थ बीएल दांगी हैं। यह जिला आबकारी अधिकारी हैं। ठेकेदारों ने ईडी को बताया कि इस घोटाले में फर्जी चालान बनाने का काम मुख्य तौर पर कन्हैया लाल दांगी ने किया था। यह बीएल दांगी के साले हैं। बीएल दांगी के निर्देश पर ही अंश त्रिवेदी ने कन्हैयालाल दांगी को अपने साथ शराब दुकानों पर रखा था।

सुखनंदन पाठक तत्कालीन एडीईओ महू का भी नाम

तीसरे अधिकारी का नाम जो ईडी की चार्जशीट में ठेकेदारों के बयान में सामने आया है, वह हैं सुखनंदन पाठक। वह उस वक्त महू के सहायक जिला आबकारी अधिकारी (एडीईओ) थे। 

ठेकेदार राकेश जायसवाल के बयान के मुताबिक, मई 2017 में संजीव दुबे, जो उस समय सहायक आयुक्त आबकारी थे, और सुखनंदन पाठक ने मिलकर दबाव डाला। इसके बाद, राकेश ने जीपीओ चौराहा की दुकान राजू दशवंत को ऑपरेट करने के लिए दे दी थी।

यह घोटाला क्या है

वित्तीय साल 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के दौरान यह घोटाला हुआ था। पहले इसे लेकर जो आकलन (Assessment) आया, उसमें 41.73 करोड़ रुपए की राशि थी। बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 70 करोड़ रुपए के आसपास पहुंच गया था।

आबकारी विभाग ने ठेकेदारों से 22.16 करोड़ रुपए रिकवर कर लिए, लेकिन अभी भी करीब 49 करोड़ रुपए की राशि बाकी है।

इस मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे ने 11 अगस्त 2017 को रावजी बाजार थाना में ठेकेदारों और उनसे जुड़े 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। दुबे इंदौर में नवंबर 2015 से सितंबर 2017 तक पदस्थ थे, लेकिन घोटाला सामने आने के बाद उन्हें हटा दिया गया था।

घोटाला कैसे किया

इस घोटाले में चालान राशि भरने में हेरफेर कर यह कांड हुआ था। इसमें ठेकेदार बैंक में चालान में राशि कम लिखते थे, शब्दों में राशि नहीं लिखी जाती थी।

अंकों में जीरो कम लगाते जैसे 5000 रुपए का चालान भरते थे। इसे जब आबकारी भंडार में बताते तो जीरो ज्यादा लगाकर 50 हजार बता देते थे।

इस तरह फर्जी राशि भरकर आबकारी विभाग से शराब अधिक कीमत की उठाते और राशि कम जमा कराते।

ईडी के पीएमएलए केस में ये 14 आरोपी

ईडी ने इस मामले में 14 आरोपियों के नाम तय किए हैं। इनमें अंश त्रिवेदी, राजू दशवंत (जो दोनों गिरफ्तार होकर जेल में हैं), विजय श्रीवास्तव, अविनाश मंडलोई, राकेश जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, राहुल चौकसे, दीपक जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, मिलियन ट्रेडर्स भोपाल प्राइवेट लिमिटेड, सूर्य प्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, मुकेश शिवहरे और भारती शिवहरे शामिल हैं। फिलहाल, आबकारी अधिकारियों को चालान में आरोपी नहीं बनाया गया है।

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