इंदौर में बिना लाइसेंस बोरिंग के पानी से बना रहे पंजाबी लस्सी, पेप्सी, मैंगो जूस, 635 किलो खाद्य सामग्री जब्त
News In Short
- बोरिंग के पानी से जूस, लस्सी और पेप्सी बनाई जा रही थी।
- बिना लाइसेंस के प्रोडक्शन और पैकेजिंग हो रही थी।
- 635 किलो खाद्य सामग्री मौके से जब्त की गई है।
- जांच में फूड सैंपल रिपोर्ट और नियमों का पालन नहीं मिला है।
- शहर के अन्य ठिकानों पर भी जांच और सैंपलिंग की गई है।
News In Detail
इंदौर में खाद्य मिलावट बड़े पैमाने पर जारी है। जिला प्रशासन ने भी इनके खिलाफ अभियान चलाया है। अब कार्रवाई में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बोरिंग के पानी से पेय पदार्थ बनाए जा रहे हैं।
साथ ही बिना लाइसेंस लिए ही कई पदार्थों की पैकिंग कर उन्हें बेचा जा रहा है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को मिली गोपनीय खबर के बाद खाद्य टीम भेजकर यह जांच कराई गई।
यहां हुई कार्रवाई, यह मिला
खाद्य टीम द्वारा हुकुमचंद कॉलोनी स्थित हिना इंडस्ट्रीज का निरीक्षण किया गया। यह दिनेश जायसवाल की फर्म है। इसमें टीम ने मैंगो जूस, पेप्सी, पंजाबी लस्सी, ऑरेंज बेवरेज का निर्माण और पैकेजिंग पाई है।
जांच में पाया गया कि इन्हें बनाने के लिए बोरिंग के पानी का उपयोग हो रहा है। साथ ही उपयोग में आ रहे खाद्य पदार्थों की किसी तरह की फूड सैंपल रिपोर्ट भी नहीं थी। लाइसेंस शर्तों का भी पालन नहीं हो रहा था।
मौके पर 635 किलो खाद्य सामग्री जब्त
मौके से पांच नमूने (Sample) जांच के लिए गए हैं। वहीं 635 किलो खाद्य सामग्री को जब्त कर लिया गया है। इसमें लेबलिंग संबंधी शर्तों में भारी अनियमितता पाई गई है। निर्माण को भी तत्काल रुकवा दिया गया है।
यहां भी हुई जांच
इसके साथ ही न्यू ट्रेक इंफो मीडिया, शांति पैराडाइस, निरंजनपुर देवास नाका पर भी जांच हुई है। इसमें फूड हैंडलर्स के मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं पाए गए हैं। कर्मचारी एप्रन, कैप आदि का उपयोग नहीं कर रहे थे।
मौके पर गंदगी पाई गई है। यहां से भी चार नमूने जांच में लिए गए हैं। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद लेटेस्ट बेकरी धार रोड की भी जांच की गई है। यहां भी दूध, पेप्सी, लस्सी आदि के सैंपल जांच में लिए गए हैं।
जानें क्यों बोरिंग का पानी घातक होता है?
जिला खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि नियम से खाद्य सामग्री बनाने में जो भी सामग्री या पानी उपयोग हो रहा है, उसके रॉ मैटेरियल की सैंपल रिपोर्ट होना चाहिए। पानी हमेशा पीने योग्य ही होना चाहिए और इसकी सैंपल रिपोर्ट होना चाहिए।
बोरिंग के पानी की सैंपल रिपोर्ट पास नहीं होती है, क्योंकि जमीन के कई तत्व इसमें मिले होते हैं। इसका सीधे उपयोग करना घातक हो सकता है, जैसे अभी भागीरथपुरा में बोरिंग के पानी में बैक्टीरिया मिला था। इसलिए खाद्य सामग्री में आर.ओ. पानी का उपयोग किया जाता है।
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