इंदौर HC ने जैन को हिंदू मैरिज एक्ट से अलग मानने के फैमिली कोर्ट के आदेश को किया खारिज
इंदौर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट एडिशनल प्रिंसीपल जज के जैन समाज को लेकर आए विवादित आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही इस आदेश को लेकर गहरी नाराजगी जताई है और इस आदेश को औचित्यहीन करार दिया है। हाईकोर्ट ने इस आदेश को पूरी तरह से गलत करार दिया।
हाईकोर्ट ने की तीखी टिप्पणी
हाईकोर्ट में जस्टिस एसए धर्माधिकारी व जस्टिस संजीव कलगांवकर की डबल बेंच द्वारा जारी आदेश में इस आदेश को लेकर तीखी टिप्पणी भी की गई है। बेंच ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख को हिंदू मैरिज एक्ट में सभी पक्षों से बात करते हुए रखा था। ऐसे में एडिशनल प्रिंसीपल जज फैमिली कोर्ट को इसे अपने विचारों से अलग करने की जरूरत नहीं थी। वह इस केस को चाहे तो हाईकोर्ट को रेफर कर सकते थे।
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यह हुआ था मामला
एक अन्य मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा
इसी तरह का एक अन्य मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा है। उसमें भी फैमिली कोर्ट ने जैन समाज के तलाक के मामलों में सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उनका तर्क था कि जैन समाज को माइनॉरिटी का दर्जा मिल गया है तो उनके तलाक के केस को भी स्पेशल कोर्ट में ही सुना जाए। इसी को जैन समाज की महिला के एडवोकेट रोहित मंगल की तरफ से हाईकोर्ट में चैलेंज करते हुए पिटीशन दायर की थी।