बदहाल ट्रैफिक पर इंदौर हाईकोर्ट नाराज, स्थिति नहीं सुधरी तो पीएस को बुलाने की कही बात
इंदौर हाईकोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में एक बार फिर ट्रैफिक संबंधी विविध याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इसमें फिर एक बार बदहाली की पोल खुली।
खुद बेंच ने ही अपने अनुभव बता दिए और कहा कि यहां वाहन चालक रेड सिग्नल को भी नहीं मान रहा है। यह भी संकेत दिए कि स्थिति नहीं सुधरी को प्रमुख सचिव गृह विभाग व अन्य अधिकारियों को फिर तलब किया जाएगा।
साल 2019 से चल रहा ट्रैफिक का मामला
बेंच ने W.P. No. 12234/2019 व अन्य लिंक जनहित याचिकाओं में सुनवाई करते हुए इंदौर ट्रैफिक पर चिंता जाहिर की। याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया के साथ अधिवक्ता शिरीन सिलावट उपस्थित हुए।
जस्टिस अभ्यंकर ने सुनाया अपना अनुभव
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने इंदौर की सड़कों पर अपने स्वयं के अनुभव बताए। उन्होंने बताया कि खुलेआम रेड लाइट का उल्लंघन होने के बावजूद उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध यातायात पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई नहीं देती। उन्होंने बताया कि एक मोटरसाइकिल चालक रेड लाइट ( traffic signal ) का उल्लंघन करते हुए सड़क पार कर आया और अपनी मोटरसाइकिल उनकी कार के ठीक बगल में लाकर खड़ी कर दी।
तो प्रमुख सचिव (गृह) को बुला सकते हैं
बेंच ने स्पष्ट संकेत दिया कि यह स्थिति अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकती। बेंच ने कहा कि यदि यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता है तो मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, गृह विभाग को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है।
एडिशनल डीसीपी से मांगी स्टाफ की जानकारी
एडिशनल डीसीपी (ट्रैफिक), इंदौर विक्रम सिंह रघुवंशी को व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया। यातायात विभाग को अपनी स्वीकृत पद संख्या, वास्तविक उपलब्ध बल, रिक्त पदों तथा कुल स्टाफ की कमी का विस्तृत विवरण भी जवाब में प्रस्तुत करने को कहा गया। साल 2013 के आकलन में ही इंदौर के लिए 800 से अधिक अतिरिक्त यातायात कर्मियों की आवश्यकता बताई गई थी, जबकि आज भी बड़ी संख्या में स्वीकृत पद रिक्त हैं।
पुलिसकर्मी कम और CCTV भी बंद
मैदानी अमले की कमी पर चर्चा के दौरान यातायात नियंत्रण के लिए CCTV निगरानी पर निर्भरता की बात सामने आई। यह भी सामने आया कि शहर में लगे अधिकांश CCTV कैमरे वर्तमान में काम नहीं कर रहे हैं। न्यायालय ने कुछ चौराहों पर मात्र 20–23 सेकंड के ग्रीन सिग्नल की अवधि पर भी चिंता जताई। इतने में ट्रैफिक कैसे निकल सकेगा, खासकर बड़े व्यस्त चौराहों पर संभव नहीं है।
गड्ढों पर भी चर्चा
कोर्ट ने सड़कों के गड्ढों, जलभराव और अपर्याप्त वर्षाजल निकासी को भी यातायात एवं नागरिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय माना। यह भी पूछा गया कि इंदौर नगर निगम के मोबाइल ऐप में ऐसी सरल व्यवस्था क्यों नहीं है, जिसके माध्यम से नागरिक गड्ढों और जलभराव की तस्वीरें सीधे अपलोड कर शिकायत दर्ज करा सकें, ताकि उनका शीघ्र निराकरण किया जा सके। यह भी सामनने आया कि यातायात विभाग से संबंधित वेबसाइट और सर्वर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
साल 2019 से लगातार निर्देश दे रहा है हाईकोर्ट
- 14.10.2019: ट्रैफिक सिग्नलों को 24 घंटे चालू रखने तथा व्यस्त समय में प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए।
- 07.05.2026: यातायात पुलिस में स्टाफ की कमी, सिग्नलों के ऑटोमेशन तथा अंतरिम व्यवस्था के रूप में स्वयंसेवकों की सहायता लेने के विषय पर न्यायालय ने पुनः विचार किया।
- 19.06.2026: न्यायालय ने अंतरिम यातायात व्यवस्था के लिए त्वरित कदम उठाने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्काउट्स एवं NCC कैडेट्स की सहायता लेने की बात स्पष्ट की। . .नगर निगम से 36 स्वचालित ट्रैफिक सिग्नलों को कार्यशील बनाने के लिए भी त्वरित कदम उठाने की अपेक्षा की गई थी।
- 18.08.2026: न्यायालय के समक्ष एक बार फिर स्टाफ की कमी, कमजोर प्रवर्तन, बंद CCTV कैमरे, ट्रैफिक सिग्नलों की व्यवस्था, गड्ढे, जलभराव तथा खराब डिजिटल अधोसंरचना जैसे बुनियादी मुद्दे सामने आए।
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