इंदौर में 20 करोड़ की सरकारी जमीन का बन गया फर्जी नामांतरण आदेश
Sanjay Gupta | Aug 18, 2026, 13:16 IST
indore sanwer fake land mutation order
इंदौर की सांवेर तहसील के चित्तौड़ा गांव में करीब 20 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की सरकारी जमीन के नामांतरण का फर्जी आदेश सामने आया है। जमीन लंबे समय से निजी नाम पर दर्ज है और इस पर प्राथमिक कृषि साख समिति से कर्ज भी लिया गया है।
इंदौर की सांवेर तहसील के चित्तौड़ा गांव की एक सरकारी जमीन लंबे समय से निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। मामला तब और गंभीर हो गया, जब यह जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी गई।
जमीन खरीदने वाले ने नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार के पास आवेदन दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आवेदन पर कार्रवाई होने से पहले ही नामांतरण का फर्जी आदेश तैयार कर लिया गया।
जुलाई 2025 में सांवेर के नायब तहसीलदार सीएल टाक के नाम से एक नामांतरण आदेश जारी किया गया। आदेश में लिखा था कि तेजूबाई ने 1.456 हेक्टेयर जमीन राजेश वर्मा से खरीदी है।
रिकॉर्ड में जमीन खरीदने की तारीख 24 जून 2021 बताई गई। साथ ही यह भी लिखा गया कि तेजूबाई ने जमीन अपने नाम कराने के लिए आवेदन दिया था और उसका आवेदन मंजूर कर लिया गया। लेकिन जांच में यह नामांतरण आदेश फर्जी निकला।
असल में इस मामले का असली आदेश 6 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ था और केस नंबर भी वही था। आदेश में साफ लिखा गया कि तेजूबाई और राजेश वर्मा दोनों ही कोर्ट में पेश नहीं हुए।
पटवारी की रिपोर्ट में सामने आया कि यह जमीन साल 1956 से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रही है। इसके अलावा जमीन सहकारी समिति में बंधक है और उस पर कर्ज भी चल रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जमीन अहस्तांतरणीय है, यानी इसे बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर नामांतरण की मांग खारिज कर दी गई।
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तहसीलदार सीएल टाक ने साफ कहा कि जुलाई 2025 में जारी किया गया नामांतरण आदेश फर्जी है। उन्होंने बताया कि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और पहले हरिजन संस्था के नाम पर रही है।
जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और इसे दोबारा सरकारी दर्ज (Indore News) कराने के लिए फाइल उच्च स्तर पर भेजी गई है। तहसीलदार के मुताबिक, फर्जी नामांतरण आदेश तैयार कर जमीन की खरीदी-बिक्री करने की कोशिश की जा रही है।
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इंदौर की सांवेर सीट
जमीन खरीदने वाले ने नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार के पास आवेदन दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आवेदन पर कार्रवाई होने से पहले ही नामांतरण का फर्जी आदेश तैयार कर लिया गया।
क्या है मामला
रिकॉर्ड में जमीन खरीदने की तारीख 24 जून 2021 बताई गई। साथ ही यह भी लिखा गया कि तेजूबाई ने जमीन अपने नाम कराने के लिए आवेदन दिया था और उसका आवेदन मंजूर कर लिया गया। लेकिन जांच में यह नामांतरण आदेश फर्जी निकला।
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असल में आदेश अक्टूबर में यह हुआ था
पटवारी की रिपोर्ट में सामने आया कि यह जमीन साल 1956 से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रही है। इसके अलावा जमीन सहकारी समिति में बंधक है और उस पर कर्ज भी चल रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जमीन अहस्तांतरणीय है, यानी इसे बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर नामांतरण की मांग खारिज कर दी गई।
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क्या बोल रहे तहसीलदार
जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और इसे दोबारा सरकारी दर्ज (Indore News) कराने के लिए फाइल उच्च स्तर पर भेजी गई है। तहसीलदार के मुताबिक, फर्जी नामांतरण आदेश तैयार कर जमीन की खरीदी-बिक्री करने की कोशिश की जा रही है।
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