इंदौर नामांतरण घोटाला: अधिकारियों की आईडी से हुआ खेल,निगम के 2 कर्मचारी बर्खास्त
Sanjay Dhiman | Aug 17, 2026, 20:34 IST
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इंदौर नगर निगम में 350 संपत्तियों के फर्जी नामांतरण मामले में जांच पूरी हो गई है। जांच के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR के निर्देश, दो कर्मचारी बर्खास्त, दो निलंबित।
इंदौर नगर निगम में करीब 350 संपत्तियों के नामांतरण में गड़बड़ी सामने आई। जांच में पता चला कि दो अधिकारियों की आईडी का गलत इस्तेमाल हुआ। कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार पर FIR के निर्देश दिए गए हैं। दो आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त किए गए। दो स्थाई कर्मचारी निलंबित किए गए हैं।
इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां करीब 350 संपत्तियों का नामांतरण गलत तरीके से किया गया। यह जानकारी जांच रिपोर्ट में सामने आई है। अब निगमायुक्त ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जांच में पता चला कि यह पूरा नामांतरण दो उपायुक्तों की आईडी से किया गया। इनके नाम केशव सगर और प्रदीप जैन हैं। असल में यह काम कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार ने किया। उसने अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग किया।
मामला सामने आते ही निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने एक जांच समिति बना दी। इस समिति में तीन सदस्य शामिल किए गए। इनमें अपर आयुक्त आकाश सिंह भी शामिल थे। साथ ही स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन को भी जोड़ा गया। आईटी विभाग से कपिल गेहलोत को समिति में रखा गया।
जांच के दौरान निगम ने 50 से ज्यादा संपत्तिधारकों को नोटिस भेजे। अपर आयुक्त आकाश सिंह ने खुद इन लोगों से बात की। उन्होंने हर मामले की बारीकी से जानकारी ली। इससे साफ तस्वीर सामने आने में मदद मिली।
इसके बाद आईटी विभाग ने ई-पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच शुरू की। मुख्यालय के पोर्टल पर पुराने रिकॉर्ड नहीं मिले। इस वजह से मामला शासन स्तर तक पहुंचाया गया। वहां से आगे की जांच का जिम्मा सौंपा गया।
जांच पूरी होने के बाद निगम ने बड़ा फैसला लिया। कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार के खिलाफ FIR के निर्देश दिए गए हैं। यह FIR MG रोड थाने में दर्ज कराई जाएगी। निगम की कार्रवाई के बाद अब पुलिस जांच भी शुरू होगी।
मामले में निगम ने दो आउटसोर्स कर्मचारियों को हटा दिया है। इनके नाम संतोष मालवीय,सौरभ तिवारी और अजय सोलंकी तीसरा कर्मचारी हैं। तीनों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई।
साथ ही जोन 4 में पदस्थ प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी तरुण जोशी को भी कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है।
इसके अलावा निगम के दो स्थाई कर्मचारियों पर भी गाज गिरी। रियाज अंसारी और संजय यादव को निलंबित किया गया है। जिम्मेदारी तय होने के बाद यह कदम उठाया गया। निगम ने साफ कर दिया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
इस मामले में उपायुक्त प्रदीप जैन और केशव सगर को पहले ही पद से हटाया जा चुका था। उनकी जगह नई उपायुक्त गरिमा पाटीदार को तैनात किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब जांच पूरी होने के बाद निगम ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है।
यह पूरा मामला नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच से और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच कमेटी की जांच में मिडिलमैन कुशल गुरू का भी नाम आया है। कई संपत्तियों के नामांतरण में इसकी भूमिका पाई गई है। निगम जल्द ही इस पर भी एफआईआर करवाएगा। इसकी फोटो और संपर्क नंबर आदि भी अपर आयुक्त आकाश सिंह के पास आ गए हैं।
वहीं जांच में यह भी आया है कि कई संपत्तियों के नामांतरण कब्जे की मंशा से कराए गए हैं। इसमें नोटरी पर संपत्तियां थी, इनके पास किसी तरह के दस्तावेज नहीं थे और इन्होंने भी इस खेल में संपत्तियों को चढ़वाया। इससे बैंक लोन, संपत्ति विक्रय में आसानी हो सके। इसमें भी कुछ लोगों के नाम आए हैं, जिन्होंने संपत्ति नामांतरण में खेल किया है। इसमें संजीव मित्तल का भी नाम आया है।
वहीं किस व्यक्ति द्वारा किस आईपी एड्रेस से यह खेल हुआ इसके लिए जांच कमेटी सदस्य आईएएस अर्थ जैन ने विशेष आईटी जांच की। इसमें एमपी साइबर सिक्यूरिटी टीम से भी जांच कराई गई। इसमें यह तो आया कि कई विविध आईपी एड्रेस का उपयोग कर यह हुआ है लेकिन किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका का खुलासा नहीं हुआ। यह भी आया कि यह संपत्तियों के नामांतरण छुट्टी के दिन, देर रात, अलसुबह भी हुए हैं। जांच कमेटी साइबर थाने में भी इसकी एफआईआर करा रही है। माना जा रहा है कि यह एफआईआर मंगलवार को हो जाएगी।
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इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां करीब 350 संपत्तियों का नामांतरण गलत तरीके से किया गया। यह जानकारी जांच रिपोर्ट में सामने आई है। अब निगमायुक्त ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
फर्जी आईडी से हुआ खेल
मामला सामने आते ही निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने एक जांच समिति बना दी। इस समिति में तीन सदस्य शामिल किए गए। इनमें अपर आयुक्त आकाश सिंह भी शामिल थे। साथ ही स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन को भी जोड़ा गया। आईटी विभाग से कपिल गेहलोत को समिति में रखा गया।
संपत्तिधारकों से हुई सीधी बात
इसके बाद आईटी विभाग ने ई-पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच शुरू की। मुख्यालय के पोर्टल पर पुराने रिकॉर्ड नहीं मिले। इस वजह से मामला शासन स्तर तक पहुंचाया गया। वहां से आगे की जांच का जिम्मा सौंपा गया।
कंप्यूटर ऑपरेटर पर होगी FIR
तीन कर्मचारी नौकरी से बर्खास्त
साथ ही जोन 4 में पदस्थ प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी तरुण जोशी को भी कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है।
फर्जीवाड़े में 2 कर्मचारी सस्पेंड
पहले ही हट चुके थे दो उपायुक्त
यह पूरा मामला नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच से और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
मिडिलमैन का भी आया नाम
संपत्तियों के नामांतरण कब्जे के लिए
साइबर सेल में भी होगी एफआईआर
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