प्रेमी से मिलने जा रही बहन की ऑनर किलिंग, कैमरे की धूल ने खोल दिया राज
Aman Vaishnav | Jul 07, 2026, 12:36 IST
भाई ने बहन को मौत के घांट उतारा
इंदौर के हीरा नगर में ज्योति अग्रवाल की मौत मामले में पुलिस ने ऑनर किलिंग का खुलासा किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि ज्योति की मौत जहर से नहीं, बल्कि मारपीट के कारण सिर में आई गंभीर चोट से हुई थी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- इंदौर के हीरा नगर इलाके में एक युवती की मौत का मामला नया मोड़ ले चुका है।
- परिवार ने पहले बताया था कि युवती ने जहर खाया था।
- लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह सामने आई है।
- पुलिस ने युवती के भाई और मां को गिरफ्तार कर लिया है।
- पुलिस इसे ऑनर किलिंग का मामला मान रही है।
वह खुद ई-कॉमर्स का व्यवसाय चलाती थी। शुरुआत में परिवार ने पुलिस को बताया कि ज्योति ने खुद जहर खा लिया था इस वजह से उसकी मौत हुई थी। अब पुलिस जांच में यह कहानी झूठी निकली है।
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क्या था शुरुआती दावा
परिजन ने उस समय बताया था कि ज्योति का किसी लड़के से प्रेम प्रसंग था। वह उससे शादी करना चाहती थी। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।
वहीं पुलिस को बताया गया कि विरोध से आहत होकर ज्योति ने खुद को नुकसान पहुंचाया था। उसने मोबाइल तोड़ा और कमरे में जाकर जहर खा लिया। शुरुआती जांच में यही बात मानी गई थी। लेकिन आगे की पड़ताल में कई सवाल खड़े हो गए।
सीसीटीवी में मिली गड़बड़ी
जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन का वीडियो डीवीआर में मौजूद ही नहीं था। संभावना जताई गई कि डेटा को जानबूझकर फॉर्मेट किया गया।
इसके अलावा परिवार से पूछा गया तो जवाब मिला कि उन्हें कैमरा बंद होने की जानकारी नहीं थी। वहीं जब जहर की पुड़िया के बारे में परिवार से पूछा तो वे अनजान रह गए।
पूछताछ में गहराता गया शक
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा
वहीं अगर ज्योति ने सच में जहर खाया होता तो उसके अंग नीले पड़ जाते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्ट में उसके कान के पीछे गंभीर चोट का जिक्र है। इन तथ्यों ने पुलिस की शंका को पुख्ता कर दिया।
जातिगत रिश्ते का विरोध
इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और मारपीट शुरू हो गई। आशंका है कि इसी दौरान भाई ने ज्योति का सिर दीवार पर टकराया। इससे उसे गंभीर चोट आई और बाद में उसकी मौत हो गई।
जहर डालकर बदली गई कहानी
गिरफ्तारी और आगे की जांच
डीवीआर को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट में सामने आया कि डीवीआर क्षतिग्रस्त होने से उसका डेटा रिकवर नहीं हो सका है। पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है।
ऑनर किलिंग क्या होती है?
अब रजिस्टर्ड ही नहीं होते केस
दूसरी बड़ी बात कि ऑनर किलिंग एक अलग श्रेणी के तौर पर NCRB की टेबल में स्थायी रूप से है ही नहीं। 2017 में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद सरकार ने honour killing और hate crime जैसी कैटेगरी बनाई थी, लेकिन एक साल बाद ही ये टेबल से हटा दी गईं।
सरकार ने संसद में बताया था कि राज्यों से मिला डेटा अविश्वसनीय था। तो सबसे ताजा state-wise आंकड़ा कहां से आता है? गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह डेटा साझा किया था। यही आज तक का सबसे नया आधिकारिक आंकड़ा है, और यह 2022 तक का है।
NCRB (National Crime Records Bureau) के आधिकारिक डेटा के आधार पर, साल 2020 से 2022 के बीच 'Honour Killing' (ऑनर किलिंग) के मकसद से दर्ज किए गए मर्डर केस का राज्यवार और कुल मामलों का टेबल नीचे दिया गया है:
ऑनर किलिंग मर्डर केस (2020-2022)
| राज्य / क्षेत्र | 2020 | 2021 | 2022 |
| मध्य प्रदेश | 3 | 6 | 5 |
| पंजाब | 4 | 8 | 4 |
| झारखंड | 4 | 8 | 4 |
| हरियाणा | 4 | 4 | 0 |
| तेलंगाना | 2 | 0 | 3 |
| उत्तर प्रदेश | 0 | 2 | 0 |
| बिहार | 2 | 0 | 1 |
| छत्तीसगढ़ | 1 | 0 | 1 |
| केरल | 1 | 0 | 0 |
| आंध्र प्रदेश | 2 | 1 | 0 |
| गोवा | 0 | 1 | 0 |
| कर्नाटक | 0 | 1 | 0 |
| मेघालय | 0 | 1 | 0 |
| देश भर में कुल मामले | 25 | 33 | 18 |
नोट: इस डेटा में केवल वही मामले शामिल हैं जो पुलिस रिकॉर्ड में आधिकारिक तौर पर Honour Killing के मोटिव के साथ दर्ज किए गए थे।
कई शोधकर्ता और अधिकार समूह मानते हैं कि यह डेटा बुरी तरह under-reported है। पुलिस अक्सर ऑनर किलिंग को सीधे मर्डर के तौर पर दर्ज कर देती है, बिना मोटिव को अलग से टैग किए।
इसलिए असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, यह सिर्फ वो केस हैं जिनमें पुलिस ने खुद मोटिव को honour killing के तौर पर वर्गीकृत किया।
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