इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला पर सुनवाई, हिंदू पक्ष ने कहा- मस्जिद में तब्दील करने के कई प्रयास हुए
News in short
- इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला मामले की सुनवाई में हिंदू पक्ष ने अधिकार की मांग की।
- विष्णु शंकर जैन ने इतिहास और मस्जिद में बदलने के प्रयासों का उल्लेख किया।
- जैन ने कहा कि भोजशाला पर हिंदू समाज का पूर्ण अधिकार होना चाहिए।
- हिंदू फ्रंट की याचिका में नमाज पर स्थायी रोक और पूजा की स्वतंत्रता की मांग की गई।
- इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
News in Detail
इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को भोजशाला मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हिंदू पक्ष ने इस स्थान के इतिहास और इसे मस्जिद में तब्दील करने के प्रयासों को उठाया। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में तर्क रखा कि भोजशाला पर हिंदू समाज का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। उन्होंने न्यायालय से मांग की कि यहां पूजा की स्वतंत्रता दी जाए और नमाज पर स्थायी रूप से रोक लगाई जाए।
मस्जिद में बदलने के प्रयास
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने बताया कि मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा कई बार भोजशाला को मस्जिद में बदलने की कोशिश की गई। लेकिन प्रयास असफल रहे। उन्होंने कहा कि भोजशाला को पवित्र स्थान से नष्ट करने की भी कोशिश की गई थी और उसके मलबे का इस्तेमाल किया गया था।
क्या बोले वकील विष्णु शंकर जैन?
हिंदू फ्रंट द्वारा दायर याचिका में कई प्रमुख मांगें की गई हैं। जैन ने अदालत में बताया कि भोजशाला पर हिंदू समाज का पूर्ण आधिपत्य होना चाहिए। इसके अलावा नमाज को हमेशा के लिए बंद किया जाए और मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाए। साथ ही बिना रोक-टोक के माता सरस्वती की पूजा हो।
अगली सुनवाई 7 अप्रैल को
इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल, मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है। आज की सुनवाई में अधिवक्ता विनय जोशी, पार्थ यादव, मनी मुंजाल, सौरभ सिंह और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहे।
क्या है हिंदू फ्रंट की मांग
- भारत सरकार को ट्रस्ट अधिनियम 1882 के प्रावधानों के तहत भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण के मामलों के प्रशासन और प्रबंधन के लिए ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए जाएं।
- इसी ट्रस्ट को देवी सरस्वती की प्रतिमा को फिर स्थापित करने तथा देवी सरस्वती के दर्शन, पूजा और उपासना की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएं।
- मंदिर परिसर के भीतर मुसलमानों को किसी भी प्रकार से प्रार्थना या पूजा करने की अनुमति देने से रोकने के लिए आदेश जारी हो।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के निदेशक के 7 अप्रैल 2003 को पारित आदेश के उस पैराग्राफ को रद्द किया जाए, जो हिंदुओं को पूजा करने के अधिकार को प्रतिबंधित करता है। हिंदुओं को बिना किसी प्रतिबंध के हर दिन पूजा करने की मंजूरी दी जाए।
- भारत सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह यूनाइटेड किंगडम के लंदन संग्रहालय से देवी सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने और धार भोजशाला में स्थापित करने का हर संभव प्रयास करे।
- प्रतिवादियों को मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति देने से रोका जाए।
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