शराब कारोबारी पिंटू भाटिया के परिवार की अग्रवाल डिस्टलरीज का केस, जस्टिस अभ्यंकर ने खुद को किया अलग
Sanjay Gupta | Oct 13, 2026, 14:36 IST
इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने खुद को अग्रवाल डिस्टलरीज केस से अलग किया
इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने खुद को एक केस से अलग कर लिया है। यह केस इंदौर के जाने-माने और चर्चित शराब कारोबारी पिंटू भाटिया उर्फ हरमिंदर सिंह भाटिया के परिवार की कंपनी से जुड़ा है। केस कंपनी एचएस भाटिया ग्रुप की अग्रवाल डिस्टलरीज प्रालि का है। यह केस तीन बार जस्टिस अभ्यंकर की बेंच में लिस्ट हुआ।
बता दें कि दो बार लिखित में आदेश जारी कर जस्टिस ने खुद को अलग किया है।
यह केस सबसे पहले जून 2026 में जस्टिस विजय शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में लगा था। इसके बाद 10 अगस्त को यह केस जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में पहुंचा।
इस दौरान जस्टिस अभ्यंकर ने लिखित आदेश दिया कि इस केस को ऐसी दूसरी बेंच में लगाया जाए, जिसमें वे शामिल न हों।
इसके बावजूद 30 सितंबर को यह केस फिर उन्हीं की बेंच में लगा। उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 5 अक्टूबर को एक बार फिर केस जस्टिस अभ्यंकर की बेंच में पहुंच गया।
इस पर जस्टिस अभ्यंकर ने दोबारा लिखित आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को ऐसी दूसरी बेंच में लगाया जाए, जिसमें वे सदस्य न हों। इस तरह जस्टिस अभ्यंकर ने दो बार लिखित आदेश देकर खुद को इस केस से अलग किया।
पिंटू भाटिया का परिवार जुड़ा है
बता दें कि अग्रवाल डिस्टलरीज कंपनी एचएस भाटिया ग्रुप की है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के रिकॉर्ड के मुताबिक, कंपनी में फिलहाल छह डायरेक्टर हैं। इनमें शराब कारोबारी पिंटू भाटिया के बेटे जयविंदर सिंह भाटिया और उनकी पत्नी गुरवीन कौर भाटिया शामिल हैं। इनके अलावा नवीन अग्रवाल, आकाश शिवहरे, मीना देवी राय और मानवेंद्र प्रताप सिंह भी कंपनी के डायरेक्टर हैं। कंपनी का ऑफिस इंदौर के विजय नगर में है।
पिंटू भाटिया इंदौर के चर्चित शराब कारोबारियों में शामिल हैं। करीब पांच साल पहले इंदौर में शराब सिंडिकेट की बैठक के दौरान अर्जुन ठाकुर पर गोली चलने के मामले में भी उन्हें आरोपी बनाया गया था। इससे पहले साल 2017 में रीवा के चुरहट में शराब से जुड़े एक मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
इसके अलावा इंदौर के पंजाब एंड सिंध बैंक से जुड़ी फर्जी बैंक गारंटी के मामले में भी ईओडब्ल्यू (EOW) के पास शिकायत पहुंची थी और इसकी जांच हो चुकी है।
बता दें कि अग्रवाल डिस्टलरीज की ओर से जयविंदर सिंह भाटिया ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की है। इसमें मध्यप्रदेश शासन के कमर्शियल टैक्स विभाग और खरगोन के सीटीओ को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका के मुताबिक, साल 2013 में कंपनी से हर महीने वैट रिटर्न लिया जाता था। इसके बाद 2016 में नियम आया कि जिन डीलर्स का तिमाही टैक्स सवा छह करोड़ रुपए है, उन्हें एडवांस टैक्स भरना होगा।
इसके बाद मई 2026 में कंपनी को नोटिस जारी किया गया। इसमें साल 2022-23 से 2025-26 तक के बकाया टैक्स और ब्याज के रूप में 62 लाख 46 हजार रुपए मांगे गए।
कंपनी ने इसी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उसका कहना है कि वह नियमित रूप से टैक्स जमा कर रही है। इसके बावजूद मनमाने तरीके से नोटिस जारी किया गया। कंपनी का यह भी दावा है कि नोटिस जारी करने से पहले उनसे एक बार भी जवाब नहीं मांगा गया।
आमतौर पर किसी जस्टिस के खुद को केस से अलग करने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें दो स्थितियां अहम मानी जाती हैं। पहली, जब जस्टिस का केस से जुड़े किसी पक्षकार से पहले से कोई परिचय या संबंध रहा हो। ऐसे में मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर कोई सवाल न उठे, इसलिए जस्टिस खुद को केस से अलग कर सकते हैं।
दूसरी स्थिति तब होती है, जब केस से जुड़ा कोई पक्षकार जस्टिस से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करे। यह मामला गंभीर माना जाता है। हालांकि, किसी जस्टिस के केस से हटने का मतलब यह नहीं है कि उनसे संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश हुई है।
जस्टिस ने इस तरह खुद को किया अलग
इस दौरान जस्टिस अभ्यंकर ने लिखित आदेश दिया कि इस केस को ऐसी दूसरी बेंच में लगाया जाए, जिसमें वे शामिल न हों।
इसके बावजूद 30 सितंबर को यह केस फिर उन्हीं की बेंच में लगा। उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 5 अक्टूबर को एक बार फिर केस जस्टिस अभ्यंकर की बेंच में पहुंच गया।
इस पर जस्टिस अभ्यंकर ने दोबारा लिखित आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को ऐसी दूसरी बेंच में लगाया जाए, जिसमें वे सदस्य न हों। इस तरह जस्टिस अभ्यंकर ने दो बार लिखित आदेश देकर खुद को इस केस से अलग किया।
पिंटू भाटिया का परिवार जुड़ा है अग्रवाल डिस्टलरीज से
कौन हैं पिंटू भाटिया
इसके अलावा इंदौर के पंजाब एंड सिंध बैंक से जुड़ी फर्जी बैंक गारंटी के मामले में भी ईओडब्ल्यू (EOW) के पास शिकायत पहुंची थी और इसकी जांच हो चुकी है।
अग्रवाल डिस्टलरीज का केस क्या है
याचिका के मुताबिक, साल 2013 में कंपनी से हर महीने वैट रिटर्न लिया जाता था। इसके बाद 2016 में नियम आया कि जिन डीलर्स का तिमाही टैक्स सवा छह करोड़ रुपए है, उन्हें एडवांस टैक्स भरना होगा।
इसके बाद मई 2026 में कंपनी को नोटिस जारी किया गया। इसमें साल 2022-23 से 2025-26 तक के बकाया टैक्स और ब्याज के रूप में 62 लाख 46 हजार रुपए मांगे गए।
कंपनी ने इसी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उसका कहना है कि वह नियमित रूप से टैक्स जमा कर रही है। इसके बावजूद मनमाने तरीके से नोटिस जारी किया गया। कंपनी का यह भी दावा है कि नोटिस जारी करने से पहले उनसे एक बार भी जवाब नहीं मांगा गया।
क्यों किसी केस से हटते हैं जस्टिस
दूसरी स्थिति तब होती है, जब केस से जुड़ा कोई पक्षकार जस्टिस से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करे। यह मामला गंभीर माना जाता है। हालांकि, किसी जस्टिस के केस से हटने का मतलब यह नहीं है कि उनसे संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश हुई है।
लिव-इन में रहना है तो कराओ रजिस्ट्रेशन! पैतृक संपत्ति में भी बराबरी चाहती हैं महिलाएं
By Arun Tiwari
जयपुर जिला परिषद चुनाव: कांग्रेस ने 56 वार्डों में घोषित किए प्रत्याशी, मोहन डागर और यशवीर शूरा को टिकट
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान में आज बदलेगा मौसम, 6 जिलों में बारिश; तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट, तेज हवाओं के आसार
By Jyoti Mahender Bhardwaj

MP TET 2026: सरकार के फैसले भी बेअसर, डेढ़ लाख शिक्षकों ने नहीं भरा फॉर्म, विरोध अब भी जारी
By Arohi Raj
सीएम हाउस के नाम पर सर्किट हाउस में रुकता था सूर्यकांत, सौम्या करती थी हिसाब को ओके, कोल लेवी में दो रुपए रानू साहू का हिस्सा
By Arun Tiwari
राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 650 कारतूस के साथ पंजाब के 2 युवक पकड़े गए
By Jyoti Mahender Bhardwaj
बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप बैन मामले से मेटा ने झाड़ा पल्ला, कहा- अधिवक्ता और व्हाट्सएप के बीच का मामला
By Neel Tiwari