इंदौर में अब अंडरग्राउंड मेट्रो विवादों में, बिना मुआवजा इसे बताया अवैध, हाईकोर्ट में याचिका

Sanjay Gupta | Mar 14, 2026, 13:34 IST
indore-metro-high-court-petition
इंदौर में मेट्रो रूट को लेकर चल रहे मुद्दे के बीच नया विवाद आया है। इसे बिना भू स्वामी की मंजूरी के अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है।

Indore. इंदौर में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के निर्माण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक अहम याचिका दायर की गई है।



याचिका में आरोप लगाया गया है कि छोटे गणपति क्षेत्र में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के लिए लगभग 125 से 140 फीट गहराई तक खुदाई की योजना बनाई जा रही है।



यह खुदाई निजी जमीन और एक पब्लिक पार्क के नीचे की जाएगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि ये काम बिना जरूरी कागजी कार्यवाही (Paperwork) और पर्यावरणीय मंजूरी के किया जा रहा है।



याचिका में इन्हें बनाया गया पक्षकार

यह याचिका इंदौर के महेश राठी द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव धनोतकर हैं। याचिका में राज्य सरकार, मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंदौर नगर निगम, जिला कलेक्टर इंदौर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा भारत संघ को पक्षकार बनाया गया है।



निजी संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन

याचिका में बताया गया है कि प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन (indore metro news) निजी जमीन के नीचे बनेगा। साल 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक जमीन के साथ उसकी मिट्टी पर भी मालिक का हक होता है। इसलिए जमीन के नीचे खुदाई करने से पहले मालिकों से कानूनी मंजूरी लेना और मुआवजा देना जरूरी है।



याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना अधिग्रहण और पैसा दिए निर्माण करना संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है। यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A में दिए गए नियमों के बिल्कुल खिलाफ माना जा रहा है।



f49b5073-cff

पर्यावरण पर भी पड़ सकता है असर

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित निर्माण स्थल के ऊपर एक सार्वजनिक पार्क स्थित है, जहां लगभग 100 से 200 बड़े पेड़ मौजूद हैं। इतनी गहराई तक खुदाई करने से इन पेड़ों की जड़ों पर असर पड़ सकता है। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका है।



आरोप लगाया गया है कि परियोजना के लिए अब तक कोई स्पष्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) सार्वजनिक नहीं किया गया है। साथ ही पेड़ों की कटाई, भूजल स्तर पर प्रभाव और पर्यावरणीय अनुमति से संबंधित कोई पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आई है।



भूजल और इमारतों की सुरक्षा पर चिंता

याचिका में कहा गया है कि इतनी गहराई तक खुदाई से क्षेत्र की मिट्टी की स्थिरता, भूजल स्तर तथा आसपास की इमारतों की नींव पर भी असर पड़ सकता है। इससे आसपास के मकानों और व्यावसायिक इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा खतरे में पड़ने की संभावना जताई गई है।



रोक लगाने की मांग

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) से कहा है कि बिना सही तरीके से जमीन का अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और प्रभावित लोगों को सही मुआवजा दिए बिना इस प्रोजेक्ट के तहत खुदाई और निर्माण काम पर रोक लगाई जाए।



अब इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हो सकती है, जहां यह तय होगा कि अंडरग्राउंड मेट्रो के तहत जो निर्माण प्रस्तावित है, वह कानूनी और पर्यावरणीय मानकों के हिसाब से सही है या नहीं।



ये खबरें भी पढ़ें...



गोवा की काजू और राजस्थान की केसर कस्तूरी अब एमपी में मिलेगी, हमारी देसी महुआ जाएगी बाहर



भोपाल मेट्रो का नया प्लान, स्टेशन पर खुलेंगे कोचिंग सेंटर और शोरूम



इंदौर में एमजी रोड पर अंडरग्राउंड मेट्रो नहीं चाहते नगरीय प्रशासन मंत्री



MP News: एमपी में शराब होगी महंगी! नई आबकारी नीति तैयार, कैबिनेट से मिलेगी मंजूरी



Tags:
  • इंदौर नगर निगम
  • इंदौर
  • Indore
  • मध्य प्रदेश
  • Indore Metro
  • मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
  • हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ
  • मेट्रो स्टेशन
  • indore metro news
  • अंडरग्राउंड मेट्रो
  • मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड