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BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार एक अनोखे कदम के तहत पड़ोसी राज्यों के विशेष शराब ब्रांडों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव लाने जा रही है। साथ ही राज्य की अपनी महुआ आधारित शराब को अन्य राज्यों में बेचने के लिए एक नया रास्ता खोलने की योजना बना रही है।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि वह गोवा की काजू शराब से लेकर राजस्थान की केसर कस्तूरी शराब तक, अन्य राज्यों के पारंपरिक शराब ब्रांडों को मार्केट में लाकर न सिर्फ उनका प्रचार करे, बल्कि अपनी महुआ आधारित शराब को भी इन राज्यों में लोकप्रिय बनाने का मौका मिले।
पड़ोसी राज्यों की पारंपरिक शराब को मिलेगा बढ़ावा
मध्य प्रदेश की आबकारी नीति 2026-27 के तहत सरकार ने एक नया प्रावधान किया है। यदि अन्य राज्य अपनी पारंपरिक शराबों को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश की महुआ शराब को अपने राज्य में व्यापार करने की अनुमति देते हैं, तो मध्य प्रदेश इन राज्यों के शराब ब्रांड्स को टैक्स राहत और ड्यूटी कट्स देने के लिए तैयार है।
यदि यह बाजार रणनीति अन्य राज्यों से सहमति प्राप्त करती है, तो अन्य राज्यों कि मशहूर शराब ब्रांड मध्य प्रदेश की शराब दुकानों में दिखाई देंगे। इसमें गोवा की फेनी, हिमाचल प्रदेश की लुगड़ी और चुल्ली, पंजाब-हरियाणा का ठर्रा, सिक्किम और लद्दाख का चांग और तोंगबा, और केरल की ताड़ी जैसे शराब शामिल है।
महुआ शराब को मिलेगा नया मंच
इसके साथ ही, राज्य अपनी महुआ आधारित शराब को दूसरे राज्यों में बेचने के लिए भी जमकर प्रचार करेगा। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि यदि कोई राज्य अपनी विशिष्ट शराब को प्रचारित करने के लिए टैक्स छूट या ड्यूटी में राहत देता है, तो उसे मध्य प्रदेश में भी वही राहत दी जाएगी।
हालांकि, मध्य प्रदेश की शराब नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छूट केवल विशिष्ट मामलों में दी जाएगी। साथ ही, सभी स्थानीय ब्रांड्स के लिए यह आम छूट नहीं होगी। राज्य सरकार प्रत्येक मामले पर विचार करके ही छूट देने का निर्णय लेगी।
महुआ शराब के लिए दूसरा मौका
यह कदम राज्य की महुआ आधारित शराब हेरिटेज लिकर (मोंड) के लिए एक नई शुरुआत हो सकती है। इसे तीन साल पहले लॉन्च किया गया था। हालांकि, उपभोक्ताओं से कम प्रतिक्रिया और मार्केट में कम पहचान के कारण यह ब्रांड अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर सका। इसको बढ़ावा देने के लिए अब एक नया मौका दिया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की योजना बना रही है। कुछ पड़ोसी राज्यों ने पहले ही इस तरह की रणनीति अपनाई है। वहीं, अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है।
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