NEYU के 5 छात्र नेताओं को 50-50 हजार के बाउंड ओवर पर छोड़ा, आंदोलन के लिए हाईकोर्ट में याचिका

Sanjay Gupta | Jan 16, 2026, 11:43 IST
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मध्यप्रदेश में नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के 5 छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। इन नेताओं ने पीएससी की विभिन्न मांगों को लेकर न्याय यात्रा 2.0 का आयोजन करने का एलान किया था। वहीं, अब आंदोलन की मंजूरी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

News In Short

  • NEYU ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के खिलाफ न्याय यात्रा 2.0 का आह्वान किया।
  • 15 जनवरी को पुलिस ने पांच छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया, बाद में रिहा किया।
  • छात्र नेताओं को 50-50 हजार के बाउंड ओवर पर एसीपी कोर्ट से छोड़ा गया।
  • राधे जाट ने आरोप लगाया, पुलिस ने आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया।
  • न्याय यात्रा की मंजूरी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

News In Detail

INDORE. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) से विभिन्न मांगों को लेकर न्याय यात्रा 2.0 निकालने का आह्वान किया गया था। इसका आह्वान छात्र संगठन नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) ने किया था।



वहीं, यात्रा निकलने से पहले ही 15 जनवरी को सुबह आंदोलनकारी राधे जाट और चार अन्य नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद आंदोलनकारी युवा शाम को भंवरकुआं थाने के बाहर जमा हुए और रिहाई की मांग की। आखिरकार देर रात सभी को 50-50 हजार के बाउंड ओवर पर एसीपी कोर्ट से छोड़ दिया गया।



इन सभी को किया था गिरफ्तार

कुल 14 छात्र नेताओं को पुलिस ने पकड़ा था। इनमें से पांच की गिरफ्तारी ली गई और बाकी को शाम होते-होते थाने से छोड़ दिया गया था। गिरफ्तार छात्र नेताओं में राधे जाट, आदित्य शर्मा, रवि पटेल, प्रतीक तिवारी और यश घावरी शामिल थे। इन पर प्रतिबंधात्मक धारा 126, 135(3) और 170 के तहत कार्रवाई की गई।



राधे जाट ने बताया ऐसा हुआ

राधे जाट ने द सूत्र को बताया कि उनकी पुलिस के जरिए दो दिन से रेकी की जा रही थी। इसके बाद उन्हें आंदोलन वाले दिन 15 जनवरी को सुबह आयोजन स्थल पर जाने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। साथ ही, अलग अन्नपूर्णा थाने पर रखा।





फिर रात को एसीपी ऑफिस में पेश किया गया और वहां पता चला कि चार अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। सभी को 50-50 हजार के बाउंडओवर पर रिहा किया गया। इसके बाद मेडिकल कराकर रात को छोड़ा गया। राधे जाट ने कहा कि हम इनसे डरने वाले नहीं हैं। आंदोलन जारी रहेगा।



जाट ने आरोप लगाए कि पुलिस ने आंदोलन को दबाने के लिए पूरा बल प्रयोग किया। कोचिंग वालों को धमकाया गया और सभी जगह सख्त पहरा करते हुए छात्रों को जमा होने से रोका गया।



हाईकोर्ट में दायर की याचिका

वहीं जाट और रणजीत किसानवंशी ने बताया कि आंदोलन की मंजूरी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। शांतिपूर्वक अपनी बात रखने के लिए रोक नहीं लगाई जा सकती है। हमने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय यात्रा के लिए मंजूरी मांगी है।



यह हैं प्रमुख मांगे

  • 2026 की राज्य सेवा परीक्षा में पदों की संख्या कम से कम 700 की जाए। अभी 155 पद आए हैं।
  • राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद हो, पिछले तीन साल से यूआर, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस के लिए कोई पद नहीं हैं।
  • राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा में भी कम से कम 400 पद हो।
  • एडीपीओ भर्ती 2026 में 300 पदों के साथ सूचना जारी की जाए और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी शामिल होने की छूट हो।
  • असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नेट/सेट पास अंतिम वर्ष के छात्रों को भी बैठने दिया जाए।
  • पीएससी में 100 फीसदी पर रिजल्ट जारी किया जाए।
  • साथ ही 87 फीसदी मूल रिजल्ट के उम्मीदवारों की कॉपियां दिखाई जाएं।
  • अतिथि संविदा प्रथा को खत्म किया जाए और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में इसे खत्म कर फिर से 20 बोनस अंक व्यवस्था हो।
  • इंटरव्यू सिस्टम में सुधार हो और यह अधिकतम 100 अंक का हो, आयोग में रिक्त पद भरे जाएं।
  • समयबद्ध तरीके से आयोग की परीक्षाओं का कैलेंडर बनाकर संचालन सुनिश्चित किया जाए, जैसे कि यूपीएससी में होता है।

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