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News In Short
यह न्याय यात्रा MPPSC और मप्र शासन से भर्ती संबंधी विभिन्न मांगों को लेकर है।
यात्रा 15 जनवरी को डीडी गार्डन, भंवरकुआं से MPPSC कार्यालय तक जाएगी।
मुख्य मुद्दा भर्ती में लगातार कम पदों की संख्या और 100 प्रतिशत रिजल्ट न देना है।
आह्वान नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन NEYU ने ही किया है।
पुलिस ने मंजूरी आवेदन लेने से इंकार कर दिया; अभी मंजूरी नहीं मिली।
News In Detail
इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाओं को लेकर NEYU ने न्याय यात्रा 2.0 का आह्वान किया है। इसके लिए 9 मांगों का ज्ञापन तैयार किया गया है।
NEYU के राधे जाट ने बताया कि यह यात्रा 15 जनवरी को डीडी गार्डन, भंवरकुआं से MPPSC कार्यालय तक होगी। हम शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा निकालकर अपनी मांगों की ओर आयोग और शासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
पुलिस ने मंजूरी आवेदन लेने से इनकार कर दिया। हमने आवेदन डाक द्वारा भेज दिया है। हम केवल शांतिपूर्ण ज्ञापन देना चाहते हैं, लेकिन हमें रोका जा रहा है।
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MPPSC महाआंदोलन- प्रमुख मांगें
साल 2026 की राज्य सेवा परीक्षा में पदों की संख्या कम से कम 700 की जाए। अभी 155 पद आए हैं।
राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद, पिछले तीन वर्षों से UR, OBC, EWS के लिए कोई पद नहीं।
राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा में भी कम से कम 400 पद हो।
ADPO भर्ती 2026 में 300 पदों की अधिसूचना जारी हो और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी शामिल होने की छूट मिले।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नेट/सेट पास अंतिम वर्ष के छात्रों को भी बैठने दिया जाए।
पीएससी में 100 फीसदी पर रिजल्ट जारी किया जाए।
87 प्रतिशत मूल रिजल्ट वाले उम्मीदवारों की आंसर कॉपियां दिखाई जाएं।
अतिथि संविदा प्रथा को खत्म किया जाए और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में इसे खत्म कर फिर से 20 बोनस अंक व्यवस्था हो।
इंटरव्यू सिस्टम में सुधार, अधिकतम 100 अंकों का हो, आयोग के रिक्त पद भरे जाएं।
समयबद्ध तरीके से आयोग की परीक्षाओं का कैलेंडर बनाकर संचालन सुनिश्चित किया जाए जैसे कि यूपीएससी में होता है।
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पुलिस की सख्ती: महाआंदोलन के बाद बदला रुख
दिसंबर 2024 के महाआंदोलन के बाद पुलिस ने MPPSC से जुड़े आंदोलनों पर सख्ती बढ़ा दी है। पहले जो आंदोलन सिर्फ ज्ञापन तक सीमित रहते थे, वे अब चार दिनों तक चलने लगे और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए।
इस पर मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब पुलिस ने किसी भी एमपीपीएससी आंदोलन को मंजूरी न देने की नीति अपनाई है। आंदोलनकारियों के खिलाफ बाउंडओवर से लेकर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में आंदोलन की स्थिति अब असमंजस में है।
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