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News In Short
- पीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2025 की में हाईकोर्ट की मंजूरी के लिए होल्ड है।
- इस परीक्षा में कुल 158 पद है।
- मेंस पहले 9 जून 2025 से होना थी लेकिन याचिका से रूक गई।
- सुनवाई की नई संभावित तारीख 10 फरवरी 2026 तय की गई है।
- हाईकोर्ट ने मेंस का शेड्यूल मांगा है, लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ है।
News In Detail
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा 2025 लंबी अटकी हुई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में परीक्षा नियम 2015 को चुनौती देते हुए याचिका लगी हुई है। हाईकोर्ट से मेंस पर रोक है।
इसके चलते जून 2025 से यह परीक्षा रूकी हुई है। 09 जनवरी को संभावित तारीख थी लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ। अब जो नई तारीख आई वह भी निराशाजनक है। इसके बाद भी तय नहीं है कि यह सुनवाई उसी दिन होगी भी या नहीं।
कोर्ट में उलझी राज्य सेवा
राज्य सेवा परीक्षा 2025 में कुल 158 पद है। इसकी प्री होने के बाद आयोग ने रिजल्ट जारी किया और मेंस 9 जून से प्रस्तावित की। इसी दौरान परीक्षा नियम 2015 को लेकर याचिका दायर हुई।
इसमें दो अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने मेंस बिना हाईकोर्ट मंजूरी से कराने पर रोक लगा दी। इसके बाद अगली सुनवाई में आयोग ने प्री का डिटेल रिजल्ट जारी किया और हर कैटेगरी में मेंस में क्वालीफाई के लिए कटऑफ बताया।
अधर में लटका मेंस शेड्यूल
साथ ही बताया कि अनारक्षित में किस कैटेगरी के कितने उम्मीदवार मेरिट के आधार पर चयनित हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में सुनवाई करते हुए आयोग से मेंस का शेड्यूल मांगा। यह आयोग को अगस्त 2025 की सुनवाई में देना था, लेकिन इसके बाद से ही यह लिस्ट नहीं हुआ है।
इसके चलते मेंस कराने की मंजूरी ही नहीं मिली। इसके लिए इस नए साल में राहत की उम्मीद थी। पहले इसमें कम्प्यूटर जनरेटेड नई तारीख 09 जनवरी लगी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
अब सोमवार 12 जनवरी को जो नई तारीख कम्प्यूटर जनरेटेड आई है, वह एक माह बाद 10 फरवरी की लगी है। यह उम्मीदवारों के लिए भारी निराशाजनक है। वहीं केस उस दिन भी लिस्ट होगा या नहीं यह भी एक दिन पहले ही क्लियर होगा। अभी यह तारीख भी तय नहीं माना जा सकती है।
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13 नवंबर को भी मांगी थी मंजूरी
इस मामले में बीच-बीच में आयोग के अधिवक्ता ने केस लिस्ट होने लेकिन सुनवाई पर नहीं आने के दौरान बीच में अपील भी की कि मेंस शेड्यूल ओके किया जाए। लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके पहले 13 नवंबर 2025 को आयोग अधिवक्ता ने केस लिस्ट के दौरान कहा कि- मी लार्ड यह केस नंबर 9253 यह इस सप्ताह के लिए लगा हुआ है।
इसकी सुनवाई हो जाए। बेंच ने कहा कि इसमें क्या अर्जेंसी है। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि सर 2025 मेंस रुकी हुई है। मी लार्ड एक साल पीछे हो गए हैं, इस मेंस के नहीं होने से। इस दौरान बस इतनी ही बात हुई और बेंच में केस लिस्ट नहीं हो सका। इसके बाद इस केस की संभावित तारीख विंटर वेकेशन के बाद 9 जनवरी बताई गई लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ।
क्या है परीक्षा नियम 2015 का मुद्दा
यह नियम केंद्र सरकार से भी नोटिफाइ है और मध्य प्रदेश में भी साल 2000 से लागू है। इसके तहत नियम है कि यदि किसी आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवार ने आरक्षण में किसी तरह का फायदा लिया है चाहे वह कटआफ अंक का हो या उम्र का। तो फिर उसके अधिक अंक आने पर भी उसी आरक्षित कैटेगरी में रखा जाएगा और अनारक्षित यानी यूआर कैटेगरी की सीट नहीं दी जाएगी। इस नियम को लेकर कई याचिकाएं लगी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने भी इस केस को मान्य किया है।
चर्चित यूपीएससी टॉपर टीना डाबी का भी केस इसमें है, जो टापर थी लेकिन प्री में कटआफ अंक का लाभ लेने के चलते उन्हें आरक्षित कैटेगरी में ही रखा गया और अनारक्षित सीट नहीं दी गई थी। इसी नियम को चुनौती देते हुए याचिकाएं लगी है, जिस पर सुनवाई हो रही है।
Sootr Knowledge
भर्ती परीक्षाओं के नियमों में बदलाव अक्सर कानूनी पेच पैदा करते हैं। अभ्यर्थी केवल आधिकारिक वेबसाइट mppsc.mp.gov.in के अपडेट पर ही भरोसा करें।
तथ्य: परीक्षा नियम 2015 को सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई मामलों में सही ठहरा चुका है।
आगे क्या
हाईकोर्ट में आयोग का आवेदन लगा हुआ है। इसमें आयोग का तर्क है कि मेंस शेड्यूल ओके कर दिया जाए। इससे मेंस आयोजित करा ली जाए। बाकी सुनवाई आगे भले ही जारी रहे। तब तक मेंस होकर फिर इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया को कराया जा सकेगा।
हाईकोर्ट के ओके करते ही आयोग इस मेंस को 35-40 दिन में कराने की तैयारी करके रखा हुआ है, लेकिन पहले कोर्ट की ओके जरूरी है। आयोग ने अपने परीक्षा कैलेंडर में भी लिखा हुआ है कि हाईकोर्ट से मंजूरी मिलते ही इसे शेड्यूल किया जाएगा।
निष्कर्ष
MPPSC 2025 की मुख्य परीक्षा अब पूरी तरह कोर्ट के फैसले पर निर्भर है। नियम 2015 की व्याख्या और कोर्ट की मंजूरी ही 158 पदों के भविष्य का फैसला करेगी।
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