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News In Short
पीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2025 की में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मंजूरी के लिए होल्ड है।
इस परीक्षा में कुल 158 पद हैं।
मेंस पहले 9 जून 2025 से होनी थी, लेकिन याचिका से रुक गई।
हाईकोर्ट ने मेंस का शेड्यूल मांगा है, लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ है।
News In Detail
INDORE. MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2025 में कुल 158 पद हैं। इसकी प्री परीक्षा के बाद आयोग ने रिजल्ट जारी किया और मेंस 9 जून से प्रस्तावित की थी। वहीं, इसी दौरान परीक्षा नियम 2015 को लेकर याचिका दायर की गई थी।
इसमें 2 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने मेंस परीक्षा बिना हाईकोर्ट की मंजूरी से कराने पर रोक लगा दी। इसके बाद अगली सुनवाई में आयोग ने प्री परीक्षा का डिटेल रिजल्ट जारी किया। हर श्रेणी में मेंस में क्वालीफाई करने के लिए कटऑफ अंक बताए।
साथ ही यह बताया कि अनारक्षित श्रेणी में किस कैटेगरी के कितने उम्मीदवार मेरिट के आधार पर चयनित हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में सुनवाई करते हुए आयोग से मेंस का शेड्यूल मांगा।
यह आयोग को अगस्त 2025 की सुनवाई में देना था, लेकिन इसके बाद से ही यह लिस्ट नहीं हुआ है। इसके चलते मेंस परीक्षा कराने की मंजूरी नहीं मिल सकी।
13 नवंबर को भी मांगी थी मंजूरी
इस मामले में बीच-बीच में आयोग के अधिवक्ता ने केस लिस्ट होने की बात की। इसके बावजूद, सुनवाई पर नहीं आ पाने के दौरान अपील भी की कि मेंस शेड्यूल को मंजूरी दी जाए। वहीं, सुनवाई नहीं हो सकी।
इससे पहले 13 नवंबर 2025 को आयोग के अधिवक्ता ने केस लिस्ट के दौरान कहा था कि मी लार्ड, यह केस नंबर 9253 इस सप्ताह के लिए लगा हुआ है, इसकी सुनवाई हो जाए।
बेंच ने कहा, इसमें क्या अर्जेंसी है? इस पर अधिवक्ता ने कहा कि सर, 2025 मेंस रुकी हुई है। हम एक साल पीछे हो गए हैं, इस मेंस के नहीं होने से।
इस दौरान बस इतनी ही बात हुई और बेंच में केस लिस्ट नहीं हो सका। इसके बाद इस केस की संभावित तारीख विंटर वेकेशन के बाद 9 जनवरी बताई गई, लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ।
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Sootr Knowledge
क्या है परीक्षा नियम 2015 का मुद्दा?
यह नियम केंद्र सरकार से भी नोटिफाई है और मप्र में भी साल 2000 से लागू है। इसके तहत यह नियम है कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरक्षण में किसी तरह का फायदा लिया है, चाहे वह कटऑफ अंक का हो, उम्र का हो या अन्य कोई, तो फिर उसके अधिक अंक आने पर भी उसे उसी आरक्षित श्रेणी में रखा जाएगा। साथ ही, अनारक्षित यानी यूआर श्रेणी की सीट नहीं दी जाएगी।
इस नियम को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने भी इस केस को मान्यता दी है। चर्चित यूपीएससी टॉपर टीना डाबी का भी केस इसमें शामिल है, जो टॉपर थीं, लेकिन प्री परीक्षा में कटऑफ अंक का लाभ लेने के कारण उन्हें आरक्षित श्रेणी में ही रखा गया और अनारक्षित सीट नहीं दी गई थी। इसी नियम को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर सुनवाई जारी है।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट में आयोग का आवेदन लगा हुआ है। इसमें आयोग का तर्क है कि मेंस शेड्यूल को मंजूरी दी जाए, ताकि मेंस परीक्षा आयोजित करवाई जा सके।
बाकी सुनवाई आगे भले ही जारी रहे, तब तक मेंस परीक्षा हो सकेगी और फिर इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया भी कराई जा सकेगी।
हाईकोर्ट के मंजूरी देने के बाद ही आयोग ने 35-40 दिन में मेंस परीक्षा कराने की तैयारी की हुई है, लेकिन पहले कोर्ट की मंजूरी जरूरी है।
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