MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2025 मेंस पर नया ऐलान, अब इस तारीख को होगी यह परीक्षा

MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2025 की मुख्य परीक्षा (Main Exam) अब कोर्ट के चक्कर में फंस गई है। 158 पदों की यह भर्ती अब साल 2025 में नहीं होगी। यह विलंब उम्मीदवारों को निराश कर रहा है।

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Sanjay Gupta
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Photograph: (the sootr)

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INDORE. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा परीक्षा को लेकर दो याचिकाएं (9253 और 11444/2025) लगाई गई हैं। इन याचिकाओं ने परीक्षा को पूरी तरह से ट्रैक से उतार दिया है।
इसके लिए जबलपुर हाईकोर्ट केस लिस्ट ने नई तारीख जनरेट की है, जो उम्मीदवारों के लिए निराश करने वाली है। नई तारीख 9 जनवरी दी गई है। यह कम्प्यूटर जनरेटेड नई संभावित तारीख है।
यानी जो मेंस 9 जून से अटकी हुई है वह अब साल 2025 में नहीं होना है। इस परीक्षा में 158 पद है। 

21 जुलाई के आदेश से बंधी थी आस

परीक्षा नियम 2015 को लेकर यह याचिकाएं लगी है। याचिकाओं के बाद 9 जून से होने वाली मेंस को होल्ड कर दिया गया। उम्मीदवारों को तब 21 जुलाई को आस बंधी, जब चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
उन्होंने आयोग को निर्देश दिए कि वह दो सप्ताह में मेंस का शेड्यूल पेश करें। इसे हम ओके करेंगे, मेंस पर कोई रोक नहीं है। अगली तारीख 5 अगस्त लगी। लेकिन इसके बाद से यह केस कभी सुनवाई पर नहीं आ सका। इसके चलते मेंस के शेड्यूल को कभी मंजूरी ही नहीं मिली। 
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अंतिम सुनवाई 21 जुलाई को यह हुआ था

21 जुलाई को परीक्षा नियम 2015 पर अंतिम सुनवाई हुई थी। शासन ने बताया कि उनके पास सुप्रीम कोर्ट के दो आदेश हैं। उन्होंने कहा कि जवाब बन चुका है और इसे कोर्ट में पेश कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने जवाब पेश करने के लिए केवल दो दिन का समय दिया। इसके बाद शासन और आयोग ने मेन्स 2025 पर लगा स्टे हटाने की मांग की। 

इस पर हाई कोर्ट ने पूछा कि मेन्स पर स्टे कहां लगा हुआ है। दो अप्रैल 2025 को प्रोसेस तब रोकी गई थी, जब आयोग ने प्री का डिटेल रिजल्ट कैटेगरी अनुसार पेश नहीं किया था। मगर 15 अप्रैल को रिजल्ट तो पेश कर दिया गया था। फिर स्टे हटाने की जरूरत कहां से आ गई, कोर्ट ने पूछा। शासन ने जवाब दिया कि दो अप्रैल के आदेश में एक शर्त थी। अगली प्रक्रिया कोर्ट की मंजूरी के बिना नहीं होगी, यह लिखा था। इसलिए कोर्ट की मंजूरी चाहिए ताकि मेन्स हो सके।

यह परीक्षा 09 जून को होनी थी, जो तभी से टाल दी गई थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि मेन्स का शेड्यूल बनाकर पेश कीजिए। साथ ही इसके लिए एक आवेदन भी लगा दीजिए, हम विचार करेंगे। शेड्यूल और मंजूरी के आवेदन पर कहा, इसे मेंशन करवाइए।

इसके पहले कब-कब मिली तारीख-

तारीखघटना
21 जुलाई 2025प्रारंभिक सुनवाई और शेड्यूल पेश करने के निर्देश
5 अगस्त 2025नई तारीख के लिए प्रस्ताव
27 सितंबर 2025शेड्यूल पेश किया गया
9 अक्टूबर 2025अगला शेड्यूल प्रस्तुत किया गया
10 नवंबर 2025फिर से एक नई तारीख प्रस्तावित
9 जनवरी 2026नई परीक्षा की तारीख तय की गई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश, उसी पर लगी याचिका

यह याचिका मुख्य रूप से परीक्षा नियम 2015 के खिलाफ है। इस नियम में आरक्षित वर्ग को कुछ छूट लेने की अनुमति है (जैसे उम्र, प्री कटऑफ)। छूट लेने पर मेन्स में अधिक अंक लाने पर भी वे आरक्षित में ही रहेंगे। उन्हें अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट नहीं किया जाएगा, यह नियम कहता है। 

इस नियम का सबसे चर्चित उदाहरण टीना डाबी का केस है। वह यूपीएससी टॉपर थीं, पर प्री में छूट लेने से अनारक्षित में नहीं गईं। सुप्रीम कोर्ट ने दो माह पहले भी त्रिपुरा राज्य पर ऐसा ही फैसला दिया। यह बार-बार स्थापित हो चुका है कि यह नियम पूरी तरह सही है। इस नियम को केंद्र सरकार ने भी मंजूरी दी है और यह साल 2000 से लागू है.

इसी को लेकर यह लगी याचिका

शासन ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य आपत्तियां थीं। पहली, प्री के रिजल्ट में मेधावी (Meritorious) का चयन ठीक से नहीं हुआ। दूसरी, उन्हें मेरिट के क्रम में अनारक्षित में शिफ्ट नहीं किया गया है। हमने 15 अप्रैल को विस्तृत जवाब देकर बताया कि यह बात सही नहीं है। आयोग ने उच्च मेरिट वालों को आरक्षित से अनारक्षित वर्ग में रखा है। इस तरह के कुल 690 उम्मीदवार हैं, इसलिए आरोप गलत है।

MPPSC ने हाई कोर्ट को प्री 2025 का कैटेगरी वाइज कटऑफ भी बताया। अनारक्षित (Unreserved) वर्ग में कुल 1140 उम्मीदवार चुने गए हैं। इनमें मेरिट के आधार पर एससी के 42 और एसटी के 5 उम्मीदवार हैं। साथ ही ओबीसी के 381 और ईडब्ल्यूएस के 262 उम्मीदवार भी शामिल हैं। यानी अनारक्षित के 1140 में से 690 आरक्षित वर्गों के हैं। इस प्रकार, जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार केवल 450 ही हैं। 

यह है परीक्षा नियम 2015 का विवाद-

यह नियम कोई नया नहीं, बल्कि साल 2000 से लगातार चला आ रहा है। इसमें है कि आरक्षित वर्ग ने प्री अंक या आयु सीमा में छूट ली है, तो उन्हें अंतिम रिजल्ट में भी उसी कैटेगरी में ही रखा जाएगा। उन्हें अनारक्षित वर्ग में शिफ्ट करना सही नहीं माना जाएगा। इसी नियम को याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। 

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेरिट से अनारक्षित में शिफ्ट करना चाहिए। मप्र राज्य सेवा परीक्षा नियम 2015 नवम्बर 2000 में दिग्विजय सिंह के समय बना था। आरक्षित वर्ग को उम्र या कटऑफ जैसी कई तरह की छूट दी जाती है। यदि कोई उम्मीदवार ऐसी छूट लेता है तो वह अनारक्षित में नहीं जाएगा। उन्हें मेरिट के अंकों पर भी अपनी ही कैटेगरी में रहना होगा। इसी नियम के आधार पर भर्ती प्रक्रिया हमेशा चलती आ रही है।

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टीन डाबी सहित कई अन्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है मुहर

टीना डाबी ने यूपीएससी 2015 परीक्षा में टॉप किया था। पर उन्हें अनारक्षित की जगह एससी कैटेगरी की सीट ही मिली थी। प्री 2015 में अनारक्षित कटऑफ 107 और एससी का 94 था। टीना डाबी को प्री में 96.66% अंक मिले, जो एससी छूट से पास हुआ। उन्होंने मेन्स में 1063/2025 अंक हासिल कर टॉपर बनीं। 

मगर प्री में कटऑफ छूट के कारण अनारक्षित में शिफ्ट नहीं हुईं। इसलिए उन्हें अपना होम टाउन भी नहीं मिला, वे राजस्थान कैडर की आईएएस बनीं। ऐसा ही एक केस दीपी विरुद्ध भारत सरकार का भी है। उन्होंने भी ओबीसी से अनारक्षित में जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, छूट ली है तो अनारक्षित में नहीं जा सकतीं।

-जितेंद्र सिंह विरुद्ध भारत सरकार केस में भी यही बात उठी। साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में भी यही कहा कि यदि आरक्षित वर्ग की कोई छूट ली तो फिर अनारक्षित में शिफ्ट नहीं कर सकते हैं।

डीओपीटी ने भी बना रखा है नियम-

- केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) का भी यही नियम है। एसटी, एससी, ओबीसी उम्मीदवार छूट लेने पर अनारक्षित में शिफ्ट नहीं होंगे। अगर आरक्षित वर्ग ने परीक्षा में कोई छूट ली है, तो वे उसी वर्ग में रहेंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र के इसी नियम को अपनाया है।
- अनारक्षित कैटेगरी में परीक्षा देने के अवसर कम होते हैं। जबकि आरक्षित कैटेगरी में कई बार परीक्षा दे सकते हैं। प्री कटऑफ अंक, उम्र सीमा और योग्यता में भी छूट मिलती है। सुप्रीम कोर्ट कहता है, जब कोई छूट ली तो उसी कैटेगरी में रहेंगे। आपने मेन्स और इंटरव्यू भी उसी कैटेगरी में रहकर दिया। और अंत में सफलता भी उसी कैटेगरी से ही पाई है।
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