MPPSC महाआंदोलन न्याय यात्रा 2.0 की तैयारी, मांगे फिर वही अधिक पद, 100 फीसदी रिजल्ट

MPPSC की परीक्षाओं को लेकर उम्मीदवार दिसंबर 2024 में महाआंदोलन कर चुके हैं। इसमें परीक्षाओं में कम पद, 87 फीसदी रिजल्ट और अन्य कई मांगों को उठाया गया था। वहीं, अब फिर महाआंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इसे न्याय यात्रा 2.0 का नाम दिया गया है।

author-image
Sanjay Gupta
New Update
mppsc nyay yatra petition 2026
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short 

  • यह न्याय यात्रा पीएससी (MPPSC) और मप्र शासन से भर्ती संबंधी विभिन्न मांगों को लेकर है

  • यात्रा 15 जनवरी को डीडी गार्डन भंवरकुआं से पीएससी कार्यालय तक जाएगी

  • यात्रा में मुख्य मुद्दा भर्ती में लगातार कम पदों का आना और 100 फीसदी रिजल्ट न देना है

  • इस आंदोलन के लिए एक बार फिर एनईवाययू ने आह्वान किया है

  • साल 2024 में हुए आंदोलन में आश्वासन के बाद भी कोई हल नहीं हुआ

News In Detail 

INDORE. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को लेकर एनईवाययू ने न्याय यात्रा 2.0 का आह्वान किया गया है। इसके लिए कुल नौ मांगों का ज्ञापन तैयार किया गया है।

एनईवाययू के राधे जाट ने बताया कि यह यात्रा 15 जनवरी को डीडी गार्डन भंवरकुआं से पीएससी कार्यालय तक जाएगी। हम शांति से यात्रा निकालकर केवल अपनी मांगों की ओर आयोग और शासन का ध्यान दिलाना चाहते हैं। लाखों उम्मीदवार सालों से परेशान हो रहे हैं।

यह हैं प्रमुख मांगे:

  • 2026 की राज्य सेवा परीक्षा में पदों की संख्या कम से कम 700 की जाए। अभी 155 पद आए हैं।

  • राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद हो, पिछले तीन साल से यूआर, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस के लिए कोई पद नहीं हैं।

  • राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा में भी कम से कम 400 पद हो।

  • एडीपीओ भर्ती 2026 में 300 पदों के साथ सूचना जारी की जाए और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी शामिल होने की छूट हो।

  • असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नेट/सेट पास अंतिम वर्ष के छात्रों को भी बैठने दिया जाए।

  • पीएससी में 100 फीसदी पर रिजल्ट जारी किया जाए।

  • साथ ही 87 फीसदी मूल रिजल्ट के उम्मीदवारों की कॉपियां दिखाई जाएं।

  • अतिथि संविदा प्रथा को खत्म किया जाए और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में इसे खत्म कर फिर से 20 बोनस अंक व्यवस्था हो।

  • इंटरव्यू सिस्टम में सुधार हो और यह अधिकतम 100 अंक का हो, आयोग में रिक्त पद भरे जाएं।

  • समयबद्ध तरीके से आयोग की परीक्षाओं का कैलेंडर बनाकर संचालन सुनिश्चित किया जाए, जैसे कि यूपीएससी में होता है।

क्या आयोग के बस में है ये मांगें?

इन मांगों में से अधिकांश मप्र शासन की नीतिगत व्यवस्थाओं से जुड़ी हैं, जो आयोग के लिए संभव नहीं हैं। कम पदों का आना भी आयोग के बस में नहीं है। यह मध्यप्रदेश सरकार और उनके विभाग ही डिमांड भेजते हैं। इसमें आयोग की कोई भूमिका नहीं होती।

इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण केस के चलते 100 फीसदी रिजल्ट नहीं दिया जा रहा है। यह भी जीएडी के सितंबर 2022 के आदेश के तहत ही आयोग द्वारा किया जा रहा है।

इसी तरह 87 फीसदी रिजल्ट के उम्मीदवारों की मेंस की कॉपियां दिखाने पर पहले भी मांग थी। वहीं, इसे दिखाकर आयोग ओबीसी आरक्षण केस के चलते अभी किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता है। ऐसे में यह भी संभव नहीं है।

असिस्टेंट प्रोफेसर में संविदा, गेस्ट को आरक्षण भी शासन का फैसला है।

इंटरव्यू व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इसके अंक कुल अंक का 12 फीसदी तक हो सकते हैं, जो दायरे के अधीन ही है।

आयोग में रिक्त पदों पर भर्ती, यह खुद पीएससी ही मप्र शासन से मांग कर रहा है।

रही बात परीक्षा कैलेंडर के समय पर होने की तो इसके लिए फिलहाल तो आयोग से ज्यादा जिम्मेदार उम्मीदवार खुद ही हैं, जो बेवजह की याचिकाएं लगाकर परीक्षाओं को अटका रहे हैं। जैसे कि राज्य सेवा परीक्षा मेंस 2025 बेवजह के केस के चलते जून 2025 से होल्ड है।

ये खबर भी पढ़िए...

MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2025 मेंस केस लिस्ट होने का इंतजार, जून से परीक्षा होल्ड

MPPSC का 87-13% फार्मूले पर याचिका, हुई बहस, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

MPPSC ने राज्य सेवा परीक्षा 2026 में प्री के अंक बढ़ाए, एक तिहाई नेगेटिव मार्किंग की सूचना जारी

MPPSC राज्य सेवा परीक्षा में भी ला रही नेगेटिव मार्किंग, अब सभी परीक्षाओं में होगा

MPPSC मध्यप्रदेश सरकार लोक सेवा आयोग मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य सेवा परीक्षा ओबीसी आरक्षण असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती राज्य वन सेवा परीक्षा 2026
Advertisment