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News In Short
- पीएससी के बाद ईएसबी में मध्य प्रदेश शासन ने यह फार्मूला लागू किया।
- इस फार्मूले के तहत 13 फीसदी पद ओबीसी और अनारक्षित दोनों के लिए रखे गए।
- इसका रिजल्ट ओबीसी आरक्षण पर अंतिम फैसला होने के बाद जारी होगा।
- साल 2022 से इसके रिजल्ट होल्ड है।
- इससे एक लाख से ज्यादा उम्मीदवार परेशान है।
News In Detail
मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने को लेकर कानूनी विवाद के बाद राज्य सरकार ने सितंबर 2022 में 87-13% का नया फार्मूला लागू किया था।
तभी से प्रोवीजनल कैटेगरी 13 फीसदी में सभी रिजल्ट रोके हुए हैं। इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका पर फिर से सुनवाई हुई, जिसमें बेंच ने सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
हाईकोर्ट में इस आधार पर लगा केस
जबलपुर हाईकोर्ट में एडीपीओ (सहायक जिला लोक अभियोजक) परीक्षा 2024 के रिजल्ट को लेकर कुछ उम्मीदवारों द्वारा यह याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता शिवम गौतम के जरिए यह याचिका लगी है।
इसमें कहा गया है कि 87-13 फीसदी का फार्मूला सुप्रीम कोर्ट के मेरिट के आधार पर नियुक्ति के फैसले के विपरीत है। इसके तहत आयोग ने 13 फीसदी कैटेगरी वालों को 87 में और 87 वाले मेरिट उम्मीदवार को 13 फीसदी में आरक्षित पोस्ट को लेने से रोक दिया है।
हालांकि ओवरआल मेरिट के आधार पर 13 फीसदी के पद होल्ड होना थे और मेरिट पर उम्मीदवारों को यह पद मिलने चाहिए थे। यह समानता, मौलिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है।
साथ ही कहा गया है कि जीएडी ने 29 सितंबर 2022 को 87-13 फीसदी का फार्मूला दिया था, इसमें कहीं भी मेरिट को प्रभावित करने की बात नहीं थी लेकिन आयोग ने इसे अपने हिसाब से लागू कर दिया।
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उम्मीदवारों से लिया जा रहा शपथपत्र बताया गलत
याचिका में उम्मीदवारों से आयोग द्वारा लिए जा रहे शपथपत्र को भी गलत बताया गया है। दरअसल हर उम्मीदवार से आयोग द्वारा शपथपत्र लिया जा रहा है कि वह जिस कैटेगरी मूल/प्रोवीजनल में चयनित हुए हैं। वह उसी में बने रहेंगे और कैटेगरी में बदलने को लेकर कोई क्लेम नहीं करेंगे। सभी को इंटरव्यू के समय यह भरकर देना होता है।
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सूत्र नॉलेज
87-13% फार्मूले ( एमपीपीएसी 87-13 फीसदी फार्मूले) का कारण साल 2019 की पीएससी तक के 13 फीसदी कैटेगरी के रिजल्ट होल्ड है। इसके बाद जनवरी 2023 से ईएसबी में भी होल्ड हो गए। इसमें करीब एक लाख उम्मीदवारों का भविष्य फंसा है। छह साल से उम्मीदवारों को नहीं पता कि वो चयनित है भी या नहीं। ओबीसी केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम बहस जारी है।
आगे क्या होगा
यह याचिका मुख्य रूप से मेरिट पर 87-13 फीसदी (87-13 का फार्मूला) लागू करने की मांग कर रही है, यह अभी प्री पर आधारित है, जबकि अंतिम चयन मेंस, इंटरव्यू के अंकों से होता है। इस संबंध में पीएससी और जीएडी को पक्षकार बनाया गया है। लेकिन शासन आगे जाकर इसमें सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस का हवाला देकर इसे टलवा सकता है।
सूत्र एक्सपर्ट
वहीं अधिवक्ता मनीष यादव का कहना है कि यह आदेश पुराने रिजल्ट से लागू होना मुश्किल है। कारण है कि वह तो चयनित होकर ज्वाइन हो चुके हैं। यदि यह मेरिट वाला मापदंड लागू किया गया तो फिर तो कई सारे रिजल्ट, उम्मीदवार प्रभावित होंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट में चल रहा केस तो है ही, सब कुछ उस पर निर्भर है।
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