शर्म करो इंदौर प्रशासन, आपरेशन सिंदूर में लड़ने वाले आर्मी सूबेदार को 3 साल से घुमा रहा पटवारी
इंदौर का पटवारी किस तरह से सिस्टम पर हावी है यह एक बार फिर सामने आया। इंदौर जिला प्रशासन को शर्मिंदा करने वाली यह घटना है। आर्मी में राजौरी में पदस्थ सूबेदार ने जिला कलेक्टर को गुहार लगाई है। यह सूबेदार आपरेशन सिंदूर के दौरान लगातार चार दिन-रात बिना सोए डयूटी पर रहा।
मुझे बड़ा दुख है, मैं पाकिस्तान के खिलाफ युद् के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में चार दिन तक बिना सोए, खाए ड्यूटी करता रहा। बार्डर पर हम मातृभूमि् की रक्षा करते हैं, लेकिन यहां देश के अंदर मेरी ही जमीन की रक्षा नहीं हो रही है। यह कहना है कि राजौरी में बार्डर पर पदस्थ सूबेदार नीलेश पांचाल का। यह तीन साल से इंदौर कलेक्टोरेट में भटक रहे हैं और पटवारी महोदय के चक्कर काट रहे हैं।
यह है विवाद
सूबेदार मंगलवार 12 मई को कलेक्टोरट जनसुनवाई में पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियोंं को बताया कि महू के अंबाचंदन गांव में मेरी पुश्तैनी जमीन है। इस पर पड़ोसी कब्जा कर रहे हैं।
सीमांकन और कार्रवाई के लिए तीन साल से लगातार आवेदन दे रहा हूं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हर साल छुट्टी में एक बार घर आता हूं और पूरी छुट्टी एक महीना पटवारी और अधिकारियों के चक्कर काटने् में निकल जाता है लेकिन कार्रवाई नहीं होती है।
पटवारी हर बार घुमा देता है
पटवारी अमित पर आरोप लगाते हुए सूबेदार ने कहा कि जब भी पटवारी से बात करो तो वह यही कहता है कि मैं तो कैलेंडर के हिसाब से चलूंगा। मैं हर बार तीन साल से निवेदन कर रहा हूं कि मेरी मदद करो, इस कैलेंडर के चलते मेरी छुट्टी खत्म हो जाती है और फिर आवेदन पर कुछ नहीं नहीं होता है।
मैं तीन साल से धक्के खा रहा हूं, लेकिन मैं देश के अंदर ही अपनी जमीन को नहीं बचा पा रहा हूं। सूबेदार को 15 मई को फिर ड्यूटी पर लौटना है। वहीं अभी तक सीमांकन के लिए कोई आदेश नहीं निकला है।
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