इंदौर प्रेस्टीज प्रबंधन पर 3 FIR, बसों में मिले थे शराबी ड्राइवर, अब एलन कोचिंग की बस में भी मिला
Indore News:इंदौर में स्कूल, कॉलेज और कोचिंग क्लासेस की बसों और वाहनों में ड्राइवरों का नशे में मिलना बंद नहीं हो रहा है। मेडिकैप्स ग्रुप की बसों से हुए हादसों में तीन लोगों की जान जा चुकी है।
दो दिन पहले प्रेस्टीज स्कूल की तीन बसों के ड्राइवर नशे में मिले। द सूत्र ने सवाल उठाया कि सिर्फ ड्राइवर पर कार्रवाई क्यों, प्रबंधन पर क्यों नहीं?
आखिर में अब प्रेस्टीज प्रबंधन पर भी तीन एफआईआर हुई हैं। उधर लगातार चल रही जांच में अब एलन कोचिंग के वाहन का ड्राइवर शराब के नशे में मिला है।
प्रेस्टीज प्रबंधन पर एक नहीं तीन केस
प्रेस्टीज स्कूल प्रबंधन (इंदौर प्रेस्टीज प्रबंधन पर 3 FIR) पर बीएनएस की धारा 281 के साथ-साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 और 179 के तहत तीन केस दर्ज किए गए हैं।
थाना लसूडिया ने इन केसों में अलग-अलग ड्राइवरों पर केस बनाए हैं। सभी में प्रबंधन को भी आरोपी बनाया गया है।
प्रेस्टीज स्कूल की बसों के ड्राइवर, जैसे संतोष दांगी, योगेश उईके और गजराज, सभी नशे में पाए गए थे।
केस में लिखा गया है कि ये ड्राइवर शराब के नशे में बच्चों को बैठाकर तेज रफ्तार और लापरवाही से बस चला रहे थे, और स्कूल/कॉलेज प्रबंधन की भी लापरवाही सामने आई है।
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एलन कोचिंग का ड्राइवर भी नशे में
रविवार को ट्रैफिक सूबेदार अरुण सिंह रेडिसन चौराहे पर चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान, उन्होंने मारुति सुजुकी ईको MP13CE2461 को रोका। इसमें एलन इंस्टीट्यूट (allen indore) के बच्चे जा रहे थे।
जब वाहन को रोका गया, तो ड्राइवर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। फिर उसे विजयनगर थाने लाकर ब्रीथ एनालाइजर से चेक किया गया। इस दौरान ड्राइवर के शरीर में 100 मिलीलीटर में 48.7 मिलीग्राम शराब पाई गई।
उस वाहन में 11 बच्चे बैठे थे। बच्चों को उनके माता-पिता और परिजनों को बुलवाकर घर भेज दिया गया। वाहन को जब्त कर ड्राइवर के खिलाफ नशे में गाड़ी चलाने, बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने, बिना बीमा और बिना रजिस्ट्रेशन के गाड़ी चलाने पर केस दर्ज किया गया है।
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आउटसोर्स का बोल प्रबंधन झाड़ता है पल्ला
स्कूल, कॉलेज और कोचिंग के बच्चों से फीस तो प्रबंधन लेता है लेकिन जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। ये सारी सुविधाएं आउटसोर्स की गई हैं। प्रबंधन यही कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है कि ये आउटसोर्स व्यवस्था है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
इससे पहले मेडिकैप्स (medicaps indore) की बसों से भी दो हादसे हो चुके हैं। इसमें तीन लोगों की जान चली गई, लेकिन प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।