इंदौर में बढ़ेगी प्रॉपर्टी गाइडलाइन , 1593 लोकेशन पर 21 से 50 फीसदी बढ़ाने की मंजूरी
INDORE. वित्तीय साल 2026-27 के लिए प्रॉपर्टी की गाइडलाइन दर बढ़ाने पर सहमति हो गई है। अब इसका पब्लिकेशन होगा और आमजन से सुझाव, आपत्ति ली जाएगी।
इसके निराकरण के बाद इसे केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी भोपाल भेजा जाएगा। जिले की कुल 4 हजार 579 लोकेशन में से 2 हजार 606 लोकेशन (57 फीसदी) पर यह गाइडलाइन बढ़ेगी।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 1593 लोकेशन पर 21 से 50 फीसदी के बीच होगी। बता दें कि यह फैसला शनिवार, 14 मार्च को इंदौर जिला मूल्यांकन कमेटी की बैठक में लिया गया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बैठक की अध्यक्षता की।
इस तरह से बढ़ेगी गाइडलाइन
- 0 से 10 फीसदी बढ़ोतरी: शहर की 27 और गांव की 58 लोकेशन (कुल 85)
- 11 से 20 फीसदी बढ़ोतरी: शहर की 190 और गांव की 279, कुल 469 लोकेशन
- 21 से 50 फीसदी बढ़ोतरी: शहर की 922 और गांव की 671, कुल 1593 लोकेशन
- 51 से 100 फीसदी बढ़ोतरी: शहर की 180 और गांव की 239, कुल 419 लोकेशन
- 100 फीसदी से अधिक: शहर की 32 और गांव की 8, कुल 40 लोकेशन पर
शहर की जगह गांव की 79 फीसदी जगह बढ़ेगी
शहर में ई-सम्पदा सॉफ्टवेयर में पुरानी 597 लोकेशन को मर्ज कर इसे अब कुल 4 हजार 579 लोकेशन किया जा रहा है। इसमें शहर की करीब तीन हजार लोकेशन हैं, जिनमें से 1351 पर बढ़ोतरी की जा रही है।
वहीं, गांव की 1600 लोकेशन हैं, जिनमें 1255 लोकेशन पर बढ़ोतरी हो रही है। यानी शहर की जगह गांव में अधिक बढ़ोतरी हो रही है।
गांव की कुल 79 फीसदी लोकेशन पर प्रॉपर्टी के रेट बढ़ाए जा रहे हैं। वहीं, शहर में केवल 45 फीसदी लोकेशन पर दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
सिंहस्थ के चलते गांवों में बढ़ोतरी
द सूत्र ने पहले ही खुलासा कर दिया था कि शहर की जगह इस बार पूरा फोकस ग्रामीण एरिया पर है। कारण है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 के चलते आसपास सड़कों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
नेशनल हाईवे, ग्रीन फील्ड, रिंग रोड बन रहे हैं। इसके चलते इन जगहों पर दाम बढ़ाए गए हैं। साथ ही गांव से कस्बों में तब्दील हो रहे लोकेशन पर भी बढ़ोतरी की जा रही है।
घाटे की भरपाई करने की कोशिश
इस बार रियल एस्टेट सेक्टर के धड़ाम होने के चलते पंजीयन आय की हालत खराब है। इंदौर जिले के लिए 3 हजार 097 करोड़ का लक्ष्य है। वहीं, फरवरी माह खत्म होने पर भी केवल यह 2200 करोड़ पर पहुंचा था। जबकि लक्ष्य 2900 करोड़ का था, यानी 700 करोड़ रुपए पीछे था। अंतिम माह में 500 करोड़ करीब भी मिलता है तो लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में अब गाइडलाइन दर बढ़ाकर आगामी साल में इसे पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
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