पूर्व ARTO सुनील तिवारी की पत्नी डॉ. बृजबाला के खिलाफ स्कॉलरशिप घोटाले में चालान
इंदौर में एआरटीओ रहे सुनील तिवारी की पत्नी और एलसीएच (लाइफ केयर हॉस्पिटल) की प्रमुख डॉ. बृजबाला तिवारी के खिलाफ लोकायुक्त ने चालान पेश किया है। यह चालान साल 2014 में इंदौर में हुए चर्चित पैरामेडिकल कॉलेज स्कॉलरशिप घोटाले को लेकर है। इसमें 12 साल की जांच के बाद लोकायुक्त इंदौर द्वारा एक-एक कॉलेज संचालकों के खिलाफ चालान पेश किया जा रहा है।
तिवारी पर इन धाराओं में केस
लोकायुक्त पुलिस ने आरोप लगाए हैं कि इनके एलसीएच पब्लिक ट्रस्ट के एलटीएस इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर में स्कॉलरशिप घोटाला हुआ है। इसमें ट्रस्ट की चेयरपर्सन डॉ. बृजबाला तिवारी और संस्थान के प्राचार्य कैप्टन प्रकाश डोसी आरोपी हैं। इस पर लोकायुक्त में अपराध क्रमांक 547/2014 के तहत आईपीसी धारा 420, 467, 468, 471, 406 और 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है।
31.17 लाख का घोटाला
आरोप है कि इनके संस्थान में 160 छात्रों ने एडमिशन लिया। इसमें से 156 की स्कॉलरशिप राशि 31 लाख 17 हजार 560 का घोटाला किया गया। इनके फार्म फर्जी तरीके से भरे गए थे। साथ ही, इन्हें संस्थान में एडमिशन दिखाकर सरकार से स्कॉलरशिप राशि ली गई।
इसमें से छह छात्र, महेंद्र डाबर, मनीष सोलंकी, मोहन मुवेल, फूलसिंह धनगर, हेमंत चौहान और महेश ने संस्थान में प्रवेश ही नहीं लिया था। लेकिन इनके दस्तावेज लेकर इन्हें कॉलेज में दिखाकर सरकार से स्कॉलरशिप राशि ली गई।
50 हजार के मुचलके पर मिली जमानत
लोकायुक्त द्वारा चालान पेश करते ही बृजबाला तिवारी और डोसी ने जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया। इसमें तिवारी ने कहा कि वह 62 साल की महिला डॉक्टर हैं और समाज में सम्मानित हैं। आरोप गलत हैं। वैसे भी वह ट्रस्ट की चेयरपर्सन हैं और संस्थान के दैनिक कामों में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।
तिवारी ने आगे कहा कि लोकायुक्त को 11 साल तक जांच में पूरा सहयोग किया है। इसी तरह डोसी ने कहा कि वह 74 साल के हैं और वह केवल वेतनिक पद पर थे, आरोप झूठे हैं। दोनों के तर्कों के आधार पर जिला कोर्ट ने 50-50 हजार के मुचलके पर अग्रिम जमानत मंजूर की है।
जानें क्या था घोटाला
यह स्कॉलरशिप घोटाला साल 2013-14 के दौरान सामने आया था। इसमें जांच में आया कि संस्थानों ने एसटी और एससी छात्रों के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप राशि हजम कर ली। संस्थानों द्वारा इसके लिए फर्जी दस्तावेज जमा कराए, फर्जी खाते खुलवाए और इसमें राशि लेकर अपने पास रख ली।
इसमें लोकायुक्त द्वारा एफआईआर दर्ज कर कॉलेज संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब इसमें जांच कर एक-एक कर संस्थानों के खिलाफ चालान पेश किया जा रहा है। इसमें गिरफ्तारी के डर से अब यह सभी अग्रिम जमानत ले रहे हैं।
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