मप्र का नटवरलाल वकील, SDM कोर्ट, जिला कोर्ट भी फर्जी बनाया, HC की फर्जी रसीद

Sanjay Gupta | Jan 30, 2025, 11:02 IST
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नटवरलाल वकील गुप्ता पर सात जनवरी को ही राजगढ़ थाने में चार सौ बीसी का केस दर्ज हुआ है, उस पर धारा 420, 467 व 468 में केस दर्ज हुआ है। फरियादी रामनारायण सौधिया ने यह केस दर्ज कराया है।

इंदौर में कलेक्टोरेट में एसडीएम की फर्जी कोर्ट और इसकी फर्जी नोटशीट चलना बताकर फरियादी से राशि ठगने वाला वकील गिरीराज गुप्ता बहुत बड़ा नटवरलाल निकला है। 'द सूत्र' ने जब वकील की और जानकारी निकाली तो सामने आया कि इसने केवल एसडीएम इंदौर की फर्जी कोर्ट नहीं बनाई, बल्कि राजगढ़ में फर्जी जिला कोर्ट भी बना चुका है और यहां तक कि हाईकोर्ट के नाम की फर्जी जमा राशि रसीद भी बना चुका है। अभी यह जेल में है।



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यहां देखें FIR की पूरी कॉपी



नटवरलाल वकील ने ऐसे बताई फर्जी कोर्ट

मजिस्ट्रेट के पास गया तो खुली पोल

जब काफी दिन हो गए और कोई जानकारी नहीं मिली तो फरियादी सीधे मजिस्ट्रेट के पास गया तो पता चला कि केस की कोर्ट फीस ही जमा नहीं है। वह रसीद फर्जी थी। फरियादी ने पुलिस के पास जाकर धोखाधड़ी की शिकायत की और इसकी जांच में सामने आया कि यह रसीद कुटरचित थी, जिसे गुप्ता ने ही बनाया था। इसके बाद पुलिस ने उस पर केस दर्ज किया और गिरफ्तार किया, अब वह जेल में है।



सामने आए और फरियादी

इस केस की खबर लगने के बाद उसके गृह क्षेत्र खिलचीपुर और राजगढ़ में कुछ और फरियादी सामने आए हैं। सभी ने आरोप लगाए हैं कि उन्हें भी इसी तरह फर्जी कोर्ट, तारीख के नाम पर रुपए ऐंठे गए हैं, जबकि यह केस तो चल ही नहीं रहे हैं।



इंदौर में हुआ हीरानगर थाने में केस

फरियादी गौरव शर्मा के आवेदन पर हीरानगर थाने में बीएनएस धारा 314(8), 336(3), 338, 340 (2), 347(2) के तहत खिलचीपुर राजगढ़ के वकील गिरीराज गुप्ता पर केस हुआ है। एफआईआर में है कि आरोपी अधिवक्ता द्वारा एसडीएम घनश्याम धनगर की भाड़ा नियंत्रक कोर्ट के फर्जी हस्ताक्षर व पद मुद्रा से आदेश पत्र, पत्रिका व कूटरचित आर्डर शीट तैयार कर न्यायालय का फर्जी प्रकरण 40/2024 का उल्लेख कर साक्षी गौरव शर्मा के साथ धोखाधड़ी की। पूरी नोटशीट ऐसे ही चली जैसे की एसडीएम कोर्ट में चलती है।



इंदौर में नटवरलाल वकील ने यह किया कांड

आवेदक शोभा शर्मा के पक्ष में उनका मकान खाली कराने को लेकर न्यायालय का फैसला आ गया था। उनके बेटे ने कब्जा हटाने के लिए वकील गिरीराज से बात की तो उन्होंने कहा कि इसके लिए एसडीएम कोर्ट में केस लगाना होगा तब वह मकान खाली होगा और आपको कब्जा मिलेगा। शर्मा ने उन्हें कर लिया और फीस दे दी। बाद में केस को लेकर वकील टालते रहे और कहते रहे कि कभी एसडीएम नहीं मिले, कभी सुनवाई जारी है। इस पर उन्होंने वकील साहब से केस नंबर और अन्य जानकारी मांगी तो उन्होंने एक फर्जी नोटशीट ही बनाकर भेज दी। जिसमें बकायदा सुनवाई दिखाई गई और एसडीएम कोर्ट की साइन, सील थी। इस नोटशीट के साथ उनका वकालत नामा भी लगा हुआ था। इस पर एसडीएम ने फर्जीवाडे की जानकारी थाने में दे दी, जिसमें केस दर्ज हो गया।



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