इंदौर हवाई रेस्टोरेंट Ubud पर कार्रवाई के लिए निगम फ्री, संचालक ने कलेक्टर की NOC को मंजूरी बताया
INDORE. इंदौर और मध्य प्रदेश के पहले फ्लाई डाइनिंग रेस्टोरेंट को लेकर मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इंदौर में 150 फीट की ऊंचाई पर खुले इस रेस्टोरेंट उबुद को मंजूरी कैसे मिली। इसे लेकर 'द सूत्र' ने 09 मार्च को पूरी फाइल की इनसाइड स्टोरी की थी। मंगलवार, 10 मार्च को हाईकोर्ट इंदौर में इस मामले में फिर सुनवाई हुई।
हमारे पास कलेक्टर की मंजूरी- संचालक
उबुद संचालक की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि हमारे पास कलेक्टर से मंजूरी है। सुरक्षा मानकों का पूरा पालन हो रहा है। हमने नगर निगम के नोटिस पर जवाब दिया है, लेकिन वे इसे मंजूर नहीं कर रहे हैं।
वहीं, याचिकाकर्ता चर्चिल शास्त्री के अधिवक्ता मनीष यादव ने कहा कि इनके पास कोई वैध मंजूरी नहीं है और सुरक्षा मानकों पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं नगर निगम की ओर से कहा गया कि संचालकों के पास कोई वैध अनुमति नहीं है, इसीलिए उन्हें नोटिस दिया गया है।
हाईकोर्ट ने दिए यह आदेश
इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने आदेश दिया कि रेस्टोरेंट संचालक दो सप्ताह में अपना जवाब हाईकोर्ट में पेश करें। मामले में 23 मार्च को फिर सुनवाई की जाएगी। वहीं, नगर निगम ने जो नोटिस दिए हैं, उन पर वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
कलेक्टर की मंजूरी नहीं, यह केवल अनापत्ति है
जैसा कि द सूत्र ने पहले ही खुलासा किया था, उबुद के पास कलेक्टर की मंजूरी नहीं है। बल्कि अपर कलेक्टर कार्यालय से जारी केवल एक अनापत्ति पत्र (NOC) है, जिसे पूर्ण मंजूरी नहीं माना जा सकता।
इस अनापत्ति पत्र के बिंदु क्रमांक 1 में ही स्पष्ट लिखा है कि संचालकों को सभी संबंधित विभागों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बावजूद संचालकों ने इसे ही मंजूरी बताते हुए हाईकोर्ट में जवाब पेश किया है। इसी अनापत्ति के आधार पर निगम से केवल ट्रेड लाइसेंस जारी हुआ था। इसके बाद निगम ने बिना वैध मंजूरी के संचालन पर नोटिस जारी किया था, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
बेंच को जाना होगा रेस्टोरेंट देखने
सुनवाई के दौरान कोर्ट में हल्का हंसी-मजाक भी हुआ। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता भी एक बार रेस्टोरेंट जाकर देखें कि वहां सुरक्षा है या नहीं। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि लगता है अब बेंच को भी जाकर देखना होगा कि हवाई रेस्टोरेंट का संचालन कैसे हो रहा है। इस पर संचालक के अधिवक्ता ने कहा कि सभी का स्वागत है।
उबुद की फाइल नवंबर में ऐसे चली
- इसकी कहानी नवंबर 2025 के पहले सप्ताह से शुरू होती है। इसे शुरू करने के लिए नगर निगम में फाइल लगाई जाती है। इसके लिए कंपनी एक्सपेरियम एडवेंचर्स एलएलपी द्वारा मंजूरी मांगी जाती है।
- नगर निगम के अधिकारी पहली बार सामने आई ऐसी फाइल को देखकर चौंक जाते हैं। तय किया जाता है कि पहले इसमें जिला प्रशासन से पत्र लिया जाए। इसके लिए कंपनी को कलेक्टोरेट जाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लाने के लिए कहा जाता है।
- जबकि, इस मामले में कलेक्टोरेट से एनओसी का कोई मामला ही नहीं बनता है। इसके चलते कलेक्टोरेट से मना कर दिया जाता है।
- फिर संबंधित कंपनी के कर्ताधर्ता प्रशासन और निगम के अधिकारियों के पास रसूखदारों से फोन करवाते हैं। इसके बाद निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चर्चा होती है और बीच का रास्ता निकाला जाता है।
- इसके बाद कलेक्टोरेट से 11 नवंबर 2025 को 17 बिंदुओं वाली एक अनापत्ति जारी की जाती है।
- इसी अनापत्ति के आधार पर कंपनी पुनः निगम के पास जाती है और वहां से ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। इसी आधार पर रेस्टोरेंट शुरू हो जाता है।
अनापत्ति में सभी से मंजूरी की बात थी, जो हुई नहीं
कलेक्टोरेट की अनापत्ति केवल खानापूर्ति थी। इसमें कंपनी को अपने स्तर पर कोई विशेष मंजूरी नहीं दी गई थी, क्योंकि वह उनके अधिकार क्षेत्र में था ही नहीं। इसके बिंदु क्रमांक एक में ही साफ लिखा था कि इस गतिविधि के लिए जो भी मंजूरी/अनापत्ति प्राप्त करना अनिवार्य हो, उसे प्राप्त करने की पूरी जिम्मेदारी आयोजक की होगी। इसके बाद ही वे गतिविधि शुरू कर सकेंगे।
साथ ही बिंदु क्रमांक सात में पुनः लिखा गया कि इस एक्टिविटी के लिए फायर, पुलिस, नगर निगम, एसडीएम, आबकारी, वाणिज्यिक कर आदि विभागों से आवेदक द्वारा मंजूरी/अनापत्ति ली जाएगी। साथ ही उनकी शर्तों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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