इंदौर नोटा में गोपालगंज और रतलाम सीट का रिकार्ड तोड़ेगा, बनेगा नंबर 1

मप्र में नोटा का सबसे ज्यादा उपयोग आदिवासी सीट पर सामने आया है। 2019 में रतलाम आदिवासी सीट पर रिकार्ड 35431 वोट डले जो कुल वोट का 1.91 फीसदी था। यह मप्र में किसी लोकसभा सीट पर नोटा को मिले सबसे ज्यादा वोट है। 

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Pratibha ranaa
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संजय गुप्ता, INDORE. कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम के मैदान छोड़ने के बाद अब बीजेपी के प्रत्याशी शंकर लालवानी ( Shankar Lalwani ) का कहने को तो 13 अन्य प्रत्याशियों के साथ मुकाबला है, लेकिन कांग्रेस के नोटा के सपोर्ट में उतरने के बाद अब यह नजदीकी प्रतिदंदी बनने की संभावना तेज हो गई है। साथ ही इस बात की भी कि सफाई के बाद अब नोटा में इंदौर नंबर वन बनेगा। नोटा का इतिहास और कौन सी सीट इसमें नंबर है, आज इसका पूरा इतिहास बताते हैं। 

इंदौर इस बार चुनाव में इन 3 मामले में आ सकता है नंबर 1

1-    किसी भी प्रत्याशी को मिलने वाले सबसे ज्यादा वोट, बीते चुनाव में ही बीजेपी के शंकर लालवानी को 10.68 लाख वोट मिले जो चुनिंदा प्रत्याशी में से एक थे।

2-    देश में सबसे बडी वोट के हिसाब से जीत, बीते चुनाव में सी पाटिल की नवसारी सीट पर 6.89 लाख वोट से जीत सबसे बड़ी थी, वहीं लालवानी 2019 में 5.47 लाख की जीत के साथ 12वें नंबर पर थे।

3-    ऐसी सीट जिसमें नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिले, अभी यह रिकार्ड देश में गोपालगंज के पास है जहां 2019 में नोटा को 51660 वोट मिले थे। 

नोटा को कितने वोट मिले थे 2019 में

साल 2014 में नोटा को 60 लाख वोट मिले थे जो कुल वोट का 1.08 फीसदी था, वहीं साल 2019 में नोटा को वोट बढ़कर 65 लाख 23 हजार 975 हो गए जो कुल वोट का 1.06 फीसदी था। 

अभी देश में नोटा में गोपालगंज आगे

-    नोटा में सबसे ज्यादा वोट का रिकार्ड बिहार की गोपालगंज सीट का है। यहां पर 2019 के चुनाव में सबसे ज्यादा 51660 वोट नोटा को मिले थे। 

-    वहीं दूसरे नंबर पश्चिम चंपारण सीट थी जिसमें नोटा को 45699 वोट मिले

-    तीसरे नंबर पर जमुई सीट पर 39496 वोट नोटा को मिले

-    चौथे नंबर पर मधेपुरा सीट पर नोटा को 38450 वोट मिले

-    पांचवे नंबर पर समस्तीपुर सीट पर 35417 वोट नोटा को मिले थे।

(देश में सबसे ज्यादा वोट बिहार में ही गिरे थे 2 फीसदी था, इसके बहाद आंध्रा में 1.54 फीसदी, छत्तीसगढ़ में कुल वोट का 1.44 फीसदी नोटा को गया था)

मप्र में नोटा में कौन आगे?

मप्र में नोटा का सबसे ज्यादा उपयोग आदिवासी सीट पर सामने आया है।

-    साल 2019 में रतलाम आदिवासी सीट पर रिकार्ड 35431 वोट डले जो कुल वोट का 1.91 फीसदी था। यह मप्र में किसी लोकसभा सीट पर नोटा को मिले सबसे ज्यादा वोट है। 

-    दूसरे नंबर पर आदिवासी सीट मंडला थी, जहां 32240 वोट नोटा को गए जो 1.65 फीसदी था

-    तीसरे नंबर पर आदिवासी सीट बैतूल थी, जहां नोटा को 22787 वोट गए जो 1.31 फीसदी था

-    चौथे नंबर पर छिंदवाड़ा सीट पर 20324 वोट मिले थे जो 1.65 फीसदी था

-    पांचवे नंबर पर लोकसभा की आदिवासी सीट शहड़ोल थी जहां 20027 वोट गए थे जो 1.62 फीसदी था।

इंदौर सीट पर नोटा का क्या रिकार्ड रहा है?

इंदौर में नोटा का उपयोग मतदाता कम करते हें। साल 2019 चुनाव में नोटा का उपयोग 0.30 फीसदी मतदाताओं ने किया था और कुल 5045 वोट नोटा में गए थे। कुल डले 16.29 लाख वोट में से बीजेपी प्रत्याशी को 10.68 लाख वोट (65.59 फीसदी), कांग्रेस को 5.20 लाख (31.97 फीसदी) और बीएसपी प्रत्याशी तीसेर नंबर पर थे जिसे 8666 वोट (0.53 फीसदी) मिले थे। चौथे नंबर पर नोटा था जिसे 5045 वोट (0.30 फीसदी) मिले थे। 

नोटा कब और कैसे शुरु हुआ

नोटा ( NOTA "None of the above)  यानि इसमें से कोई नहीं। इसकी शुरूआत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे पहले साल दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में मप्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान और मिजोरम के विधानसभा चुनाव में किया गया था। लोकसभा चुनाव में इसकी शुरूआत 2014 के चुनाव में पहली बार हुई थी। यह मतदाता को मौका देता है कि वह अपनी नापसंद बता सके कि उन्हें इनमें से कोई प्रत्याशी पसंद नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि नोटा में कितने भी वोट जाए, उससे चुनाव रिजल्ट पर कोई असर नहीं होता है, प्रत्याशी से ज्यादा वोट नोटा को चले भी जाएं तो भी प्रत्याशी की जीत होती है। हालांकि इस मामले में फिर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगी है, जिसमें नोटा को अधिक वोट मिलने पर चुनाव निरस्त करने की भी मांग है। ईवीएम में सभी प्रत्याशियों के नाम के बाद सबसे अंत का बटन नोटा का होता है। 

कांग्रेस ने की लोकतंत्र की हत्या पर शोकसभा

उधर कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या का मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। बुधवार को शहर कॉंग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह यादव, महामंत्री यतीन्द्र वर्मा के साथ कार्यकर्ताओं ने गांधी भवन कॉंग्रेस कार्यालय पर लोकतंत्र की हत्या को लेकर शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष निगम चिंटू चौकसे, प्रकाश महावर कोली, राजेश यादव, सचिन यादव, गजेन्द्र वर्मा, दीपक सोनवने, पुखराज राठौर, अजय चौकसे, फूलसिंह कुवाल, अमित तिवारी, कमलेश पटेरिया, सुनील चौधरी, कैलाश देपाले, वसंत कुशवाह, राजेंद्र जादौन, हरिओम शर्मा, विनय मोरे, शहजाद अब्बासी, रोहन सोनी, अमित पान्जरे, दिलीप ठक्कर, अथर्व सांकला आदि उपस्थित थे।

Shankar Lalwani शंकर लालवानी