इंदौर यशवंत क्लब के बाहर बकाया टैक्स वसूली में मुनादी पर निगमायुक्त को अवमानना नोटिस
News In Short
- यशवंत क्लब पर 2.64 करोड़ का टैक्स बकाया है।
- निगम ने वसूली के लिए मुनादी कराई है।
- क्लब ने इसे कोर्ट की अवमानना बताया है।
- हाईकोर्ट ने अफसरों को नोटिस भेजा है।
- अब दोनों पक्ष कोर्ट में आमने-सामने हैं।
News In Detail
इंदौर का यशवंत क्लब फिर विवाद में आ गया है। इस बार मामला टैक्स और मुनादी से जुड़ा है। अब यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
मुनादी से क्यों बढ़ा विवाद?
नगर निगम ने 14 मार्च को कार्रवाई की थी। क्लब के बाहर टैक्स वसूली को लेकर मुनादी कराई गई थी। निगम का कहना है कि टैक्स नहीं भरा गया, जिससे क्लब प्रबंधन नाराज हो गया और हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
इसमें कहा गया कि आदेश पहले से हैं और वसूली पर स्टे है। कोर्ट के आदेश से 30% टैक्स भरा है। बाकी मामला कोर्ट में चल रहा है, फिर भी मुनादी कराना गलत और कोर्ट की अवमानना है।
हाईकोर्ट ने क्या कार्रवाई की?
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। निगमायुक्त (आईएएस क्षितिज सिंघल) और जोन-9 सहायक राजस्व अधिकारी प्रशांत पटेल को नोटिस जारी किया है।
क्या है पुराना टैक्स विवाद?
साल 2020 में क्लब की नई नपती हुई थी। इसके बाद नया टैक्स तय किया गया था। क्लब ने इस पर आपत्ति जताई और मामला कोर्ट में पहुंच गया था। साल 2022 में अंतरिम आदेश दिया गया, जिसमें क्लब को 30% टैक्स भरने के आदेश हुए थे। बाकी मामले की सुनवाई जारी रही।
नए भवन से कैसे बढ़ा मामला?
हाल ही में क्लब ने 100 नए सदस्य बनाकर 25 करोड़ रुपए जमा किए और नए भवन का प्लान बनाया। नए भवन के लिए निगम में आवेदन किया गया, लेकिन पोर्टल ने बकाया टैक्स के कारण आवेदन मंजूर नहीं किया।
इसके बाद क्लब ने भवन मंजूरी के लिए साल 2025 में रिट पिटीशन (32538/25) दाखिल की। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसमें निगम को भवन नक्शा पास करने के आदेश दिए। वहीं, प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने की बात कहते हुए निगम ने इसमें रिट अपील (86/2026) दाखिल की थी।
इसके बाद 7 जनवरी को यह याचिका खारिज हो गई थी। इसमें निगम ने कहा कि क्लब स्टे के बाद से ही टैक्स नहीं भर रहा है, लेकिन याचिका खारिज हो गई थी। वहीं, क्लब ने हाईकोर्ट सिंगल बेंच के आदेश के बाद भी नक्शा पास नहीं होने पर अवमानना याचिका (735/26) दायर कर दी। इसमें 03 फरवरी को आदेश हुआ कि 30 दिन में सिंगल बेंच के आदेश का पालन किया जाए।
निगम ने जल्द सुनवाई के लिए लगाया आवेदन
वहीं, अब इस आदेश के बाद नगर निगम ने भी क्लब से अपने बकाया प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के लिए साल 2020 से चल रही याचिका में आवेदन लगाया है। नगर निगम ने मांग की है कि स्टे के बाद से ही क्लब ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं किया है, जो अब बढ़कर 2 करोड़ 64 लाख रुपए हो चुका है।
आवेदन में बकाया टैक्स की मांग की गई है। उधर, क्लब के बाहर मुनादी होने से मैनेजिंग कमेटी की छवि को धक्का लगा। जून 2026 में चुनाव हैं, ऐसे में मामला प्रतिष्ठा का बन गया है। इसे देखते हुए क्लब ने अवमानना याचिका 1989/26 दायर कर दी। इस पर अब नोटिस हुए हैं।
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