सीनियर आईपीएस राजाबाबू सिंह को जान का खतरा, की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
Bhopal. मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू ने बताया कि मंगलवार को सुबह 6 बजे त्रिलंगा स्थित उनके आवास पर एक घटना घटी, जो बेहद गंभीर है।
एक चार पहिया वाहन से आए कुछ अज्ञात युवकों ने एडीजी के घर के बाहर गाली-गलौज की और अमर्यादित व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि एक युवक के हाथ में डंडा भी था। युवकों की हरकतें सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गईं।
क्या हुआ था
इस घटना के बाद, एडीजी राजाबाबू सिंह ने शाहपुरा थाने को तुरंत सूचना दी और सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंप दिए। इसके अलावा, उन्होंने भोपाल पुलिस कमिश्नर और मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही उनकी/आवास सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है।
प्रशिक्षण प्रणाली में नवाचारों पर जोर
एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह ने कहा कि उन्होंने पुलिस ट्रेनिंग में भारतीय सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को शामिल करने की कोशिश शुरू की है।
उनका मानना है कि अगर पुलिस अधिकारियों को इन मूल्यों की सही समझ और अभ्यास होगा, तो इससे समाज में बेहतर पुलिसिंग हो सकेगी। ये घटना शायद उनके इस प्रयास के खिलाफ असंतोष को दिखाती है।
कार्रवाई की मांग
सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों के अमर्यादित व्यवहार की पूरी रिकॉर्डिंग है, जो पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकती है। एडीजी ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने और सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
कौन हैं आईपीएस राजाबाबू सिंह?
- राजा बाबू सिंह, 1994 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं, जो अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और अनुशासनप्रियता के लिए मशहूर हैं।
- उनका जन्म 11 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पचनेही कस्बे में हुआ था।
- उन्होंने अपनी पढ़ाई एमए तक की और UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम 1993 में पास किया।
- 6 सितंबर 1994 को उन्हें IPS में नियुक्ति मिली।
- शुरू से ही पुलिसिंग में नैतिक मूल्यों और नवाचारों को महत्वपूर्ण मानते रहे हैं। उनका मानना है कि पुलिस का काम केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता और चरित्र का निर्माण करना भी है।
- उनका करियर काफी इंप्रेसिव रहा है, और 2021 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) रहते हुए उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत किया और आंतरिक प्रशासन में सुधार किए।
- कश्मीर में ड्यूटी के दौरान भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार काम किया।
- BSF से डेपुटेशन पूरा करके वे मध्य प्रदेश वापस लौटे और ADG (ट्रेनिंग) बन गए।
- 2019 में ग्वालियर रेंज के DIG रहते हुए उन्होंने जेलों में कैदियों को गीता की प्रतियां बांटी ताकि उनके नैतिक सुधार की दिशा में मदद मिल सके।
- कुल मिलाकर, वे एक ऐसे अधिकारी हैं जो पुलिस ट्रेनिंग को सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी ले जाते हैं।
पुलिस ट्रेनिंग में गीता और रामचरितमानस की पहल
राजा बाबू सिंह एमपी पुलिसट्रेनिंग में धार्मिक ग्रंथों को शामिल करने के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश के 8 पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में अब 4 हजार से ज्यादा नए कांस्टेबलों की ट्रेनिंग हो रही है। उन्होंने वहां रामचरितमानस और भगवद गीता का नियमित पाठ शुरू कराया है। जुलाई में उन्होंने रामचरितमानस का पाठ शुरू करने का आदेश दिया था क्योंकि कई रंगरूट घर की याद में परेशान हो रहे थे और पास के शहर में ट्रांसफर की मांग कर रहे थे।
सिंह ने उन्हें प्रभु राम के 14 साल के वनवास का उदाहरण दिया था और कहा था कि अगर राम पिता के वचन के लिए इतना सह सकते हैं, तो तुम देश सेवा के लिए 9 महीने की ट्रेनिंग क्यों नहीं? इस बात ने रंगरूटों को प्रेरित किया, और अब रामचरितमानस से त्याग, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सिखाई जाती है।
इसके बाद, नवंबर में कृष्ण का प्रिय महीना मार्गशीर्ष आते ही गीता का पाठ भी शुरू किया गया। सिंह कहते हैं कि गीता जीवन का सार है, क्योंकि यह धैर्य, संतुलन और संयम सिखाती है। पुलिस जैसी तनावपूर्ण नौकरी में ये चीजें बहुत जरूरी हैं ताकि हम निष्पक्ष रहकर अपना कर्तव्य निभा सकें और अपनी एकाग्रता को बढ़ा सकें। ये पहल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से मजबूत और तनावमुक्त बनाने के लिए है। सिंह का कहना है कि पुलिसिंग केवल शारीरिक और कानूनी ट्रेनिंग से नहीं जुड़ी है, बल्कि नैतिक मूल्यों से भी जुड़ी है।
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