ITI प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती में केंद्र-राज्य टकराव, CITS को लेकर एमपी सरकार कठघरे में

Sanjay Sharma | Feb 02, 2026, 18:34 IST
iti training officer recruitment
मध्य प्रदेश में आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के बीच CITS योग्यता को लेकर टकराव है। हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

News in Short

  • आईटीआई में भर्ती प्रक्रिया पर डीजीटी की गाइडलाइन की अनदेखी पर उठे सवाल।
  • प्रशिक्षण अधिकारी पद के लिए CITS को मध्य प्रदेश में भी अनिवार्य किया जाए।
  • बिना CITS आधारित भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
  • CITS और अनुभव के आधार पर बोनस अंक तय किए जाएं।
  • हाईकोर्ट के आगामी निर्णय के आधार पर तय होगी भर्ती की दिशा।

News in Details

BHOPAL. आईटीआई में प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती पर मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय प्रशिक्षण निदेशालय (डीजीटी) आमने-सामने आ गए हैं। केंद्र की तरफ से अनिवार्य की गई CITS (क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम) योग्यता को नजरअंदाज कर एमपी में 1123 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है।



वहीं इसी महीने यानी फरवरी में हाई कोर्ट में इससे संबंधित केस की अगली सुनवाई प्रस्तावित है। यदि अदालत ने डीजीटी की गाइडलाइन को मान्य किया, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया कानूनी संकट में फंस सकती है।



iti training officer recruitment


ये भी पढ़ें...हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के सर्विस मामलों में प्रशासनिक सिस्टम की कमी पर जताई चिंता



राज्य और केंद्र के नियमों में टकराव

केंद्र सरकार की अनुसूची-9 के प्रावधानों के अनुसार राज्य और केंद्र के नियमों में टकराव की स्थिति में केंद्र सरकार का नियम प्रभावी माना जाता है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि CITS को प्रशिक्षण अधिकारी पद के लिए अनिवार्य या प्राथमिकता देना जरूरी है।



ये भी पढ़ें...नर्मदा बचाओ आंदोलन: नावों पर निकले सैकड़ों लोग, सरकार के सामने रखी ये मांगें



अन्य राज्यों में लागू, एमपी में अनदेखी

CITS सर्टिफिकेट को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब में प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती में लागू किया गया है। इन राज्यों में CITS सर्टिफिकेटधारियों को प्राथमिकता, अतिरिक्त वेतन और वेटेज अंक दिए जा रहे हैं। इसके विपरीत मध्य प्रदेश में न तो अतिरिक्त अंक दिए जा रहे हैं और न ही डिग्री-डिप्लोमा धारियों से अलग वेतनमान तय किया गया है।



ये भी पढ़ें...बिना परीक्षा और इंटरव्यू के मिलेगी सरकारी नौकरी, बस करना होगा ये काम



भविष्य की गुणवत्ता पर सवाल

CITS न्यूनतम योग्यता के बाद किया जाने वाला एक विशेष और आधुनिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है। इसे आईटीआई में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। डीजीटी ने इसे अनिवार्य करने के निर्देश सभी राज्यों को जारी किए हैं।



गाइडलाइन के अनुसार, बिना CITS के प्रशिक्षक की भर्ती पर नियोक्ता को बाद में यह पाठ्यक्रम कराना अनिवार्य होता है। इससे मध्य प्रदेश सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।



iti training officer recruitment


भर्ती प्रक्रिया पर लटकी तलवार

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 1123 प्रशिक्षण अधिकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रूलबुक भी जारी हो चुकी है। CITS सर्टिफिकेटधारी अभ्यर्थियों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट ने आदेशों को मान्यता दी, तो भर्ती प्रक्रिया रद्द या स्थगित हो सकती है।



ये भी पढ़ें...सीमेंट प्लांट में नौकरी पाने के लिए सतना में उमड़े सैकड़ों बेरोजगार



अपने खर्च पर सर्टिफिकेट कराना मंजूर

कौशल विकास एवं प्रशिक्षण विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डीएस ठाकुर भी सीआईटीएस सर्टिफिकेट की एडवांस कोर्स मानते हैं। उनका कहना है केंद्रीय प्रशिक्षण निदेशालय की गाइडलाइन में इसे वैकल्पिक रखा गया है। मध्य प्रदेश के भर्ती नियम भी अलग हैं। फिलहाल यह प्रदेश में लागू नहीं है। भर्ती के बाद विभाग ही यह कोर्स कराता है।





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • केंद्र सरकार
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल
  • आईटीआई