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News in short
- मेधा पाटकर ने बड़वानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन का नेतृत्व किया।
- मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नाव रैली निकाली।
- प्रदूषण, अवैध रेत खनन और जलस्तर गिरने पर चिंता जताई।
- 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
- नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले में मछुआरों को अधिकार देने की मांग की।
News in Details
बड़वानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत मछुआरों ने प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व मेधा पाटकर ने किया। मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नाव रैली निकाली। रैली में 30 से अधिक नावों में सैकड़ों लोग थे। मछुआरों ने सरकार का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया। रैली के बाद कलेक्टर बड़वानी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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अवैध रेत खनन पर जताई चिंता
आंदोलनकारियों ने जलाशय में प्रदूषण और अवैध रेत खनन पर चिंता जताई। उन्होंने क्रूज संचालन और जलस्तर गिरने से मत्स्याखेट पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। मछुआरों को किसान का दर्जा देने की मांग की गई। केसीसी कार्ड उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग की गई। पुलिस-प्रशासन द्वारा उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की अपील की गई।
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आंदोलन की चेतावनी
मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं। उन्हें वर्षों बाद भी कानूनी अधिकार नहीं मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज होगा। इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर के मछुआरा परिवार शामिल हुए।
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10 सूत्रीय मांग को ज्ञापन दिया जाएगा
ज्ञापन के जरिए मछुआरों 10 प्रमुख मांगें रखी। मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले अनुसार अधिकार दिए जाएं। नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन संघ का पंजीकरण हो। पुनर्वास लाभ, आवास, आजीविका और मत्स्य व्यवसाय समितियों को सौंपे जाएं। ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए।
ये हैं मछुआरों की 10 मांगे
- सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले अनुसार पूर्ण अधिकार दिए जाएं।
- नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ का शीघ्र पंजीकरण किया जाए।
- विस्थापित मछुआरों को पूरा पुनर्वास लाभ प्रदान किया जाए।
- प्रभावित परिवारों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- मछुआरों की आजीविका की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य व्यवसाय सहकारी समितियों को सौंपा जाए।
- मत्स्याखेट में ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए।
- मछुआरों को किसान का दर्जा दिया जाए।
- मछुआरों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) की सुविधा दी जाए।
- मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाई जाए।
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मछुआरों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का दिया हवाला
आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला दिया। यह फैसला सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लाभ, हानि और पुनर्वास पर 10 साल बाद पारित हुआ था। यह निर्णय 18 अक्टूबर 2000 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार मान्य है। ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार, सरदार सरोवर जलाशय ( Sardar Sarovar dam ) में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन का है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने संबंधित मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था।
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