जबलपुर क्रूज हादसा: जांच आयोग में सनसनीखेज याचिका: लाइफ जैकेट-विंड मीटर नहीं, सबूत भी मिटाए!
समझें पूरा मामला...
- बरगी क्रूज हादसे की जांच के लिए आयोग के समक्ष विस्तृत याचिका दायर।
- याचिका में 14 मौतों को "मानव निर्मित त्रासदी" बताया गया।
- लाइफ जैकेट, विंड मीटर और प्रशिक्षित बचाव दल की अनुपस्थिति के आरोप।
- हादसे के बाद क्रूज को डिसमंटल कर सबूत मिटाने की आशंका जताई गई।
- मृतकों के परिजनों को मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।
जबलपुर क्रूज हादसा:बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 को हुए भीषण क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के मामले में जांच आयोग के समक्ष दायर की गई है। इस याचिका में राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, मौसम विभाग, एनडीआरएफ और क्रूज ऑपरेटर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि हादसे के बाद क्रूज को तोड़कर और इंजन हटाकर महत्वपूर्ण साक्ष्यों से भी छेड़छाड़ की गई।
हादसे को बताया मानव निर्मित त्रासदी
बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 को हुए क्रूज हादसे को लेकर जांच आयोग के समक्ष एक विस्तृत याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा या दैवीय घटना नहीं थी, बल्कि कई विभागों और अधिकारियों की सामूहिक विफलता का परिणाम थी।
याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने दावा किया है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, मौसम संबंधी चेतावनियों पर समय रहते कार्रवाई होती और आपदा प्रबंधन की तैयारी होती, तो 14 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
मौसम खराब था फिर भी चलाया क्रूज
याचिका में कहा गया है कि जिस दिन हादसा हुआ उस दिन तेज हवाओं और खराब मौसम की आशंका पहले से मौजूद थी। इसके बावजूद क्रूज संचालन को नहीं रोका गया।
सवाल उठाया गया है कि क्या भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कोई चेतावनी जारी की थी और यदि की थी तो क्या उसे पर्यटन विभाग, बरगी बांध प्राधिकरण और क्रूज संचालक तक समय पर पहुंचाया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद यात्रियों को जलाशय में भेजना अपने आप में गंभीर लापरवाही थी।
लाइफ जैकेट नहीं बांटी गईं, बचाव के इंतजाम भी नहीं थे
याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हादसे के समय यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों लोग सीधे पानी में जा गिरे।
इतना ही नहीं, क्रूज शुरू होने से पहले यात्रियों को किसी प्रकार की सुरक्षा ब्रीफिंग या आपातकालीन निर्देश भी नहीं दिए गए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यदि सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट दी गई होती तो मौतों की संख्या काफी कम हो सकती थी।
विंड मीटर नहीं होने से नहीं मिल सकी समय पर चेतावनी
याचिका में बरगी बांध सहित मध्य प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में विंड मीटर और मौसम निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति को भी हादसे का बड़ा कारण बताया गया है।
दावा किया गया है कि यदि जलाशय पर हवा की गति मापने वाले उपकरण लगे होते तो खतरे का आकलन समय रहते किया जा सकता था और क्रूज संचालन रोका जा सकता था। आयोग से मांग की गई है कि बरगी, भेड़ाघाट, ग्वारीघाट, भोपाल, मंडला सहित सभी प्रमुख जल निकायों में विंड मीटर लगाना अनिवार्य किया जाए।
बचाव अभियान पर भी उठाए गए सवाल
याचिका में यह भी कहा गया है कि हादसे के बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन पर्याप्त और प्रभावी नहीं था। कई शव पानी में तैरते हुए मिले, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या बचाव कार्य समय पर शुरू हुआ था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पर्यटन गतिविधियां नियमित रूप से संचालित होने के बावजूद घटनास्थल पर प्रशिक्षित बचाव दल और त्वरित प्रतिक्रिया टीम की व्यवस्था नहीं थी। एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
सबसे बड़ा आरोप- हादसे के बाद क्रूज को तोड़ दिया
पूरी याचिका का सबसे सनसनीखेज आरोप हादसे के बाद क्रूज जहाज को कथित रूप से डिसमंटल करने और उसका इंजन हटाने को लेकर है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना किसी फोरेंसिक जांच, विशेषज्ञ राय या न्यायालय की अनुमति के क्रूज को तोड़ दिया गया।
इससे हादसे के वास्तविक कारणों की जांच प्रभावित हो सकती है। याचिका में इसे प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ बताते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
फिटनेस सर्टिफिकेट, इंजन क्षमता की जांच की मांग
याचिका में आयोग से यह भी अनुरोध किया गया है कि क्रूज के फिटनेस सर्टिफिकेट, रखरखाव रिकॉर्ड, इंजन की क्षमता, चालक दल की योग्यता और जहाज की यात्री क्षमता की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए।
यह भी जांचने की मांग की गई है कि कहीं हादसे के समय क्रूज में निर्धारित सीमा से अधिक यात्री तो सवार नहीं थे। याचिकाकर्ता ने स्वतंत्र नौसेना इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के पैनल से जांच कराने की मांग रखी है।
परिजन को अब तक पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि भारी टिकट शुल्क वसूलने के बावजूद यात्रियों के लिए पर्याप्त बीमा व्यवस्था नहीं थी। साथ ही मृतकों के परिवारों और घायलों को अब तक समुचित मुआवजा नहीं मिला है।
आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह उचित मुआवजे की राशि तय कर राज्य सरकार और क्रूज ऑपरेटर को तत्काल भुगतान के निर्देश देने की सिफारिश करे।
15 बड़े सवालों के जवाब तलाशेगा आयोग
याचिका में आयोग के समक्ष 15 प्रमुख मुद्दे रखे गए हैं, जिनमें मौसम चेतावनी, क्रूज की फिटनेस, इंजन की क्षमता, लाइफ जैकेट की उपलब्धता, यात्री संख्या, चालक दल की योग्यता, रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रभावशीलता, विंड मीटर की अनुपस्थिति और सबूतों से कथित छेड़छाड़ जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं।
अब इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि बरगी क्रूज हादसा एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना था या फिर लापरवाही और प्रशासनिक विफलताओं से जन्मी एक ऐसी त्रासदी, जिसने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।
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