कंक्रीट बरसाने लगा 800 करोड़ का फ्लाईओवर, नीचे से गुजरना बना जानलेवा
News in short
- मंगलवार दोपहर फ्लाईओवर से गिरे कंक्रीट के बड़े टुकड़े।
- मौके पर अफरा-तफरी, लोगों की सतर्कता से टला हादसा।
- पहले भी उद्घाटन से पहले आई थीं दरारें।
- PWD ने “मौसम और एक्सपेंशन” बताया कारण।
- द सूत्र के कवरेज के बाद शुरू हुआ सुधार कार्य।
News in detail
800 करोड़ की लागत से बना जबलपुर फ्लाईओवर अब सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। मंगलवार को अचानक इससे कंक्रीट के बड़े टुकड़े गिरने लगे। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन निर्माण गुणवत्ता और PWD की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 'द सूत्र' की अधिकारियों से बात होने के बाद इसमें सुधार शुरू हुआ।
अचानक गिरने लगे कंक्रीट के टुकड़े
मध्यप्रदेश केजबलपुर में बना 800 करोड़ रुपए का फ्लाईओवर से मंगलवार दोपहर अचानक कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े गिरने लगे। नीचे से गुजर रहे लोगों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि आसपास मौजूद लोगों ने सतर्कता दिखाते हुए राहगीरों को तुरंत हटाया, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
ग्राउंड पर दिखी डरावनी हकीकत
जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो जमीन पर बिखरे भारी कंक्रीट के टुकड़े साफ नजर आ रहे थे। कुछ टुकड़े इतने बड़े थे कि उन्हें देखकर ही खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले हल्की झड़न हुई और फिर अचानक बड़े हिस्से टूटकर गिरने लगे, जिससे सभी सहम गए। हालांकि स्थानीय लोग कैमरे के सामने आने से बचते रहे।
उद्घाटन के पहले दरारें पर उठे थे सवाल
यह वही फ्लाईओवर है जिसमें पिछले साल उद्घाटन से पहले दरारें सामने आई थीं। उस समय विभाग ने जांच के बाद इसे “एक्सपेंशन” बताकर मामला शांत कर दिया था। लेकिन अब दोबारा कंक्रीट गिरने की घटना ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।
अफसरों ने मौसम को ठहराया जिम्मेदार
PWD ब्रिज डिवीजन के EE पटले से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन और मैसेज का जवाब नहीं दिया। वहीं EE शिवेंद्र सिंह ने इसे मौसम में बदलाव के कारण स्लज या “स्लरी” के झड़ने की घटना बताया।
आपको बता दें कि स्लज या स्लरी फीलिंग के लिए इस्तेमाल की गई सीमेंट का वह बचा हुआ हिस्सा होता है जो फीलिंग के बाद अतिरिक्त रह जाता है।
हालांकि, अधिकारी ने यह भी माना कि समय रहते चिपिंग का काम किया जाना चाहिए था, जो नहीं हो पाया। हालांकि, विजुअल में नजर आ रहे कंक्रीट के टुकड़ों को स्लरी कहना हास्यास्पद नजर आ रहा है।
कवरेज के बाद हरकत में आया विभाग
जैसे ही सूत्र की टीम ने मौके से रिपोर्टिंग शुरू की और अधिकारियों से बात की, कुछ ही देर में वहां मशीनें और कर्मचारी पहुंच गए। तुरंत मरम्मत और सुधार कार्य शुरू कर दिया गया।
इस दौरान इस तथा कथित स्लरी के इतने बड़े टुकड़े निकल गए जिन्हें चार लोग भी मिलकर नहीं उठा पाए। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर पहले ही निगरानी होती तो शायद यह स्थिति नहीं बनती।
सबसे बड़ा सवाल: कौन लेगा जिम्मेदारी?
फिलहाल विभाग इसे सामान्य “एक्सपेंशन” बताकर टाल रहा है, लेकिन करोड़ों की लागत से बने इस फ्लाईओवर की हालत लोगों में डर पैदा कर रही है। यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यह सवाल अब भी जवाब मांग रहा है।
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