जबलपुर हाईकोर्ट भ्रूण मामला: सुरक्षा में चूक पर 4 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी की बड़ी कार्रवाई
मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट भ्रूण मामला (Jabalpur High Court Fetus Case) ने न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मियों को निलंबित (Police Suspended) कर दिया है।
यह घटना सोमवार को सामने आई, जब एक व्यक्ति अपने बैग में भ्रूण लेकर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) परिसर में पहुंच गया। मामले की जानकारी मिलते ही कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। मंगलवार को जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय (SP Sampat Upadhyay) ने मामले की जांच के बाद सुरक्षा में लापरवाही मानते हुए एक एएसआई और तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मी निलंबित
जांच के बाद पुलिस प्रशासन ने जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की है, उनमें शामिल हैं:
- एएसआई मुन्ना अहिरवार
- हेड कांस्टेबल ब्रह्मदत्त खत्री
- हेड कांस्टेबल अरुण उपाध्याय
- कांस्टेबल प्रतीक सोनकर
ये सभी पुलिसकर्मी हाईकोर्ट सुरक्षा (High Court Security) ड्यूटी में तैनात थे। आरोप है कि सुरक्षा जांच के दौरान उन्होंने पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती, जिसके कारण एक व्यक्ति बैग में भ्रूण लेकर कोर्ट परिसर में प्रवेश कर गया।
गेट नंबर 6 से बैग लेकर कोर्ट परिसर में पहुंचा व्यक्ति
पुलिस के अनुसार रीवा जिले के बैकुंठपुर निवासी दयाशंकर पांडे (Dayashankar Pandey) सोमवार को गेट नंबर 6 से हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश किया। उसके बैग में कुछ दस्तावेजों के साथ भ्रूण भी रखा हुआ था। जैसे ही यह बात सामने आई, पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच शुरू कर दी गई।
खुद ही अपने केस की पैरवी करने पहुंचा था दयाशंकर
जानकारी के मुताबिक दयाशंकर पांडे ने पुलिस कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में याचिका (High Court Petition) दायर की थी। सोमवार को उसी मामले में सुनवाई थी और वह खुद ही अपनी पैरवी करने कोर्ट पहुंचा था। लेकिन कोर्ट में प्रवेश के दौरान उसके बैग में भ्रूण मिलने की जानकारी सामने आते ही मामला गंभीर बन गया और प्रशासन हरकत में आ गया।
पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप
दयाशंकर पांडे का आरोप है कि उसके और उसके परिवार पर कई बार हमले किए गए। उसने इन घटनाओं की शिकायत रीवा पुलिस (Rewa Police) से की थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी कारण उसने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दयाशंकर के आरोप
- परिवार पर कई बार हमला
- पुलिस को शिकायत दी
- कार्रवाई नहीं होने का आरोप
- हाईकोर्ट में याचिका दायर
2024 में निर्दलीय चुनाव लड़ने का दावा
दयाशंकर पांडे ने यह भी दावा किया है कि उसने 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव (Independent Election Candidate) निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़े थे। उसका कहना है कि चुनाव हारने के बाद से उसके खिलाफ साजिश रची जा रही है और उस पर हमले किए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है।
सड़क हादसे के बाद पत्नी का गर्भपात
दयाशंकर के मुताबिक 1 मार्च को वह अपनी पत्नी और चार साल की बेटी के साथ बाइक से जा रहा था। इस दौरान एक बिना नंबर की कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में उसकी पत्नी घायल हो गई। बाद में 8 मार्च को उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे का मिसकैरेज (Miscarriage) हो गया। दयाशंकर का दावा है कि इसी भ्रूण को लेकर वह हाईकोर्ट पहुंचा था ताकि न्यायालय के सामने अपना पक्ष रख सके।
हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद हाईकोर्ट सुरक्षा व्यवस्था (High Court Security System) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा जांच बेहद कड़ी होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैग में ऐसी संवेदनशील चीज लेकर आसानी से परिसर में प्रवेश कर सकता है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक मानी जाएगी। घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में और पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
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