जबलपुर में शराब ठेकों की नीलामी अटकी, ठेकेदारों की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस

Neel Tiwari | Mar 12, 2026, 19:22 IST
jabalpur liquor licence
जबलपुर में आबकारी विभाग की शराब दुकानों की नीलामी इस बार उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रही है। कई समूहों की दुकानों पर ठेकेदारों ने बोली ही नहीं लगाई, जिससे पूरी प्रक्रिया अटक गई है।

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  • जबलपुर में शराब दुकानों के कई समूहों की नीलामी में बोली नहीं लगी।
  • ठेकेदारों का आरोप- आधिकारिक खर्च के अलावा भारी अवैध वसूली का दबाव।
  • जिले में शराब दुकानों को 36 समूहों में बांटकर नीलामी प्रक्रिया की जा रही है।
  • अब तक सिर्फ 7 समूहों का ही ठेका आवंटित, बाकी 29 समूह खाली।
  • प्रशासन अब दोबारा नीलामी कर प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में है।

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जबलपुर में शराब ठेकों की नीलामी में सन्नाटा

जबलपुर में वर्ष 2026–27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया इस बार सामान्य नहीं दिख रही है। आबकारी विभाग ने शहर और जिले की दुकानों को अलग-अलग समूहों में बांटकर नीलामी शुरू की, लेकिन कई समूहों में ठेकेदारों ने बोली लगाने से ही परहेज कर लिया। इससे पूरी प्रक्रिया अधर में लटक गई है और विभाग को दोबारा रणनीति बनानी पड़ रही है।



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नई नीति नहीं, अवैध वसूली से घबराए ठेकेदार

सूत्रों के मुताबिक ठेकेदारों की असली चिंता नई आबकारी नीति नहीं बल्कि कथित अवैध वसूली है। बताया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों और अन्य स्तरों पर तय कमीशन के कारण खर्च काफी बढ़ जाता है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि इस तरह के अतिरिक्त भुगतान करने पड़ें तो कारोबार लाभदायक नहीं रह जाता, इसलिए कई समूहों में किसी ने बोली ही नहीं लगाई।



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36 समूहों में बांटी गईं दुकानें

जबलपुर जिले की शराब दुकानों को इस बार 36 समूहों में विभाजित किया गया है। लेकिन अभी तक हुई नीलामी में केवल 7 समूहों की दुकानों का ही ठेका तय हो पाया है, जबकि 29 समूहों के लिए कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। इससे विभाग की योजना और राजस्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं।



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कुछ समूहों में लगी बड़ी बोली

जिन समूहों में बोली लगी, वहां प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिली। गोरखपुर समूह के लिए आरक्षित मूल्य से अधिक बोली लगी और यह ठेका करीब 49 करोड़ 71 लाख रुपए में तय हुआ। वहीं बिलहरी समूह का ठेका लगभग 26 करोड़ रुपये में गया, जबकि नगर समूह लगभग 19 करोड़ 85 लाख रुपए में आवंटित हुआ। इन बोलियों ने यह संकेत दिया कि जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं वहां ठेकेदार अभी भी निवेश करने को तैयार हैं।



शहपुरा और कुंडम समूह में भी हुई नीलामी

5 मार्च को हुई नीलामी में शहपुरा समूह का ठेका लगभग 38 करोड़ 44 लाख रुपए में दिया गया। इसी तरह कुंडम समूह में भी बोली लगाई गई और यह ठेका करीब 10 करोड़ 92 लाख रुपए में आवंटित हुआ। इन समूहों में कई दुकानों को मिलाकर ठेका दिया गया है।



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अब दोबारा नीलामी की तैयारी

कई समूहों में बोली न लगने से आबकारी विभाग के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। अधिकारी अब बची हुई दुकानों के लिए दोबारा नीलामी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि परिस्थितियां नहीं बदलीं तो विभाग को नीलामी की शर्तों में भी बदलाव करना पड़ सकता है।



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