पूर्व महापौर विवाद मामले में पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR खारिज, STF जांच में प्रभात साहू समेत 5 आरोपी साबित
News in short
- हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR को किया खारिज।
- STF ने बताया पुलिसकर्मियों पर धाराएं तथ्यहीन, पेश की खात्मा रिपोर्ट।
- प्रभात साहू समेत 5 आरोपी जांच में सही पाए गए।
- सीलबंद लिफाफे खुलने के बाद सच आया सामने।
- राजनीतिक दबाव कानून से ऊपर नहीं: HC।
News in detail
जबलपुर के चर्चित पुलिस और पूर्व महापौर विवाद में सूत्र की खबर सही साबित हुई। हाईकोर्ट में STF जांच के सील बंद लिफाफे खोलने के बाद यह सामने आया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित पांच लोगों को मामले में आरोपी बना दिया गया है। वहीं यह जानकारी भी सामने आई कि STF ने पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR को झूठा मानते हुए खारिज कर दिया है।
तथ्यहीन था पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामला
गुरुवार 2 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे अहम राहत पुलिसकर्मियों को दी, जिनके खिलाफ पहले FIR दर्ज की गई थी। कोर्ट के समक्ष STF की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामला तथ्यहीन था, जिसके चलते उसे खारिज कर दिया गया।
झूठी FIR का पर्दाफाश, पुलिसकर्मियों को राहत
STF की विस्तृत जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप ठोस साक्ष्यों पर आधारित नहीं थे। जांच में पाया गया कि उनके खिलाफ लगाई गई धाराएं केवल दबाव में दर्ज की गई थीं। इसी आधार पर STF ने इस हिस्से में खात्मा रिपोर्ट पेश की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी।
लिफाफे खुलते ही सामने आया असली आरोपी
'द सूत्र' ने प्रभात साहू के ऊपर हुई कार्यवाही की जानकारी पहले ही दे दी थी। कोर्ट में जब STF द्वारा पेश किए गए सीलबंद लिफाफे खोले गए, तो यह स्पष्ट हो गया कि इस पूरे मामले में पूर्व महापौर प्रभात साहू और अन्य चार लोग ही आरोपी हैं।
STF ने अपनी जांच में इनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया है, जिससे यह साबित हो गया कि शुरुआत में जो “अज्ञात” का खेल खेला गया था, वह पूरी तरह गलत था।
5 आरोपियों पर पहले ही दर्ज हो चुका है मामला
गौरतलब है कि STF द्वारा 23 अप्रैल 2026 को ही प्रभात साहू, शुभम अवस्थी, महेंद्र रैकवार, विजय सोनी और अभिनंदन जायसवाल के खिलाफ BNS 2023 और मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर चालान पेश किया जा चुका है। STF की जांच और कोर्ट में हुए खुलासे के बाद अब इन आरोपों को और मजबूती मिल गई है।
कानून से ऊपर कोई नहीं: अधिवक्ता मोहित वर्मा
इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता मोहित वर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला एक स्पष्ट संदेश देता है कि राजनीतिक दबाव कानून के ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने रसूख के दम पर कानून को तोड़ने की कोशिश करते हैं, उन्हें किसी भी हालत में संरक्षण नहीं मिलेगा।
राजनीतिक दबाव पर कोर्ट का सख्त रुख
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने रुख से यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे मामला कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा क्यों न हो, न्याय प्रक्रिया में किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था और न्याय प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
पूरा घटनाक्रम: एक नजर में टाइमलाइन
18 सितंबर 2025
हेलमेट चेकिंग के दौरान पूर्व महापौर प्रभात साहू को रोका गया, विवाद बढ़ा और पुलिसकर्मियों से अभद्रता व मारपीट के आरोप लगे।
घटना के बाद
पुलिस ने दबाव में पुलिसकर्मी के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की, जबकि आरोपियों को “अज्ञात” रखा गया।
15 अक्टूबर 2025 जनहित याचिका दायर
अधिवक्ता मोहित वर्मा ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
20 जनवरी 2026 हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
कोर्ट ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए मामला STF को सौंप दिया।
23 मार्च 2026
STF ने लोअर कोर्ट में पेश किया प्रभात साहू के खिलाफ चालान
24 मार्च 2026
STF ने हाईकोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की।
2 अप्रैल 2026
हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे खुलने के बाद पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR खारिज, जबकि प्रभात साहू समेत 5 आरोपी साबित।
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