जिस पुलिसकर्मी के साथ नेताओं ने किया दुर्व्यवहार उस पर ही FIR, थाना प्रभारी तलब, एसपी और प्रभात साहू को नोटिस

जबलपुर में पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा के पूर्व महापौर प्रभात साहू द्वारा पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ने और गाली-गलौज के बावजूद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था।

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Neel Tiwari
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जबलपुर से एक राजनीतिक दबाव का मामला सामने आया था, जिसमें भाजपा के पूर्व महापौर ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वाहन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी से हाथापाई की थी। उसकी वर्दी तक फाड़ दी। इसके बाद भी पुलिस पर दबाव डालकर पुलिसकर्मी के खिलाफ ही नामजद FIR दर्ज कर दी गई।

हालांकि, पुलिसकर्मी की शिकायत पर नेताओं के खिलाफ अज्ञात में मामला दर्ज किया गया। जबलपुर के अधिवक्ता मोहित वर्मा ने इस मामले को जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट में पहुंचाया। हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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क्या है पूरा मामला

जबलपुर में भाजपा नेता प्रभात साहू और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी की थी। इस मामले में शहर के वकील मोहित वर्मा ने याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा कि शहर में आम लोगों के लिए तो नियम हैं, लेकिन नेताओं के लिए कोई नियम नहीं है। कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों को देखने के बाद कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

कुछ महीने पहले, 18 सितंबर 2025 को, जब प्रभात साहू को हेलमेट चेकिंग के दौरान रोका गया, तो उन्होंने अपने समर्थकों के साथ हंगामा कर दिया था। इस घटना के वीडियो भी वायरल हुए थे, जिसमें पूर्व महापौर साहू पुलिसकर्मियों को गालियां देते हुए नजर आए थे। वो पुलिसकर्मियों से भिड़ते हुए उनके कपड़े तक फाड़ रहे थे। उस वक्त भाजपा के कार्यकर्ता, क्षेत्रीय विधायक और सांसद भी मौके पर पहुंच गए। दबाव के चलते पुलिस ने उस पुलिसकर्मी के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया, जिसने अपनी ड्यूटी निभाई थी।

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पुलिस कर्मियों के खिलाफ की गई FIR

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यहां हैरानी की बात यह थी कि जब पुलिसकर्मी ने शिकायत की, तो उसकी शिकायत में यह साफ लिखा थाकि महापौर प्रभात साहू एवं अन्य ने उसके साथ मारपीट की। लेकिन पुलिस ने यह FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ कायम की। वीडियो वायरल होने और आरोपियों की पूरी जानकारी होने के बाद भी पुलिस उनका नाम तक लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी।

कौन है यह थाना प्रभारी जिसके थाने में पुलिस नहीं सुरक्षित 

हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मोहित वर्मा के द्वारा फाइल किए गए दस्तावेजों में जब दोनों FIR देखीं तो जज भी हैरान रह गए। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए पूछा की कौन है यह थाना प्रभारी जिसके थाने में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं है। क्या वहां अपने पद पर बने रहने के लायक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे हालातो में पुलिसकर्मी कैसे अपनी ड्यूटी निभाएंगे और ऐसे मामले पूरे पुलिस विभाग का मॉराल डाउन करते हैं।

पुलिस कर्मी की फाड़ी वर्दी फिर भी आरोपी अज्ञात 

पुलिस कर्मी की शिकायत में यह साफ लिखा हुआ था कि उसके साथ बदसलूकी किन लोगों ने की है। उसके बाद भी FIR में किसी भी नेता या कार्यकर्ता का नाम दर्ज नहीं किया गया। अज्ञात में FIR दर्ज की गईं। 

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पुलिस कर्मी ने शिकायत में साफ दिए नाम लेकिन FIR अज्ञात के नाम

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थाना प्रभारी तलब, SP और प्रभात साहू को नोटिस 

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने इस मामले में हैरानी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई में थाना प्रभारी खुद कोर्ट में मौजूद होगा और दोनों FIR की केस डायरी कोर्ट के सामने पेश करनी होगी। इसके साथ ही जबलपुर के पुलिस अधीक्षक और पूर्व महापौर प्रभात साहू को भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

हाईकोर्ट के रुख ने आज यह तो साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भाजपा के पूर्व महापौर प्रभात साहू की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अगली सुनवाई में लॉर्ड गंज के थाना प्रभारी कोर्ट में खुद उपस्थित होकर सफाई देंगे। इस तरह की गलत कार्यवाही के चलते जबलपुर के पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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