56 लाख खर्च... फिर भी जबलपुर का एक भी संजीवनी क्लिनिक सर्टिफाइड नहीं
News In Short
- NHM ने 58 संजीवनी क्लीनिकों के लिए 58 लाख रुपए जारी किए थे।
- 56.98 लाख खर्च होने के बावजूद एक भी क्लीनिक NQAS प्रमाणित नहीं हुआ।
- CMHO डॉ. नवीन कोठारी समेत चार अधिकारियों को नोटिस जारी।
- 15 दिन में जवाब नहीं देने पर रिकवरी की कार्रवाई की चेतावनी।
- पूर्व CMHO संजय मिश्रा के कार्यकाल का मामला।
News in detail
जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राशि के उपयोग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 58 संजीवनी क्लीनिकों के NQAS प्रमाणीकरण के लिए जारी 58 लाख रुपए में से 56.98 लाख खर्च हो गए। लेकिन एक भी क्लीनिक का प्रमाणन नहीं हो सका। अब CMHO समेत चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया है।
करोड़ों के स्वास्थ्य बजट पर फिर उठे सवाल
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग फिर विवादों में आ गया है। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राशि जांच के घेरे में है। शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में खर्च पर सवाल बढ़े। लाखों रुपए खर्च होने के दावे किए गए। धरातल पर परिणाम नहीं दिखाई दिए। विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। सरकारी फाइलों में विकास अक्सर बहुत स्वस्थ दिखता है। जमीन पर मरीज अलग कहानी बताते हैं।
एक भी क्लीनिक प्रमाणित नहीं
वर्ष 2025-26 में राशि आवंटित की गई थी। 58 संजीवनी क्लीनिकों के लिए बजट जारी हुआ। प्रत्येक संस्था को एक लाख रुपए मिले। कुल 58 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। विभाग ने खर्च का दावा भी किया। 56 लाख 98 हजार रुपए खर्च बताए गए। राज्य स्तरीय समीक्षा में गंभीर तथ्य सामने आए। एक भी संस्था का प्रमाणीकरण नहीं कराया गया। गुणवत्ता मानकों की तैयारी भी अधूरी मिली। कागजों में सुधार पूरा था। जमीन पर व्यवस्था अभी निर्माणाधीन निकली।
चार अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
मामला सामने आने के बाद नोटिस जारी हुए हैं। कई अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। कार्य में लापरवाही की बात कही गई। 15 दिन में स्पष्टीकरण देने निर्देश मिले। प्रमाणीकरण नहीं होने पर सवाल उठाए गए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई होगी। राशि वसूली की चेतावनी भी दी गई। सरकारी तंत्र में जवाब अक्सर देर से आता है। नोटिस पहले पहुंच जाता है।
CMHO ने दी सफाई
वर्तमान सीएमएचओ ने खुद को मामले से अलग बताया। डॉ. नवीन कोठारी ने पदभार तारीख बताई। उन्होंने पूर्व कार्यकाल का हवाला दिया। क्लीनिकों की संख्या पर भी सवाल उठाए। नोटिस में 58 क्लीनिक दर्ज बताए गए। जिले में 42 क्लीनिक संचालित होने का दावा किया। नोटिस की भाषा पर भी आपत्ति जताई गई। स्वास्थ्य विभाग में विवाद के बाद हलचल बढ़ी। अब अधिकारियों के जवाब पर नजर टिकी है। सरकारी फाइलों में आंकड़े भी कभी इलाज मांगने लगते हैं।
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