कान्हा नेशनल पार्क में आठ बाघों की मौत मचा हड़कंप, हाई कोर्ट ने वन विभाग से मांगा जवाब
Anjali Dwivedi | May 30, 2026, 14:25 IST
kanha national park
कान्हा नेशनल पार्क में एक महीने में आठ बाघों की मौत से हड़कंप मच गया है। वन्यजीव प्रेमियों की याचिका पर जबलपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वन विभाग और टाइगर रिजर्व टीम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- कान्हा नेशनल पार्क में महज एक महीने में आठ बाघों की जान चली गई है।
- बाघों की मौत की वजह एक खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को माना जा रहा है।
- वन्यजीव प्रेमियों ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाकर हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
- जबलपुर हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से जवाब मांगा है।
- दमोह के सिंग्रामपुर कोर एरिया में एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना भी खटाई में पड़ी है।
बाघों की सुरक्षा को लेकर अब सरकारी दावों पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले के सामने आने के बाद पार्क प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। हर कोई यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर चूक कहां हुई। देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इस नेशनल पार्क में ऐसा होना चिंताजनक है।
बाघों की मौत का कारण क्या है
इसके बाद भी मौतों का यह सिलसिला थमा नहीं। बीते 19 मई को एक और युवा नर बाघ टी-220 की भी दर्दनाक मौत हो गई। इसकी मौत का कारण भी इसी खतरनाक वायरस को माना जा रहा है। इसी दौरान बालाघाट और किसली के जंगलों में दो और वयस्क नर बाघ मृत पाए गए थे।
नियमों की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त
लापरवाही की वजह से ही पार्क में बाघों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले पर जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस एके निरंकारी की बेंच ने सुनवाई की। उन्होंने कोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए वन अमले को तुरंत नोटिस जारी कर दिया।
कोर्ट ने वन विभाग से मांगा जवाब
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख तय की है। तब तक वन विभाग को अपनी तरफ से किए गए सभी उपचारों की जानकारी देनी होगी। वन्यजीव प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि कोर्ट के दखल के बाद व्यवस्था में सुधार होगा।
दमोह में एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव अटका
बाघों के घर को सुरक्षित रखने के लिए वन अमले ने इस विशेष कॉरिडोर पर सहमति दी थी। लेकिन अब इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की फाइल भोपाल के दफ्तरों में अटक गई है। फाइल आगे न बढ़ने के कारण कॉरिडोर की पूरी योजना अधर में लटकती दिख रही है।
कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत का विवरण
| मृत बाघ / शावक का नाम | मौत का समय | मौत का संभावित कारण |
| बाघिन टी-122 और चार शावक | अप्रैल महीना | कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) |
| बाघिन टी-141 | अप्रैल महीना | कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) |
| युवा नर बाघ टी-220 | 19 मई | संदिग्ध वायरस संक्रमण |
| दो वयस्क नर बाघ (बालाघाट/किसली) | मई महीना | संदिग्ध बीमारी और संक्रमण |
FAQ
- कान्हा नेशनल पार्क में एक महीने में कितने बाघों की मौत हुई है और इसका क्या कारण है?
कान्हा नेशनल पार्क में महज एक महीने के भीतर आठ बाघों की मौत दर्ज की गई है। इसमें वयस्क बाघों के साथ-साथ छोटे शावक भी शामिल हैं। शुरुआती जांच और रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी बाघों की मौत का मुख्य कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) को माना जा रहा है। यह एक बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरस है जो वन्यजीवों में तेजी से फैलता है।
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