कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा: मादा बाघ शावक की मौत, वायरस से मरने वाले बाघों की संख्या नौ हुई
Arohi Raj | Oct 19, 2026, 16:17 IST
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा रिजर्व में मौत का सिलसिला लगातार जारी है।
मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा बना हुआ है। बता दें 18 अक्टूबर को इस संक्रमण की आशंका के बीच एक मादा बाघ शावक की मौत हो गई। शावक का इलाज मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में चल रहा था। इसे 8 अक्टूबर को अरौली गांव से रेस्क्यू किया गया था।
इसके साथ ही कान्हा में सीडीवी से मरने वाले बाघों की संख्या नौ हो गई है।
वन विभाग की टीम ने 8 अक्टूबर को मादा शावक को रेस्क्यू किया था। यह शावक वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट क्षेत्र में मिला था। अरौली गांव के पास उसकी हालत काफी कमजोर थी। इसके बाद टीम उसे मुक्की के वन्यजीव उपचार केंद्र ले गई। यहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया। हालांकि, उपचार के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई।
प्रोटोकॉल के अनुसार, मौत के बाद शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसकी मौत की वजह सीडीवी संक्रमण माना जा रहा है।
इस शावक से जुड़ी घटना 7 अक्टूबर की रात हुई थी। खटिया रेंज की मोहगांव बीट के अरौली गांव में यह घटना हुई। वहां रमली बाई मरावी (50) नाम की एक महिला पर शावक ने हमला किया था।
हमले के अगले दिन वन विभाग की टीम ने हाथियों की मदद से उसे खोज निकाला। उस समय शावक की हालत कमजोर थी। इसके बाद उसे रेस्क्यू करके मुक्की के उपचार केंद्र पहुंचाया गया। यहां उसका इलाज किया जा रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। यह संक्रमण खासकर बाघों और अन्य कार्निवोरस एनिमल को प्रभावित कर सकता है। कान्हा टाइगर रिजर्व में इस वायरस से अब तक नौ बाघों की मौत हो चुकी है।
मादा शावक की मौत से वन विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। अब वन्यजीवों की निगरानी और संक्रमण से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है। संक्रमण को रोकने के लिए समय पर पहचान और उपचार भी अहम हैं।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (Canine Distemper Virus) एक बेहद संक्रामक वायरस है। यह कुत्तों के साथ बाघ, तेंदुए और दूसरे जंगली कार्निवोरस एनिमल को भी संक्रमित कर सकता है। यह वायरस जानवरों के सांस लेने, पाचन और नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकता है। गंभीर मामलों में जानवर की मौत भी हो सकती है।
इस वायरस को खत्म करने वाली कोई स्पेशलाइज्ड मेडिसिन उपलब्ध नहीं है। संक्रमित जानवर को लक्षणों के अनुसार इलाज और देखभाल दी जाती है। बचाव के लिए पालतू कुत्तों का टीकाकरण और संक्रमित जानवरों की पहचान जरूरी है।
FAQs
कमजोर हालत में मिला था शावक
प्रोटोकॉल के अनुसार, मौत के बाद शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसकी मौत की वजह सीडीवी संक्रमण माना जा रहा है।
आंगन में सो रही महिला पर किया था हमला
हमले के अगले दिन वन विभाग की टीम ने हाथियों की मदद से उसे खोज निकाला। उस समय शावक की हालत कमजोर थी। इसके बाद उसे रेस्क्यू करके मुक्की के उपचार केंद्र पहुंचाया गया। यहां उसका इलाज किया जा रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
कान्हा में सीडीवी संक्रमण बना चुनौती
मादा शावक की मौत से वन विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। अब वन्यजीवों की निगरानी और संक्रमण से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है। संक्रमण को रोकने के लिए समय पर पहचान और उपचार भी अहम हैं।
कैनाइन डिस्टेंपर क्या है?
वायरस जानवरों को कैसे प्रभावित करता है?
- संक्रमण कैसे फैलता है?
- क्या लक्षण दिखाई देते हैं?
- बाघों के लिए यह कितना खतरनाक है?
क्या इसका इलाज संभव है?
FAQs
- कान्हा में सीडीवी से कितने बाघों की मौत हुई है?
कान्हा में सीडीवी से अब तक नौ बाघों की मौत हो चुकी है। - कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) क्या है और यह जानवरों को कैसे प्रभावित करता है?
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक वायरस है, जो बाघों, तेंदुओं और अन्य जंगली कार्निवोरस जानवरों को प्रभावित कर सकता है। यह जानवरों के सांस लेने, पाचन और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, और गंभीर मामलों में मौत का कारण बन सकता है। - सीडीवी संक्रमण के लक्षण क्या होते हैं?
सीडीवी संक्रमण के लक्षणों में बुखार, आंखों और नाक से पानी आना, सांस लेने में परेशानी, उल्टी और दस्त शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में भ्रम, लड़खड़ाना और दौरे पड़ने जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।
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