कटनी के सरपंच राम सहाय ने 25 लाख के निजी खर्च से बनाया स्विमिंग पूल जैसा मॉडर्न तालाब
Katni News. मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक सरपंच ने समाज सेवा की एक अनोखी कहानी आई है। अक्सर लोग विकास कार्यों के लिए सरकारी बजट का रास्ता देखते रहते हैं। लेकिन सरपंच राम सहाय बेन ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया।
उन्होंने अपनी निजी जमीन और खुद के पैसों से गांव के लिए तालाब बनाया। यह तालाब अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। सरपंच का यह नेक काम सोशल मीडिया पर भी खूब पसंद किया जा रहा है।
सरपंच ने खुद के पैसे से बनवाया तालाब
राम सहाय बेन पेशे से एक जन स्वास्थ्य रक्षक के रूप में काम करते हैं। उन्होंने अपने गांव के लिए कुछ बड़ा करने का एक सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने में उन्हें लगभग 10 साल का लंबा समय लगा।
उन्होंने अपनी निजी भूमि पर करीब 25 लाख रुपए खर्च किए हैं। लगभग आधा एकड़ में फैला यह तालाब 10 फीट गहरा बनाया गया है। इसकी खूबसूरती किसी आलीशान स्विमिंग पूल से कम नजर नहीं आती है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस है तालाब
सरपंच ने इसे केवल एक साधारण गड्ढे जैसा तालाब नहीं रहने दिया। उन्होंने इसे एक आधुनिक स्वरूप देने के लिए बहुत मेहनत की है। रात के समय इस सरोवर की सुंदरता देखने लायक होती है।
यहां चारों तरफ आकर्षक लाइटिंग की बहुत ही सुंदर व्यवस्था की गई है। तालाब तक पहुंचने के लिए सरपंच ने अपनी जमीन पर सड़क भी बनवाई। इससे ग्रामीणों को यहाँ आने-जाने में कोई भी परेशानी नहीं होती है।
आधे गांव को मिल रहा है साफ पानी
यह तालाब केवल नहाने या मनोरंजन के लिए ही नहीं बनाया गया है। यह गांव की पानी की बड़ी किल्लत को भी दूर कर रहा है। सरपंच ने यहां काफी सोच-समझकर काम किया है।
परिसर में सरपंच ने अपने निजी खर्च पर दो बोरिंग कराई हैं। यहां से पाइपलाइन के जरिए आधे गांव में पानी भेजा जाता है। भीषण गर्मी के समय में ग्रामीणों को यहाँ से मुफ्त पानी मिलता है।
मनोरंजन का केंद्र बना यह तालाब
खाम्ह गांव के लोग अब इस तालाब का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। यहां ग्रामीण सुबह और शाम को स्नान करने के लिए आते हैं। यह जगह अब एक पिकनिक स्पॉट बन चुकी है।
गांव के बच्चे यहां स्विमिंग पूल की तरह तैराकी का आनंद लेते हैं। युवाओं के लिए यह तैराकी का अभ्यास करने का बेहतरीन केंद्र है। सरपंच की इस निस्वार्थ भावना ने गांव को नई पहचान दी है।
सरपंच का यह प्रयास दूसरों के लिए प्रेरणा
राम सहाय बेन का कहना है कि परिवार के लिए तो सब करते हैं। लेकिन असली खुशी समाज के लिए कुछ अच्छा करने में ही मिलती है। उनके विचार आज के नेताओं के लिए एक बड़ी सीख हैं।
वे चाहते थे कि गांव में उनकी कोई ऐसी याद हमेशा रहे। उनके इस कदम ने सिद्ध किया कि इच्छाशक्ति हो तो सब मुमकिन है। संसाधनों की कमी कभी भी आपके नेक काम को नहीं रोक सकती।
आज कटनी जिले के अन्य जनप्रतिनिधि भी इसे एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। यह कहानी सिखाती है कि सेवा के लिए केवल सरकारी बजट काफी नहीं। मन में लगन हो तो गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।
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