Kishore Kumar Special: दूध-जलेबी और खंडवा का प्यार, जानें क्यों हर महफिल में रंग जमाते थे किशोर कुमार
Kaushiki | Oct 13, 2026, 10:08 IST
किशोर कुमार की लाइफ स्टोरी
किशोर कुमार की सुरीली आवाज और उनका मस्तमौला अंदाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। उनकी जिंदगी से जुड़े कई मजेदार किस्से भी मशहूर हैं। कहा जाता है कि फिल्म आनंद में काम करने से बचने के लिए उन्होंने अपना सिर तक मुंडवा लिया था। आज 13 अक्टूबर को किशोर दा की पुण्यतिथि है। आइए जानते हैं सुरों के बादशाह किशोर कुमार के दिलचस्प किस्से।
4 अगस्त 1929 को जन्मे आभास कुमार गांगुली यानी हमारे प्यारे किशोर दा ने संगीत का कोई बड़ा पाठ नहीं पढ़ा था। उनके पास सिर्फ ईश्वरीय वरदान और मस्ती भरा दिल था। कभी चाय का नाटक करके गानों की रिकॉर्डिंग रुकवा देना, तो कभी अपनी ही फिल्म का डायरेक्टर कौन है यह भूल जाना। किशोर दा की हर शरारत में एक अलग ही मासूमियत थी।
आज भी जब रेडियो पर उनका गाना बजता है, तो दिल मुस्कुरा उठता है। इमरजेंसी के दौर में जब उनके गानों पर ऑफिशियल बैन लगा, तब भी वे परेशान नहीं हुए। वे अपनी मस्ती में कन्याकुमारी घूमने चले गए।
किशोर दा ने 13 अक्टूबर 1987 को जब मुंबई में अपनी अंतिम सांसें लीं, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया था। आइए इनकी पुण्यतिथि पर जानें इस महान हरफनमौला कलाकार के जीवन के ऐसे ही कुछ चटपटे, अनदेखे और दिलचस्प किस्से, जिन्हें पढ़कर आपकी हंसी छूट जाएगी।
Kishore Kumar की संगीतमय शुरुआत
बिना ट्रेनिंग के बने देश के नंबर वन सिंगर
फिल्म आनंद से बचने को हुए थे गंजे
गुलजार ने अपनी किताब में एक मजेदार किस्सा लिखा है। किशोर कुमार के घर में एक अलमारी थी। उस अलमारी के पीछे सीक्रेट सीढ़ी बनी थी। जब कोई नापसंद मेहमान घर आता, तो वे बहाना बनाते। वे अलमारी खोलते और सीढ़ी से गायब हो जाते। सामने वाला इंसान बस देखता रह जाता था।
चाय का नाटक और रिकॉर्डिंग का किस्सा
एक बार अपनी ही फिल्म के सेट पर वे नाराज हो गए। वे यूनिट पर खर्चा बढ़ाने का आरोप लगाने लगे। उन्होंने पूछा, 'कौन है ये बेवकूफ डायरेक्टर?' टीम के लोगों ने डरते-डरते कहा, 'सर, आप ही तो डायरेक्टर हैं!' यह सुनते ही किशोर दा जोर से हंसे और बोले, 'अच्छा, हां! मैं ही तो हूं।'
मसूर की दाल देखी तो चले गए मसूरी
फिल्म 'पड़ोसन' का गाना 'एक चतुर नार करके सिंगार' बहुत फेमस हुआ। इसकी रिकॉर्डिंग में पूरे 12 घंटे लगे थे। इस दौरान तीन घंटे तो पूरी टीम हंसती ही रही। किशोर दा की मजाकिया बातों से मन्ना डे और बाकी संगीतकारों के पेट में दर्द हो गया था।
1976 में जब गानों पर लगा ऑफिशियल बैन
गानों पर बैन लगने से कोई भी सिंगर टूट जाता। मगर किशोर कुमार मस्तराम थे। वे सीधे केप कोमोरिन (कन्याकुमारी) चले गए। वे विवेकानंद रॉक पर घंटों अकेले बैठते थे। ऊटी और बेंगलुरु की हसीन वादियों में घूमते थे। यह बैन लगभग पांच महीने तक चला था।
दूध-जलेबी और खंडवा का अधूरा सपना
हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उनकी यह ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में उनका निधन हो गया। आज भी खंडवा में उनके प्रशंसक उनकी समाधि पर दूध-जलेबी का भोग लगाकर उन्हें याद करते हैं।
किशोर कुमार के कुछ फेमस गानें
- रूप तेरा मस्ताना (1969)
- फिल्म: आराधना
- संगीतकार: एस. डी. बर्मन
- जिंदगी एक सफर है सुहाना (1971)
- फिल्म: अंदाज
- संगीतकार: शंकर-जयकिशन
- ये शाम मस्तानी (1971)
- फिल्म: कटी पतंग
- संगीतकार: आर. डी. बर्मन
- पन्ना की तमन्ना है (1973)
- फिल्म: हीरा पन्ना
- संगीतकार: आर. डी. बर्मन
- एक लड़की भीगी भागी सी (1958)
- फिल्म: चलती का नाम गाड़ी
- संगीतकार: एस. डी. बर्मन
- मेरे महबूब कयामत होगी (1964)
- फिल्म: मिस्टर एक्स इन बॉम्बे
- संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
- मुसाफिर हूं यारों (1972)
- फिल्म: परिचय
- संगीतकार: आर. डी. बर्मन
- ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना (1978)
- फिल्म: मुकद्दर का सिकंदर
- संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
- छूकर मेरे मन को (1981)
- फिल्म: यारना
- संगीतकार: राजेश रोशन
- हमें तुमसे प्यार कितना (1981)
- फिल्म: कुदरत
- संगीतकार: आर. डी. बर्मन
अंतिम समय और चार शादियों का सफर
साल 1981 में उनके बेटे अमित कुमार की शादी टूटने की खबर से किशोर दा को बहुत गहरा मानसिक झटका लगा था। खबरों के मुताबिक, इसी तनाव के बीच उन्हें लाइफ में पहली बार दिल का दौरा पड़ा था। इस हादसे के बाद उनकी सेहत कभी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी और लगातार गिरती रही। आखिरकार 1987 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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