आज का इतिहास: महान गायक किशोर कुमार की पुण्यतिथि आज, जानिए खंडवा के आभास को कैसे मिला नया नाम

Dablu Kumar | Oct 13, 2025, 08:00 IST
Share
kishore kumar
kishore kumar

13 अक्टूबर 1987 को भारत के मशहूर गायक किशोर कुमार का निधन हो गया था। इससे भारतीय सिनेमा और संगीत को गहरा नुकसान हुआ। उन्होंने 2,500 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए।

13 अक्टूबर 1987 का दिन भारतीय सिनेमा के लिए एक बेहद दुखभरा दिन था। इसी दिन हिंदी सिनेमा के सबसे मशहूर और बहुमुखी कलाकार किशोर कुमार का निधन हो गया था। आज किशोर कुमार की पुण्यतिथि है। ऐसे में आज हम उनकी फिल्मी दुनिया के सफर के बारे में जानेंगे। साथ ही, यह भी जानेंगे कि मध्य प्रदेश के खंडवा से उन्होंने फिल्मी दुनिया का सफर कैसे तय किया था?

किशोर कुमार, जिन्हें हम प्यार से किशोर दा कहते हैं। उनका निधन मुंबई (तब बॉम्बे) में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। ये भी अजीब था कि यही दिन उनके बड़े भाई अशोक कुमार का 76वां जन्मदिन था। किशोर दा की उम्र उस वक्त सिर्फ 58 साल थी।

उनकी मौत से ठीक एक दिन पहले उन्होंने अपनी आखिरी रिकॉर्डिंग की थी। फिल्म वक्त की आवाज (1988) के लिए गुरु गुरु गाना जो आशा भोसले के साथ ड्यूएट था। इस गाने को बप्पी लहरी ने कंपोज किया था और यह मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी की फिल्म के लिए था।

किशोर कुमार को था अपनी मौत का अंदाजा

1ff640f4-ee6
1ff640f4-ee6


उनके बेटे अमित कुमार ने बाद में बताया कि किशोर दा को अपनी मौत का जैसे कुछ अंदाजा था। वो पूरे दिन कुछ ज्यादा ही चिंतित रहे। सुमीत को तैरने जाने से भी मना किया और अमित की कनाडा से आने वाली फ्लाइट के बारे में भी परेशान थे। उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर डॉक्टर को बुलाया तो असली दौरा पड़ेगा, लेकिन अचानक ही गिर पड़े। उनकी पत्नी लीना चंदावरकर को लगा कि शायद यह उनका कोई मजाक है।

इसके बाद उनका शव खंडवा भेजा गया था। जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं था, बल्कि भारतीय संगीत और सिनेमा के एक बड़े हिस्से का खो जाना था। किशोर दा ने अपने जीवन में 2,500 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जो आज भी हर उम्र के लोगों को मंत्रमुग्ध करते हैं। लेकिन उनकी विरासत सिर्फ गानों तक सीमित नहीं थी।

उन्होंने अभिनय, निर्देशन, संगीतकार, गीतकार और निर्माता के तौर पर हिंदी सिनेमा को एक नया रूप दिया। इस लेख में, हम उनके योगदान को और विस्तार से समझेंगे, जो सिर्फ मनोरंजन का ही नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को बदलने का भी एक जरिया बन गया।

एक सपनों का सफर

b56bd906-305
b56bd906-305


किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका असली नाम था आभास कुमार गांगुली। उनके पिता कुंजीलाल गांगुली एक वकील थे और मां गौरी देवी एक गृहिणी। वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई अशोक कुमार और अनूप कुमार भी सिनेमा में आए और बहन सती मुखर्जी का विवाह फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी से हुआ।

किशोर कुमार बचपन से ही संगीत और सिनेमा के शौकीन थे। उन्हें के.एल. सहगल, रवींद्रनाथ टैगोर, डैनी के और जिमी रॉजर्स जैसे कलाकारों से बहुत प्रेरणा मिली। खासकर अपने भाई अनूप कुमार के ऑस्ट्रियाई रिकॉर्ड्स सुनकर उन्होंने योडलिंग (योडलिंग) सीखा, जो बाद में उनकी गायकी का खास हिस्सा बन गया। इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद वो बॉम्बे (अब मुंबई) चले आए। जहां उनके बड़े भाई अशोक कुमार बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो के सुपरस्टार थे।

1946 में किशोर कुमार ने की अभिनय की शुरुआत

ae58d5bd-f04
ae58d5bd-f04


1946 में किशोर दा ने फिल्म शिकारी से अभिनय की शुरुआत की। लेकिन वह ज्यादा समय तक कोरस सिंगर के तौर पर सक्रिय रहे। उन्होंने अपना नाम भी बदलकर किशोर कुमार रखा ताकि वह अपने भाई के नाम से मेल खा सकें। शुरू-शुरू में वे अभिनय की तुलना में गायन पर ज्यादा ध्यान देते थे।

1948 में फिल्म जिद्दी के गाने मरने की दुआएं क्यों मांगूं से उन्होंने पार्श्वगायक के रूप में डेब्यू किया, जो देव आनंद के लिए था। यह गाना के.एल. सहगल की नकल था, लेकिन एस.डी. बर्मन ने उन्हें मशाल (1950) में नया रूप दिया। किशोर दा ने कहा था- मैं गायक बनना चाहता था, न कि अभिनेता लेकिन सिनेमा की मांग ने उन्हें बहुमुखी कलाकार बना दिया। उन्होंने 88 हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। 14 फिल्में प्रोड्यूस कीं। 12 का निर्देशन किया और संगीत भी कंपोज किया।

उनकी शुरुआती फिल्में जैसे आंदोलन (1951) और लड़की (1953) ज्यादा सफल नहीं हो पाई। लेकिन नौकरी (1954) ने उन्हें पहचान दिलाई। इस फिल्म में बेरोज़गार युवक की भूमिका ने दर्शकों को छू लिया और बिमल रॉय के निर्देशन में इस फिल्म ने सामाजिक मुद्दों को उठाया।

कॉमेडी के बादशाह और भावुक कलाकार

ad7d92c1-2d5
ad7d92c1-2d5


किशोर दा का अभिनय करियर 1950 के दशक में अपने चरम पर पहुंचा, जब उन्होंने कॉमेडी जॉनर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वह पागलपन भरी कॉमेडी के माहिर थे, जो उनकी असली ज़िंदगी की शरारतों से प्रेरित थी। 1954 से 1966 तक, उन्होंने 20 से ज्यादा हिट फिल्में दीं। चलती का नाम गाड़ी (1958) उनकी खुद की प्रोड्यूस की हुई फिल्म थी। इसमें जिसमें तीनों गांगुली भाई (अशोक, अनूप और किशोर) थे, और मधुबाला मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म के गाने जैसे एक लड़की भीगी भागी सी आज भी बहुत पॉपुलर हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और किशोर की कॉमिक टाइमिंग को बहुत सराहा गया।

पड़ोसन मूवी में किया शानदार अभिनय

Kishore Kumar Death Anniversary Unknown Facts legendary singer and actor किशोर  कुमार ने काटा था प्रोड्यूसर का हाथ, फाइनेंसर से बदला लेने के लिए कर दिया था  अलमारी में बंद ...
Kishore Kumar Death Anniversary Unknown Facts legendary singer and actor किशोर कुमार ने काटा था प्रोड्यूसर का हाथ, फाइनेंसर से बदला लेने के लिए कर दिया था अलमारी में बंद ...


पड़ोसन (1968) उनकी सबसे फेमस कॉमेडी फिल्मों में से एक थी, जिसमें उन्होंने एक दक्षिण भारतीय संगीतकार, गुरु का रोल निभाया था। इस फिल्म में सुनील दत्त, मीना कुमारी और सुचित्रा सेन के साथ उनका गाना एक चतुर नार कर्के सिंगार आज भी याद किया जाता है। किशोर दा ने खुद गाने गाए और यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ गायक नहीं, बल्कि एक बेहतरीन परफॉर्मर भी हैं। 1962 में हाफ टिकट में उन्होंने डबल रोल किया – एक बच्चे और एक बूढ़े का, जो उनकी क्रिएटिविटी को बखूबी दिखाता है। झुमरू (1961) उनकी पहली फिल्म थी जिसे उन्होंने डायरेक्ट किया था और इसमें उन्होंने प्रोडक्शन, संगीत, गीत और अभिनय सब किया। फिल्म के टाइटल सॉन्ग मैं हूं झुमरू के बाद उन्हें झुमरू के नाम से पहचान मिली।

किशोर दा थे भावुक अभिनेता

39686a3a-224
39686a3a-224


उनकी कई फिल्में मधुबाला, माला सिन्हा, वयजयंतीमाला, नूतन और कुमकुम के साथ हिट रही। दिल्ली का ठग (1958) और भागम भाग (1956) जैसी फिल्मों में उन्होंने चोर का रोल किया, जो दर्शकों को खूब हंसाते थे। लेकिन किशोर दा सिर्फ कॉमेडी के ही मास्टर नहीं थे, वे एक भावुक अभिनेता भी थे। फिल्म दूर गगन की छांव में (1964) में उन्होंने पिता-पुत्र के रिश्ते को बहुत ही भावनात्मक तरीके से दिखाया और उस फिल्म में संगीत भी उन्होंने खुद कंपोज किया।

बाद के सालों में, आयकर के विवाद और उनकी देरी की आदतों के कारण उनका अभिनय थोड़ा कम हो गया, लेकिन बढ़ती का नाम दाढ़ी (1974) और चलती का नाम जिंदगी (1982) जैसी फिल्मों ने उनकी अद्भुत प्रतिभा को फिर से जिंदा किया। उन्होंने 5 स्क्रीनप्ले भी लिखे, जिनमें से दो अधूरी रह गईं। उनके अभिनय में हमेशा सामाजिक मुद्दों की झलक थी– जैसे बेरोजगारी (फिल्म नौकरी) और पारिवारिक रिश्ते (फिल्म दूर गगन)।

कुल मिलाकर, किशोर दा ने अभिनय और गायन को मिलाकर सिनेमा को एक नई जान दी और उसे और भी जीवंत बना दिया।

आवाज जो दिलों को छू गई

किशोर दा का सबसे बड़ा योगदान था उनके पार्श्वगायन में। उन्होंने 1,200 से ज्यादा फिल्मों में 2,678 गाने गाए, जिनमें रिलीज़, अनरिलीज और शॉर्ट सॉन्ग भी शामिल थे।

किशोर कुमार ने 1948 से 1987 तक करीब 16,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें 700 से अधिक गाने उन्होंने दूसरी भाषाओं में भी गाए।

किशोर के ये गाने आज भी लोग करते हैं याद

उनकी आवाज बहुत ही विविधतापूर्ण थी – रोमांटिक गाने जैसे रूप तेरा मस्ताना, उदास गाने जैसे चलते चलते, मजेदार गाने जैसे एक चतुर नार, और योडलिंग (जो एक खास तरह की गायकी होती है) जैसे गाने जैसे जिंदगी एक सफर है सुहाना।

उन्हें एस.डी. बर्मन ने ट्रेन किया और उनका पहला बड़ा गाना था फंटूश (1956) का दुखी मन मेरे। फिर अराधना (1969) ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया, जहां मेरे सपनों की रानी, कोरा कागज था ये मन मेरा और रूप तेरा मस्ताना जैसे गाने राजेश खन्ना की आवाज़ के रूप में पॉपुलर हो गए। किशोर कुमार ने राजेश खन्ना के लिए 245 गाने गाए, जितेंद्र के लिए 202, अमिताभ बच्चन के लिए 131 और देव आनंद के लिए 119 गाने गाए।

उनकी जोड़ी आर.डी. बर्मन के साथ जादुई थी। गाने जैसे ये शाम मस्तानी (कटी पतंग- 1971), कुछ तो लोग कहेंगे (अमर प्रेम- 1972), और आने वाला पल जाने वाला है (गोलमाल, 1979) आज भी हिट हैं।

लक्समिकांत-प्यारेलाल के साथ भी उन्होंने मेरे महबूब कयामत होगी (मिस्टर एक्स इन बॉम्बे, 1964) और चल चल चल मेरे हाथी (हाथी मेरे साथी, 1971) जैसे गाने दिए। उन्होंने आशा भोसले के साथ 100 से ज्यादा ड्यूएट भी गाए, जैसे छोड़ दो आंचल (पेइंग गेस्ट, 1957)। सलील चौधरी के साथ गाया कोई होता जिसको अपना (मेरे अपने, 1971) गाना आज भी भावनाओं की ऊंचाई पर है।

13 अक्टूबर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है और 13 अक्टूबर का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है।

इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी। आइए जानते हैं 13 अक्टूबर को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं।

विश्व में महत्वपूर्ण घटनाएं

2009 – "ला बेला प्रिंसिसा" एक पेंटिंग है, जिसे पहले मान्यता नहीं मिली थी, लेकिन अब इसे लियोनार्डो दा विंची का काम माना गया है, क्योंकि इसके फिंगरप्रिंट के साक्ष्य मिले हैं।

2008 – बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और छह अन्य प्रशासकों पर यूरोपीय संघ ने अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटा दिया, ताकि वहां लोकतांत्रिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

2007 – यूक्रेन के Dnipropetrovsk में एक इमारत में प्राकृतिक गैस विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और 23 लोग घायल हुए।

2006 – पशु चिकित्सकों को सलाह दी गई कि वे अफ्रीका में हाथियों के अतिभारीकरण को नियंत्रित करने के लिए वेसोकोमियों का उपयोग करें, क्योंकि क्रूगर नेशनल पार्क में पिछले एक दशक में उनकी संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

2005 – तुर्की में मृत पक्षियों में H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की खतरनाक उपस्थिति की पुष्टि की गई थी।

2002 – इंडोनेशिया के बाली नाइट क्लब में हुए एक भीषण विस्फोट में 200 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए।

1999 – अमेरिका के सीनेट ने व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) के अनुमोदन को खारिज कर दिया।

1988 – अमेरिका ने नेवाडा में परमाणु परीक्षण किया।

1983 – शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका में आम जनता के लिए पहली सेल्युलर मोबाइल फोन सेवा की शुरुआत की गई, जो अमेरिटेक मोबाइल कम्युनिकेशंस द्वारा प्रदान की गई।

1976 – बोलीविया में एक बोइंग 707 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए। यह दुर्घटना सांता क्रूज़ शहर में एक व्यस्त सड़क पर हुई।

1976 – एंडीज में दो महीने तक खोए रहने के बाद विमान दुर्घटना में जीवित बचे लोगों ने जीवित रहने के लिए नरभक्षण किया, वे अपने मृत साथियों का मांस खाने पर मजबूर हुए।

1958 – बच्चों की अंग्रेजी साहित्य की किताब "पैडिंगटन बेयर" का पहला संस्करण 'डार्क पेरू से' प्रकाशित हुआ।

1952 – बढ़ते सार्वजनिक ऋण को लेकर चिंताएं बढ़ गईं, जो वित्त वर्ष के अंत तक 268 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान था।

1943 – इटली ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा की, जो कभी उसका सहयोगी था, और इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा सह-जुझारू भी कहा गया।

1943 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इटली ने जर्मनी के खिलाफ एक नई सरकार के साथ मित्र राष्ट्रों का समर्थन किया, और एक्सिस शक्तियों को चेतावनी दी।

1917 – पुर्तगाल के फ़ातिमा के पास कोवा दा इरिया के खेतों में कम से कम 30,000 लोग 'सूरज का चमत्कार' (Miracle of the Sun) के गवाह बने।

1914 – गैरेट मोर्गन ने गैस मास्क की खोज की और उसका पेटेंट कराया।

1911 – क्वीन विक्टोरिया के बेटे प्रिंस आर्थर को कनाडा का शाही गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया।

1892 – एडवर्ड एमर्सन बर्नार्ड ने पहली बार छायाचित्र के माध्यम से डी-1892 टी1 नामक पुच्छल तारे की खोज की।

1885 – जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना अटलांटा में पुनर्निर्माण योजना के तहत हुई थी, ताकि अमेरिकी दक्षिण में औद्योगिक अर्थव्यवस्था बनाई जा सके।

1884 – यह तय किया गया कि ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) दुनिया का मानक समय होगा। ग्रीनविच दक्षिण-पूर्वी लंदन का एक हिस्सा है।

1881 – यहूदियों को एकजुट करने के लिए हिब्रू के पुनरुद्धार की योजना बनाई गई थी, और एलीएजर बेन-येहुदा ने पेरिस में रहते हुए हिब्रू में पहली आधुनिक बातचीत की थी।

1857 – न्यूयॉर्क में 1857 के आतंक के दौरान बैंक करीब 12 दिसंबर तक बंद रहे।

1843 – दुनिया का सबसे पुराना यहूदी सेवा संगठन B'nai B'rith न्यूयॉर्क शहर में स्थापित हुआ था।

1812 – 1812 के युद्ध में ब्रिटिश सैनिकों और मोहॉक के योद्धाओं ने क्वीनस्टन, ओंटारियो के पास क्वीनस्टोन हाइट्स की लड़ाई में नियाग्रा नदी के पार से एक अमेरिकी आक्रमण को विफल कर दिया।

1807 – भूवैज्ञानिक सोसाइटी ऑफ लंदन की स्थापना की गई।

1773 – चार्ल्स मेसियर ने व्हर्लपूल गैलेक्सी की खोज की।

1773 – व्हर्लपूल आकाशगंगा की खोज चार्ल्स मेसियर ने की थी।

1760 – रूस और ऑस्ट्रिया की सेनाओं ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन से अपनी सेनाएं हटा लीं।

1716 – हंगरी के सम्राट कैरेल 6 के सैनिकों ने टेमेसेवर पर कब्जा कर लिया।

1710 – रानी ऐनी के युद्ध के दौरान फ्रांसीसी आत्मसमर्पण ने ब्रिटिशों को नोवा स्कोटिया पर स्थायी कब्जा दे दिया।

1307 – फ्रांस के राजा फिलिप चतुर्थ के एजेंटों ने शूरवीरों पर हमला किया और उनके कई सदस्यों को गिरफ्तार कर उन्हें प्रताड़ित किया।

भारत में महत्वपूर्ण घटनाएं

1999 – अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने। 1895 – भारत की क्रिकेट टीम के प्रथम टेस्ट कप्तान सी. के. नायडू का जन्म हुआ। आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...

Tags:
  • किशोर कुमार
  • आज का इतिहास
  • आज की तारीख का इतिहास
  • आज की यादगार घटनाएं
  • आज के दिन की कहानी
  • किशोर कुमार की पुण्यतिथि
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा