दिनेश मकवाना सुसाइड केस की CBI जांच, मंदाकिनी के प्रभाव में कनाडिया थाना- हाईकोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने नवंबर 2025 में सुसाइड किया था।
- वीडियो में आबकारी एसी मंदाकिनी दीक्षित पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए थे।
- परिवार ने कनाडिया थाने में केस दर्ज कराने की मांग की थी।
- हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
- कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
इंदौर के शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने देवास में 14 करोड़ रुपए के तीन शराब ठेके लिए थे। इसके बाद मकवाना ने 8 नवंबर 2025 को आत्महत्या कर ली थी। मकवाना के मरने के बाद एक वीडियो सामने आया था। इसमें उन्होंने एसी (आबकारी) मंदाकिनी दीक्षित पर रिश्वत मांगने और परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए थे।
मकवाना की मां संतोष बाई ने कनाडिया थाने में एसी दीक्षित पर केस दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर अब फैसला आ गया है।
मकवाना ने यह लगाए थे आरोप
मकवाना ने वीडियो में गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो में उन्होंने कहा था कि दीक्षित उनसे प्रति दुकान 1.50 लाख रुपए मासिक रिश्वत मांग रही हैं। उनकी पांच दुकानें हैं, यानी कुल 7.50 लाख रुपए प्रति माह की मांग (रिश्वत मांगने का आरोप) की जा रही थी। साथ ही 10 रुपए प्रति बोतल कमीशन भी मांगा जा रहा था। ऐसा न करने पर वेयरहाउस से माल नहीं दिया जाता था।
मकवाना ने वीडियो में कहा था कि वह इस पूरे मामले से वह त्रस्त हो चुके हैं। इस केस (सुसाइड केस) में मंदाकिनी दीक्षित सस्पेंड हुई थीं, लेकिन कनाडिया थाने ने उन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी।
हाईकोर्ट ने यह दिया आदेश
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने इसका आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया कि कनाडिया थाना एसी मंदाकिनी दीक्षित के प्रभाव में लगता है। इसी वजह से मामला 29 नवंबर को सामने आने के बाद भी जांच नहीं की गई।
इस मामले में फरवरी 2026 में वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट भी आ गई थी, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मकवाना ने वीडियो 2 अक्टूबर को बनाया और 8 नवंबर को सुसाइड किया। लेकिन देरी से लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह भी इतने बड़े अधिकारी पर।
मंदाकिनी दीक्षित और शासन के यह तर्क रहे
इस मामले में दीक्षित की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिए कि वीडियो पुराना है। इसमें छेड़छाड़ की गई और इसे एडिट किया गया है। ठेकेदार को 34 लाख रुपए का शुल्क भरने का नोटिस दिया गया था। यह ब्लैकमेल करने की चाल है।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिए गए कि 29 नवंबर को वीडियो थाने में दे दिया गया था। एक और वीडियो भी है, जिसमें मामले में समझौता करने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया।
शासन ने तर्क दिया कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें सीबीआई जांच कराई जाए। हाईकोर्ट ने ठेकेदार के वीडियो और अन्य तथ्यों को देखते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।
ये खबरें भी पढ़ें....
मध्य प्रदेश में बियर का संकट, शराब ठेकेदार परेशान, अधिकारियों से हो रही रोज डिमांड
आबकारी दफ्तर में शराब ठेकेदार की गुंडागर्दी, अधिकारी को जान से मारने की धमकी
इंदौर में शराब ठेकेदारों की लड़ाई में सरकार की कमाई, रजक ने जिद में लगाई सबसे महंगी बोली
शराब ठेकेदार सूरज रजक के खिलाफ FIR, 300 करोड़ की जमीन पर शराब दुकान के लिए कब्जा