एमपी में बजट सत्र से पहले कर्मचारी संगठनों ने की पुरानी पेंशन बहाली की मांग
मध्य प्रदेश शासकीय अधिकारी-कर्मचारी निगम-मंडल और पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर राज्य सरकार से अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। मोर्चा के प्रदेश संयोजक प्रमोद तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष उदित भदौरिया के नेतृत्व में राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में कई अहम प्रस्ताव किए हैं।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली
संयुक्त मोर्चा की प्रमुख मांगों में सबसे अहम मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें फिर से पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए, जिससे वे सेवानिवृत्त होने के बाद बेहतर सुरक्षा महसूस कर सकें। यह मांग कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए की गई है।
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शिक्षकों और गुरुजी का मुद्दा
संयुक्त मोर्चा ने शिक्षकों और गुरुजी के लिए एक महत्वपूर्ण मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षकों और गुरुजी को उनकी प्रथम नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता दी जाए। इससे उनके करियर में स्थिरता आएगी और उन्हें उनके अधिकार मिलेगें, जो उनके कार्यकाल की शुरुआत से संबंधित हैं।
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नियमितीकरण की मांग
लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को शुरू करने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि 8 वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र शुरू किया जाए। इससे कर्मचारियों को उनके योगदान के हिसाब से उचित पदोन्नति मिल सकेगी और वे अपने कार्य में और अधिक प्रेरित होंगे।
सेवानिवृत्ति आयु और भत्तों के समरूपता की मांग
संयुक्त मोर्चा ने सेवानिवृत्ति आयु को भाजपा के संकल्प पत्र के अनुरूप एक समान करने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार के समान गृह भाड़ा भत्ता और महंगाई भत्ता देने की भी मांग की है, जिससे कर्मचारियों को वित्तीय रूप से बेहतर स्थिति मिल सके।
कर्मचारियों के लिए समान भत्ते और सुविधाओं की मांग
मोर्चा ने मंत्रालय और फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों के लिए समान भत्ते और सुविधाओं की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने सरकारी सेवकों को वार्षिक बोनस देने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि जब सरकार किसानों, उद्योगों और लाड़ली बहना योजना के लिए धनराशि देती है, तो कर्मचारियों को भी बोनस मिलना चाहिए, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो।