टाइगर स्टेट में बाघों को बचाने देसी कुत्तों की मदद लेगी सरकार

Amresh Kushwaha | Feb 18, 2026, 16:15 IST
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन्यजीव सुरक्षा के लिए देसी K9 यूनिट बनाने का प्रस्ताव दिया है। जानें क्यों देसी कुत्ते बाघों की रक्षा के लिए विदेशी नस्लों से बेहतर हैं।

BHOPAL. टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में अब अपने जंगलों की सुरक्षा के लिए एक नई पहल करने जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए डॉग स्क्वायड में विदेशी नस्लों की बजाय देसी कुत्तों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि देसी कुत्ते भारतीय जलवायु के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। ये कुत्ते राज्य की गर्मी और मुश्किल इलाके में विदेशी नस्लों से बेहतर काम करेंगे।



वन्यजीव बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला

यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश वन्यजीव बोर्ड की 31वीं बैठक में रखा गया। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से एक देसी K9 वन्यजीव यूनिट बनाने की योजना तैयार करने को कहा। इस कदम से विदेशी नस्लों जैसे जर्मन शेफर्ड और बेल्जियन मालिनोइस पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, भारतीय नस्लों की क्षमता भी दुनिया के सामने आएगी।



क्यों बेहतर हैं हमारे देसी जांबाज

विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मन शेफर्ड जैसी नस्लें मध्यप्रदेश की गर्मी में जल्दी थक जाती हैं। देसी नस्लें गर्मी सहन करने में ज्यादा सक्षम होती हैं। इनका स्टैमिना भी बेहतर होता है। इन कुत्तों का रख- रखाव भी सस्ता है। इन्हें वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षित कर शिकार विरोधी गश्त और वन्यजीव अपराधों की जांच में तैनात किया जाएगा।



15 साल का गौरवशाली इतिहास

मध्यप्रदेश में वन कुत्तों के दस्ते की शुरुआत 2010 में हुई थी। पिछले 15 सालों में इस दस्ते ने शानदार काम किया है। इन कुत्तों ने 612 वन्यजीव अपराधों का खुलासा किया। साथ ही, एक हजार 340 आरोपियों को गिरफ्तार करने में मदद की। इसमें बाघ और तेंदुओं के शिकार जैसे गंभीर मामले भी शामिल हैं। अब दस्ते में 18 सक्रिय कुत्ते हैं, जबकि 5 कुत्ते सेवानिवृत्त हो चुके हैं।



भविष्य की तैयारी और विशेष प्रशिक्षण

नई योजना के तहत वन विभाग को नस्ल चयन, प्रशिक्षण और पशु चिकित्सा सहायता का पूरा खाका तैयार करने को कहा गया है। इन देसी कुत्तों को बाघ अभयारण्यों और हाथी गलियारों जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा। ये कुत्ते रात के समय ट्रैकिंग, रक्त के निशान पहचानने और मानव-वन्यजीव संघर्ष में त्वरित प्रतिक्रिया देंगे। ये देसी रक्षक इन कामों में माहिर होंगे।



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