मध्य प्रदेश विभागीय समीक्षा 2026: हर विभाग को एक घंटे में बताना होगा पूरा हिसाब-किताब
सरकारी विभाग खर्च तो करते हैं पर नतीजे सामने नहीं आते तो सवाल उठना लाजमी है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने अब इसी सवाल का जवाब मांगने की तैयारी कर ली है। राज्य के सभी विभागों को एक तय समय में अपना हिसाब देना होगा कि उन्होंने किया क्या और उसका फायदा किसे मिला।
हर विभाग को देना होगा जवाब
मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary) नीरज मंडलोई ने सभी विभागों को एक विशेष पावरपॉइंट टेम्पलेट (PowerPoint Template) जारी किया है। यह टेम्पलेट क्यूआर (QR) कोड के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।
एमपी में विभागीय समीक्षा का यह टेम्पलेट सभी विभागों को अपनी जरूरत के हिसाब से भरना है। इसमें विभाग की उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे की योजना शामिल होगी। बता दें कि समीक्षा बैठकें 21 मई से शुरू होंगी। हर विभाग को इस दौरान एक घंटे का समय मिलेगा, जिसमें पूरा ब्योरा पेश करना होगा।
15 मई तय है डेडलाइन
सभी विभागों से कहा गया है कि मध्य प्रदेश विभागीय समीक्षा 2026 के लिए 15 मई तक अपनी पूरी जानकारी और प्रेजेंटेशन तैयार कर भिजवाएं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जानकारी भेजने से पहले ए-प्लस (A+) मानक के संदर्भ और मुख्यमंत्री की घोषणाओं को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करना होगा।
सिर्फ खर्च नहीं, नतीजे भी चाहिए
मध्य प्रदेश विभागीय समीक्षा 2026 के अभियान में विभागों से सिर्फ वित्तीय आंकड़े नहीं मांगे जा रहे। बल्कि उन्हें लाभार्थी डेटा, संपत्ति निर्माण का ब्योरा और सेवाओं की समय सीमा भी सामने रखनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, 8 से 10 मई के बीच हुई गहन विभागीय समीक्षा में खास तौर पर अंतिम चरण की कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया।
12 मई से पहले सभी जिलों में जिला विकास समिति की बैठकें भी अनिवार्य की गई थीं। यानी यह अभियान सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं है, जिला स्तर पर भी जवाबदेही तय की जा रही है।
मुख्यमंत्री का संदेश- जन कल्याण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इरादे ही नतीजे तय करते हैं और मध्य प्रदेश आज जन कल्याण का प्रतीक बनकर उभरा है। यह बात सिर्फ एक नारा नहीं है। इसे जमीन पर उतारने के लिए ही यह पूरा समीक्षा तंत्र खड़ा किया जा रहा है।
हर विभाग को सीमित समय में अपनी उपलब्धियों की संक्षिप्त, लेकिन पूरी तस्वीर पेश करनी होगी। यह प्रक्रिया बताती है कि सरकार अब काम की गिनती से आगे बढ़कर काम के असर को मापने की कोशिश कर रही है।
जवाबदेही की नई बुनियाद
मध्य प्रदेश में इस तरह की विभागीय समीक्षा प्रक्रिया पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार फर्क यह है कि पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन का एक तय ढांचा दिया गया है। साथ ही पोर्टल अपडेट को समीक्षा प्रक्रिया से सीधे जोड़ा गया है। यह पहल छोटी जरूर लग सकती है, लेकिन प्रशासनिक संस्कृति को बदलने की दिशा में यह एक ठोस और जरूरी कदम है।
यह खबर क्यों जरूरी है
मध्य प्रदेश में शुरू हुई यह विभागीय समीक्षा प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि यह नागरिकों के प्रति सरकारी जवाबदेही को सीधे मापने की कोशिश करती है। जब सरकारी योजना का पैसा खर्च तो होता है, लेकिन उसका असर जमीन पर नहीं दिखता, तो यही सवाल जरूरी बन जाता है।
मध्य प्रदेश में विभागीय समीक्षा क्यों की जा रही है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सभी विभागों को यह दिखाने का निर्देश दिया है कि उन्होंने अपने काम में क्या हासिल किया। यह समीक्षा सिर्फ बजट खर्च की जांच नहीं है, बल्कि इसमें लाभार्थियों की संख्या, सेवाएं मिलने की समयसीमा और योजनाओं के वास्तविक परिणाम भी शामिल हैं।
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