AI का यूज कर MP पुलिस कर रही कमाल, किडनैंप हुए बच्चों को मां-बाप से मिला रही
मध्य प्रदेश में एक समय था जब डकैतों का खौफ था, लेकिन अब अपहरण जैसी घटनाएं उभरने लगी हैं। ग्वालियर चंबल अंचल में हर साल सैकड़ों बच्चे गायब हो जाते हैं। यह समस्या अभी भी जारी है, लेकिन पुलिस इन बच्चों को परिवारों से मिलाने का प्रयास कर रही है। पिछले 14 महीनों में 475 से अधिक बच्चों को पुलिस ने बचाया है। इनमें से कई बच्चों को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से ढूंढा गया है। फिर भी अपहरण की घटनाएं लगातार हो रही हैं।
फिल्मी स्टाइल में किडनैपिंग
पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई
दतिया जिले में भी अपहरण की घटना हुई। दो नाबालिग बच्चियों को स्कूल बस के ड्राइवर ने अपहरण किया था। हालांकि बच्चियों ने शोर मचाया और आरोपियों ने उन्हें छोड़ दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और दोनों बच्चियों को सुरक्षित बचा लिया।
टेक्नोलॉजी का सहारा
ऑपरेशन मुस्कान: बच्चों को तलाशने की नई रणनीति
"ऑपरेशन मुस्कान" के तहत पुलिस बच्चों को ढूंढने का प्रयास कर रही है। ग्वालियर जिले में पिछले साल 436 नाबालिग बच्चे गायब हुए थे, जिनमें से 428 बच्चों को पुलिस ने रिकवर किया। 2025 के पहले दो महीनों में भी 62 बच्चों के अपहरण के मामले सामने आए थे, जिनमें से 58 बच्चों को पुलिस ने ढूंढ निकाला।
प्रशासन ने क्या बताया?
ग्वालियर पुलिस अधीक्षक ( SP ) धर्मवीर सिंह यादव के अनुसार, कई बच्चे घर से नाराज होकर भाग जाते हैं, कुछ को पारिवारिक विघटन के कारण, और कुछ को प्रेम प्रसंग में अपनी स्थिति बदलने की कोशिश में। पुलिस इन मामलों में बच्चों की जल्द से जल्द बरामदगी को प्राथमिकता देती है।
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क्या है ऑपरेशन मुस्कान की खासियत?
दरअसल, मध्य प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन मुस्कान में एक विशेष रणनीति अपनाई जाती है। इस अभियान के तहत, अलग-अलग टीमों को एक ही उद्देश्य के लिए काम करने के लिए तैयार किया जाता है। बच्चों के मिलने के बाद, उन्हें परिवार से मिलाया जाता है और कोर्ट के निर्देश पर उन्हें सुपुर्द किया जाता है।
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