मालेगांव ब्लास्ट में हाईकोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक, महू के शर्मा और देपालपुर के चौधरी को राहत
मालेगांव में हुए ब्लास्ट (malegaon blast case) में आरोपियों को राहत मिल गई है। अभी ट्रायल पर बॉम्बेहाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लोकेश, राजेंद्र और मृत सुनील जोशी व अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
जांच मुख्य तौर पर स्वामी असीमानंद के बयान पर थी। इसमें उन्होंने 6 लड़कों के शामिल होने की बात कही थी। बाद में बयान वापस लिया था।
इस आधार पर मिली राहत
बॉम्बेहाईकोर्ट में आरोपियों की ओर से तर्क दिए गए कि कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। साथ ही बयानों को पहले ही कोर्ट में खारिज किया जा चुका है। ऐसे में आरोप तय नहीं हो सकते हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी है।
लंबे समय रहना पड़ा था जेल
इंदौर के लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी को साल 2013 में गिरफ्तार (मालेगांव ब्लास्ट न्यूज) किया गया था। करीब छह साल बाद साल 2019 में हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
यह था मालेगांव ब्लास्ट केस
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों में 31 लोगों की जान चली गई थी, और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये धमाके हमीदिया मस्जिद, कब्रिस्तान परिसर और मुशावरत चौक पर हुए थे।
इस मामले की जांच पहले सीबीआई और फिर एनआईए ने की थी। सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे, लेकिन आरोपियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस केस में इंदौर (Indore News) के लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, धनसिंह और मनोहर नरवरिया को आरोपी बनाया गया था।
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