चलती बैठक रोककर रीवा कमिश्नर ने कराया 49 अफसरों का शुगर टेस्ट, 16 का लेवल हाई
समझें क्या है पूरा
- मामला मैहर में सरकारी बैठक के दौरान अधिकारी बार-बार वॉशरूम गए।
- कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह इस बात से नाराज हो गए।
- उन्होंने मौके पर ही सबका ब्लड शुगर टेस्ट कराने का आदेश दिया।
- 49 अधिकारियों की जांच में 16 का शुगर लेवल 200 से ज्यादा निकला।
- तीन अधिकारियों को पहली बार पता चला कि उन्हें डायबिटीज है।
क्या हुआ बैठक में
मध्य प्रदेश के मैहर जिला मुख्यालय में गुरुवार को एक अनोखी घटना हुई। यहां विभिन्न सरकारी विभागों की प्रगति समीक्षा बैठक चल रही थी। बैठक रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ले रहे थे। बैठक के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी बार-बार उठकर वॉशरूम जा रहे थे। यह सिलसिला कुछ ही देर में कमिश्नर की नजर में आ गया। पहले तो उन्होंने इसे सामान्य बात समझा। लेकिन जब यह बार-बार होने लगा तो उनका धैर्य जवाब दे गया।
क्यों भड़के कमिश्नर
रीवा कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने तल्ख लहजे में अधिकारियों से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि आप लोग बार-बार बाहर क्यों जा रहे हैं। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या आप सब शुगर के मरीज हैं। यह सवाल सुनकर बैठक में मौजूद सभी अधिकारी चौंक गए। कमिश्नर ने बात यहीं नहीं छोड़ी। उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई का फैसला किया। बैठक में मौजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला को उन्होंने सख्त निर्देश दिए। निर्देश था कि हर अधिकारी और कर्मचारी का ऑन-स्पॉट ब्लड शुगर टेस्ट कराया जाए।
49 की रैंडम ब्लड शुगर जांच
कमिश्नर का आदेश मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। सिविल अस्पताल मैहर के पैरामेडिकल स्टाफ को तुरंत बुलाया गया। स्टाफ अपने साथ मेडिकल किट लेकर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष पहुंचा। बैठक कक्ष के ठीक बाहर एक छोटा जांच शिविर तैयार किया गया। यहां ग्लूकोमीटर से जांच की व्यवस्था की गई। एक-एक करके सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की उंगली से खून का सैंपल लिया गया। कुल 49 लोगों की रैंडम ब्लड शुगर जांच की गई। यह पूरी प्रक्रिया बैठक के बीच में ही पूरी हुई।
16 अधिकारियों का शुगर निकला हाई
जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कमिश्नर की टेबल पर रखी गई। नतीजे देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी हैरान रह गए। कुल 49 लोगों में से 16 का शुगर लेवल 200 से ज्यादा पाया गया। इनमें से तीन आला अधिकारी ऐसे थे, जिन्हें पहली बार पता चला। उन्हें जिंदगी में पहली बार मालूम हुआ कि वे डायबिटीज के मरीज हैं। बाकी 13 अधिकारी और कर्मचारी पहले से ही शुगर के मरीज थे। लेकिन उनकी बीमारी अभी तक अनियंत्रित थी और इलाज अधूरा चल रहा था। शेष 33 अधिकारियों का शुगर लेवल पूरी तरह सामान्य पाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक बार-बार वॉशरूम जाना डायबिटीज का एक शुरुआती लक्षण होता है। काम के दबाव में अक्सर लोग इस लक्षण को नजरअंदाज कर देते हैं।
कमिश्नर की सीख- सेहत को हल्के में ना लें
रिपोर्ट देखने के बाद कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह का गुस्सा कुछ शांत हुआ। उन्होंने बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों को स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। कमिश्नर ने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारी अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही बेहतर कामकाज संभव है। कमिश्नर ने यह भी कहा कि लगातार वॉशरूम जाना गंभीर संकेत हो सकता है। इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को एक जरूरी निर्देश भी दिया। निर्देश था कि जिन अधिकारियों की रिपोर्ट अनियंत्रित आई है उन्हें तुरंत इलाज मिले। ऐसे सभी अधिकारियों को चिकित्सीय परामर्श और जरूरी दवाइयां दी जाएं। इस पूरी घटना के बाद मैहर जिला मुख्यालय में यह चर्चा का विषय बन गया। कई अधिकारियों ने माना कि उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। यह वाकया सरकारी दफ्तरों में सेहत को लेकर एक नई बहस भी छेड़ गया।
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