क्या मुस्कान के बाद सोनम रघुवंशी को भी मिलेगी फांसी की सजा? जानें राजा की हत्या पर क्या कहता है कानून
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केवल एक जैसी धाराओं के आधार पर सोनम को भी फांसी हो सकती है? आइए इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।
तीनों चर्चित मामलों का विवरण
तीनों मामलों में अपराध का तरीका, शव छिपाने की कोशिश और कानूनी स्थिति को अलग-अलग बिंदुओं में इस तरह समझा जा सकता है।
मेरठ केस 1: नीला ड्रम हत्याकांड
बता दें कि मुस्कान रस्तोगी ने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी। आरोप है कि पहले पति को नशीला पदार्थ दिया और फिर उसकी जान ले ली। इसके बाद शव को नीले ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट भर दिया, ताकि शव छिपाया जा सके। अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई है।
मेरठ केस 2: रविता कश्यप
मेरठ की ही रविता ने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर पति अमित कश्यप की हत्या की थी। आरोप है कि दोनों ने गला दबाकर अमित की जान ले ली। इसके बाद हत्या को छिपाने के लिए शव के पास एक जिंदा जहरीला सांप छोड़ दिया, ताकि लोगों को लगे कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है। अदालत ने 16 अक्टूबर 2026 को रविता और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई है।
मेघालय केस: सोनम रघुवंशी
सोनम रघुवंशी (sonam raghuvanshi) पर आरोप है कि उसने प्रेमी राज के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी। उस पर सुपारी देकर दो शूटर बुलाने का भी आरोप है। आरोप है कि शादी के तुरंत बाद वह हनीमून के बहाने राजा को मेघालय ले गई।
वहां भाड़े के शूटरों से उसकी हत्या करवा दी गई। इसके बाद राजा का शव मेघालय की एक गहरी खाई में फेंक दिया गया। फिलहाल यह मामला अदालत में चल रहा है। 16 अक्टूबर को इसकी 39वीं पेशी हुई थी।
राजा रघुवंशी हत्याकांड की पूरी कहानी
बता दें कि इंदौर के रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम के साथ हुई थी। शादी के कुछ ही दिन बाद 20 मई को दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। 22 मई को दोनों सोहरा पहुंचे और रात में नोंग्रियाट के एक होम स्टे में ठहरे थे।
अगले दिन यानी 23 मई को सोहरा पहुंचने से पहले ही दोनों अचानक लापता हो गए। इसके बाद 26 मई को राजा के भाई ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस की छानबीन के बाद 2 जून 2025 को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले की एक गहरी खाई से राजा का शव बरामद हुआ था।
सोनम के सरेंडर तक की टाइमलाइन
- 26 मई 2025: राजा रघुवंशी के लापता होने की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
- 2 जून 2025: मेघालय की खाई से राजा का शव बरामद किया गया था।
- 3 जून 2025: मेघालय के सोहरा थाने में हत्या की एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।
- 9 जून 2025: पुलिस ने सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया था।
- 5 सितंबर 2025: पुलिस ने अदालत में सोनम के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी।
- 28 अक्टूबर 2025: सोनम समेत सभी पांच आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने के आरोप तय किए गए थे।
- 10 फरवरी 2026: पूरक चार्जशीट पेश कर मामले में आर्म्स एक्ट (Arms Act) की धाराएं भी जोड़ी गई थीं।
- 27 अप्रैल 2026: गिरफ्तारी के कागजात में धारा 103(1) की जगह गलती से 403(1) लिखे जाने के आधार पर निचली अदालत ने सोनम को जमानत दी थी।
- 29 जून 2026: मेघालय हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के जमानत के फैसले को बरकरार रखा था।
- 23 जुलाई 2026: राज्य सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल धारा की लिपिकीय गलती जमानत का आधार नहीं हो सकती और जमानत रद्द कर दी।
- 29 जुलाई 2026: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने अदालत में दोबारा सरेंडर किया था।
क्या सोनम को भी होगी फांसी?
हाईकोर्ट के अधिवक्ता ओमेंद्र मिश्रा के अनुसार, कानून की नजर में हर हत्या का मामला एक जैसा नहीं होता है। किसी मामले में अगर हत्या और आपराधिक साजिश की धाराएं लगी हैं, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सजा भी फांसी ही होगी। अदालत सजा तय करते समय कई जरूरी पहलुओं पर विचार करती है।
1. उम्रकैद या बरी होने की संभावना
अदालत केवल उन्हीं मामलों में फांसी की सजा देती है जो रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आते हैं। यदि सोनम पर हत्या का आरोप साबित भी हो जाता है, लेकिन अदालत को लगता है कि यह मामला इस श्रेणी में नहीं आता, तो अदालत उसे मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुना सकती है।
उम्रकैद का मतलब हर मामले में केवल 14 साल की जेल नहीं होता है। वहीं दूसरी तरफ अगर सरकारी वकील यानी अभियोजन पक्ष अदालत के सामने पर्याप्त सबूत नहीं रख पाता, तो आरोपी बरी भी हो सकता है।
2. साजिश में सीधी भूमिका साबित करना जरूरी
सोनम के मामले में सबसे अहम बात साजिश को साबित करना है। अदालत यह बारीकी से देखेगी कि कथित साजिश में सोनम की असल में क्या भूमिका थी। शूटरों से हत्या करवाने के आरोपों की पुष्टि पूरी तरह से गवाहों और दस्तावेजी सबूतों पर निर्भर करेगी। जब तक यह कड़ी अदालत में साबित नहीं होती, तब तक सजा तय नहीं की जा सकती है।